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Famous Temples: हाड़ौती के 5 अनोखे मंदिर, कहीं 2000 साल पुरानी मान्यता तो कहीं 525 शिवलिंग, दूर-दूर से आते हैं भक्त

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हाड़ौती के 5 अनोखे मंदिर, कहीं 2000 साल पुरानी मान्यता तो कहीं 525 शिवलिंग

Last Updated:August 27, 2026, 06:53 IST

Hadoti Famous Temples: राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जहां धार्मिक आस्था के साथ इतिहास, लोक मान्यताएं और प्राकृतिक सुंदरता भी देखने को मिलती है. बूंदी, कोटा और बारां से लेकर झालावाड़ तक मौजूद ये मंदिर सदियों पुरानी परंपराओं और स्थानीय संस्कृति से जुड़े हुए हैं. केशवरायपाटन का प्राचीन केशवराय मंदिर चंबल नदी के किनारे स्थित होने के कारण धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टि से खास है. वहीं झालावाड़ के कामखेड़ा बालाजी मंदिर में राजस्थान के साथ मध्यप्रदेश और आसपास के राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. बूंदी के इंदरगढ़ में पहाड़ी पर स्थित बिजासन माता मंदिर अपनी प्राचीन मान्यताओं और प्राकृतिक गुफा के कारण अलग पहचान रखता है. कोटा का 525 शिवलिंग मंदिर भी भक्तों के लिए अनोखा आस्था केंद्र है, जबकि बारां का श्री कल्याणराय जी मंदिर शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है. सावन, सोमवार और अन्य विशेष अवसरों पर इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है.

बूंदी जिले के केशवरायपाटन में चंबल नदी के किनारे स्थित प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर है. भगवान विष्णु के केशव राय स्वरूप को समर्पित इस मंदिर का निर्माण राव राजा छत्रसाल ने 1641 ईस्वी में पूर्ण करवाया था. धार्मिक मान्यता के अनुसार राजा रंतिदेव की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने दो प्रतिमाओं के रूप में दर्शन दिए. श्वेत पत्थर की केशवजी और काले पत्थर की चारभुजा नाथ प्रतिमा मंदिर की भव्य स्थापत्य कला और चंबल नदी का मनोहारी दृश्य इसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल बनाता है.

झालावाड़ जिले में अकलेरा से करीब 16 किलोमीटर दूर कामखेड़ा कस्बे में स्थित प्रसिद्ध प्राचीन हनुमान मंदिर है. बालाजी के रूप में पूजे जाने वाले हनुमान जी के इस मंदिर में वर्षभर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां पूजा-अर्चना और विशेष अनुष्ठानों से नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति की कामना की जाती है. राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों से श्रद्धालु दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं. आस्था और धार्मिक परंपराओं के कारण कामखेड़ा बालाजी प्रमुख तीर्थस्थलों में गिना जाता है.

बूंदी जिले के इंदरगढ़ में स्थित बिजासन माता मंदिर, देवी दुर्गा को समर्पित एक प्राचीन और पूजनीय पहाड़ी तीर्थस्थल है. मान्यता है कि यह मंदिर 2,000 वर्ष से भी अधिक पुराना है. स्थानीय किंवदंती के अनुसार, बाबा कृपानाथ जी महाराज की कठोर तपस्या के बाद देवी की स्वयंभू प्रतिमा एक चट्टान को चीरकर प्रकट हुई थी. प्राकृतिक गुफा में स्थित यह मंदिर पहाड़ी की ऊंचाई पर बना है, जहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 700 से 750 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है.

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कोटा में स्थित 525 शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है. यहां एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में शिवलिंग स्थापित होने के कारण यह धार्मिक स्थल अपनी अनोखी पहचान रखता है. सावन के महीने में यहां भगवान शिव की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. भक्त शिवलिंगों पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं. सोमवार और महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं.

बारां शहर के सदर बाजार में स्थित प्रसिद्ध श्री जी मंदिर, जिसे श्री कल्याणराय जी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, भगवान विष्णु के कल्याणराय स्वरूप को समर्पित एक प्राचीन एवं आस्था का प्रमुख केंद्र है. भगवान कल्याणराय जी को बारां के आराध्य देव के रूप में पूजा जाता है. मंदिर में वर्षभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व के साथ यह मंदिर बारां की सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है.

First Published :

August 27, 2026, 06:53 IST

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