Agriculture News: नागौर में ग्वार पर मौसम की मार, खेतों में सूख रही फसल, चारे का संकट भी गहराया

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नागौर में ग्वार पर मौसम की मार, खेतों में सूख रही फसल, चारे का संकट भी गहराया
Last Updated:August 25, 2026, 08:08 IST
Nagaur Cluster Bean Crop Crisis: नागौर में ग्वार की फसल पर मौसम की मार किसानों की चिंता बढ़ा रही है. बुटाटी धाम सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश का लंबा अंतराल होने से खेतों में खड़ी फसल सूखने लगी है. किसानों ने महंगे बीज, खाद, जुताई, मजदूरी और कीटनाशकों पर हजारों रुपए प्रति बीघा खर्च किए थे, लेकिन अब फसल बचाना मुश्किल हो रहा है. बारिश की कमी के बीच चली गर्म और शुष्क पश्चिमी हवाओं को स्थानीय तौर पर ओकर कहा जाता है, जिसने पौधों से नमी और तेजी से खींच ली. कई खेतों में पौधे झुलसे हुए नजर आ रहे हैं. फूल सूखकर गिर रहे हैं और फलियां बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. सफेद मक्खी और उकटा जैसे रोग-कीटों ने भी परेशानी बढ़ाई है. ग्वार के साथ मूंग की फसल से मिलने वाले चारे पर भी संकट मंडरा रहा है. किसानों को अब बारिश से ही राहत की उम्मीद है.
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नागौर. राजस्थान के नागौर के बुटाटी धाम सहित अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में इस बार ग्वार की फसल किसानों के लिए उम्मीद से संकट में बदल गई है. मानसून की शुरुआत अच्छी रहने से किसानों ने बड़े पैमाने पर ग्वार की बुआई की थी. महंगे बीज, खाद, जुताई, निराई-गुड़ाई और कीटनाशकों पर हजारों रुपये प्रति बीघा खर्च किए गए. फसल जब बढ़वार और फलियां बनने के अंतिम चरण में पहुंची, तभी बारिश का सिलसिला थम गया. अब खेतों में खड़ी फसल पीली और काली पड़कर सूखने लगी है.
नागौर जिले में बड़ी संख्या में किसान बारानी खेती पर निर्भर हैं. ऐसे में लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण खेतों की मिट्टी में नमी लगभग खत्म हो चुकी है. जिन पौधों को इस समय पर्याप्त नमी और बारिश की जरूरत थी, वे पानी के अभाव में कमजोर पड़ गए हैं. किसानों का कहना है कि सिंचाई के पर्याप्त साधन नहीं होने से फसल को बचाने का कोई विकल्प भी नहीं है. अब आसमान की ओर टकटकी लगाए किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं.
शुष्क पश्चिमी हवाओं ने बढ़ाई परेशानी
बारिश की कमी के बीच पिछले दिनों चली गर्म और शुष्क पश्चिमी हवाओं ने किसानों की मुश्किल और बढ़ा दी. स्थानीय भाषा में इन हवाओं को ओकर कहा जाता है. तेज गर्म हवाओं के कारण पौधों की पत्तियों और तनों से नमी तेजी से खत्म हो रही है. फूल सूखकर गिर रहे हैं और फलियां बनने से पहले ही फसल कमजोर पड़ रही है. कई खेतों में पौधे ऊपर से नीचे तक झुलसे हुए दिखाई दे रहे हैं. नमी की कमी के बीच सफेद मक्खी और उकटा जैसे रोग-कीटों का असर भी किसानों की चिंता बढ़ा रहा है.
दवा का खर्च भी गया, फसल भी नहीं बची
किसानों का कहना है कि फसल को बचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. उच्च गुणवत्ता का बीज खरीदकर बुआई की, खेतों में निराई-गुड़ाई कराई और दो बार दवाइयों का छिड़काव भी कराया. इसके बावजूद बारिश नहीं होने से पूरी मेहनत बेकार होती नजर आ रही है. किसानों का कहना है कि समय पर बारिश होती तो बीज, ट्रैक्टर किराया, खाद, मजदूरी और दवाइयों पर हुआ खर्च निकलने के साथ कुछ आमदनी की उम्मीद भी रहती.
ग्वार के साथ चारे का संकट भी गहराया
फसल खराब होने का असर सिर्फ किसानों की आय तक सीमित नहीं रहेगा. ग्वार और मूंग की फसल से मिलने वाला चारा भी इस बार नहीं मिलने की आशंका है. इससे पशुपालकों के सामने पशुओं के लिए चारे और पानी का संकट खड़ा हो सकता है. किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो ग्वार उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है और क्षेत्र में अकाल जैसे हालात बन सकते हैं. अब किसानों की नजर खेतों पर नहीं, बल्कि आसमान पर टिकी है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Nagaur,Rajasthan
First Published :
August 25, 2026, 08:08 IST



