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Loan Haircut : 6.5 करोड़ में रफादफा हो गया 22 हजार करोड़ का कर्ज, बैंकों को झेलना पड़ेगा 99.9 फीसदी नुकसान

Last Updated:August 26, 2026, 23:43 IST

Loan Haircut : एनसीएलटी ने एक कर्ज मामले में कारोबारी सुभाष चंद्रा को 99.9 फीसदी हेयरकट का फायदा दिया है. इसका मतलब है कि उन्होंने कुल कर्ज की महज 0.01 फीसदी राशि लेकर निपटारा कर दिया है. यह सारा नुकसान बैंकों को झेलना पड़ेगा, जबकि वह इस समाधान योजना का विरोध कर रहे हैं. ऐसे खत्म होता है अमीरों का कर्ज, 6.5 करोड़ में निपट गया 22 हजार करोड़ का लोनZoomएनसीएलटी ने सुभाष चंद्रा केस में 99.9 फीसदी का हेयरकट लगाया है.

नई दिल्ली. बैंकों में जमा आम आदमी का पैसा और उनकी गाढ़ी कमाई कारोबारियों और मोटे कर्जदारों पर खुलेआम बर्बाद हो रही है. राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने एक हालिया मामले में 22 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा के कर्ज के मामले को महज 6.5 करोड़ रुपये में रफादफा करने की मंजूरी दे दी है. एनसीएलटी ने यह फैसला तब दिया है जबकि कुछ समय पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बैंकों को मोटे हेयरकट के जरिये आम आदमी के पैसों को ऐसे ही बर्बाद नहीं करना चाहिए और कर्जदारों से उसकी वसूली की हरसंभव कोशिश करनी चाहिए.

ताजा मामले में एनसीएलटी ने मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के कर्ज को महज 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान पर सेटलमेंट करने की मंजूरी दे दी है. योजना को मंजूरी मिलने से कर्जदाताओं यानी बैंकों को करीब 99.97 फीसदी बकाया का नुकसान (हेयरकट) स्वीकार करना होगा.एनसीएलटी के न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा ने न्यायाधिकरण के तीसरे सदस्य के रूप में मंगलवार को दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 114 के तहत निपटान योजना को मंजूरी दी. उन्होंने कर्जदाताओं की उन आपत्तियों को खारिज कर दिया, जिनमें प्रस्तावित वसूली को बेहद कम बताते हुए योजना को मंजूरी नहीं देने की मांग की गई थी.

बैंकों के विरोध को भी ठुकरायाइससे पहले एनसीएलटी की दो-सदस्यीय पीठ ने अलग-अलग राय दी थी. इसके बाद मतभेद के निपटारे के लिए न्यायाधिकरण के अध्यक्ष ने शर्मा को तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया था. एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की अगुवाई वाले कर्जदाताओं के समूह ने योजना को अव्यावहारिक और गैरकानूनी बताते हुए इसका विरोध किया था. एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस ने कहा था कि करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले योजना में कर्जदाताओं को केवल 6.25 करोड़ रुपये और प्रक्रिया लागत के लिए 25 लाख रुपये देने का प्रस्ताव है.

किस पर कितना कर्ज बकायाएनसीएलटी के आदेश के अनुसार, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का स्वीकृत दावा 1,322.39 करोड़ रुपये था, जबकि उसके लिए प्रस्तावित भुगतान महज 38,09,294 रुपये था. यह उसके स्वीकृत दावे का करीब 0.028 फीसदी ही था.आपत्ति करने वाले कर्जदाताओं ने यह भी कहा था कि पुनर्भुगतान योजना में 6.5 करोड़ रुपये की प्रस्तावित राशि को भी निश्चित नहीं, बल्कि संकेतात्मक बताया गया है. लिहाजा यह योजना अस्थायी और गैर-निश्चित है और इसे मंजूरी नहीं दी जा सकती. हालांकि, एनसीएलटी ने कहा कि आपत्ति करने वाले कर्जदाताओं के पास कुल मिलाकर 20 फीसदी से कम मताधिकार ही था, जबकि योजना को 80.81 फीसदी मतों का समर्थन हासिल था.

शर्मा के पास इससे भी कम संपत्तिएनसीएलटी के तीसरे सदस्य शर्मा ने 144 पृष्ठ के आदेश में कहा कि समाधान पेशेवर के आकलन के मुताबिक, चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति का मूल्य योजना के तहत प्रस्तावित राशि से भी काफी कम था. ऐसे में योजना को खारिज करने पर असहमत कर्जदाताओं को अधिक राशि मिलने की संभावना नहीं थी. न्यायाधिकरण ने कहा कि योजना को मंजूरी मिलने से चंद्रा की वित्तीय स्थिति सुधरने और उनके मूल कर्जदाताओं से असहमत कर्जदाताओं को सीधे वसूली की बेहतर संभावना बन सकती है. मामला अब बहुमत की राय के अनुरूप औपचारिक आदेश पारित करने के लिए मूल दो सदस्यीय पीठ के पास वापस जाएगा.यह प्रक्रिया कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 419(5) के तहत होगी.

About the AuthorPramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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New Delhi,Delhi

First Published :

August 26, 2026, 23:43 IST

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