Healthy Diet : क्या है हेल्दी डाइट? हमारे पूर्वजों को हमसे बेहतर पता था, आप यहां जान लीजिए

Last Updated:August 28, 2026, 16:13 IST
Healthy Diet: क्या होती है हेल्दी डाइट. क्या हम इसे खा रहे है. इसका सिंपल जवाब है हम हेल्दी डाइट को सही से नहीं जानते. हमारे पूर्वज हमसे बहुत बेहतर तरीके से जानते थे. उनकी डाइट में ऐसी ऐसी चीजें होती थी जो प्रकृति के अनुकूल होती थी. इतना ही नहीं उनकी डाइट शरीर के बायलॉजिकल रिद्म के हिसाब से होती थी. अब सवाल है कि वे लोग क्या खाते थे जो इतने हेल्दी रहते थे. आइए इसके बारे में जानते हैं.
आज हमारा खान-पान बहुत खराब हो गया है. हमारे चारों तरफ अनहेल्दी फूड की बाढ़ आई हुई है. जंक फूड, पिज्जा, बर्गर, चाउमीन, मोमोज, फास्ट फूड के बढ़ते चलन ने हमारी सेहत पर बहुत बुरा असर डाला है. ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि हेल्दी फूड होती क्या है. इसका सीधा सा जवाब है कि हमारे पूर्वज जो खाते थे, वे हेल्दी फूड थे. यानी आज से 50-100 साल पहले हमारे दादा-परदादा जो खाते थे, वे एकदम शुद्ध हेल्दी फूड होते थे. यही कारण था कि इन लोगों को मोटापा, डायबिटीज, हार्ट, लिवर, किडनी आदि से संबंधित कोई क्रोनिक बीमारी विरले ही होती थी. ज्यादातर लोग हेल्दी होते थे. इसका सबसे बड़ा कारण यही था कि वे लोग हेल्दी फूड का सेवन करते थे. Photo : AI
अब सवाल है कि हेल्दी फूड है क्या. अपोलो अस्पताल में जेरिएट्रिक एंड लॉन्गिविटी साइंस के डायरेक्टर डॉ. प्रसून चटर्जी कहते हैं कि हमारे पूर्वज जो खाते थे, उनमें से अधिकांश चीजें हेल्दी होती थी. उन्हें पता था कि शरीर की घड़ी और प्रकृति के हिसाब से उन्हें कौन सा भोजन शूट करेगा. उन्होंने कहा कि हमारे ऋषि-मुनि तब यह काम करते थे जब हमारे पास विज्ञान इतना उन्नत नहीं था. वे लोग प्रकृति के हिसाब से अपनी दिनचर्या को संतुलित करते थे. अगर आज भी हम इस नियम का पालन करें तो हमारी सेहत से जुड़ी आधी समस्या यूं ही समाप्त हो जाएगी.
डॉ. प्रसून चटर्जी बताते हैं कि जिस फूड में कई तरह के पोषक तत्व मौजूद हो और जिसका साइड इफेक्ट कम से हो वही फूड सबसे ज्यादा हेल्दी होता है. पेड़-पौधे से निकलने वाली चीजें सबसे शुद्ध माना जाता है. अगर इन चीजों को बिना किसी मिलावट के साथ कुदरती रूप में खाया जाए तो यह हमारे शरीर के लिए सबसे फायदेमंद साबित होगा. यही कारण है कि हमारे दादा-दादी साबुत अनाज पर निर्भर रहते थे. वे उनकी जड़ और तने खाते थे. साथ ही मौसमी सब्जियां, घर के बने दूध उत्पाद, मेवे और बीज और कम से तेल-मसाले वाली चीजें खाते थे.
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50 साल पहले तक मोटे अनाज जैसे कि रागी, बाजरा और ज्वार सबसे ज्यादा चलन में था. रागी,बाजरा और ज्वार का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से रोटी, दलिया, चीला और अन्य रोजमर्रा के व्यंजनों में होता था. आजकल यह दोबारा से पॉपुलर होने लगा है. आज भी अगर इन अनाजों को हमारी थाली में नियमित रूप से शामिल किया जाए तो इसके परिणाम क्रांतिकारी होंगे.डॉक्टर कहते हैं कि रागी, बाजरा, ज्वार और अमरंथ जैसे पारंपरिक अनाजों को दैनिक आहार में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए, न कि केवल एक अस्थायी विकल्प के रूप में. बाजरा तो बेहद फायदेमंद है. इन्हें रोटी, चीला और दलिया जैसे पॉपुलर फूड में शामिल किया जा सकता है.इसे खाने के लिए खान-पान में पूरी तरह से बदलाव करने की आवश्यकता भी नहीं है. Photo : Canva
शरीर में भरपूर प्रोटीन के लिए सत्तू सबसे ज्यादा पावरफुल फूड था. सत्तू काला चना से बनाया जाता है. चना मोटे अनाज का बेशकीमती हीरा है. सदियों से उत्तर भारत में सत्तू का सेवन किया जाता रहा है. सत्तू में भरपूर प्रोटीन होता है जो पूरे दिन के प्रोटीन की जरूरत को पूरा कर देता है. इसके साथ ही प्रोटीन के लिए पुराने जमाने के लोग रोज दाल खाते थे. दाल के अलावा राजमा, लोबिया आदि की सब्जी से पर्याप्त प्रोटीन मिल जाता था. आज भी अगर सत्तू को रोजाना की डाइट में शामिल किया जाए तो इससे कई बीमारियो से छुटकारा मिल सकती है.
मूंगफली और तिल पहले के जमाने के मुख्य सीड्स होते थे. इससे तरह-तरह के परवान बनाए जाते थे. इसकी चटनी, लड्डू या दलिया बनाकर मिठाई की तरह खाया जाता था. आज भी तिल के लड्डू के सामने मिठाइयां फेल है. सीड्स के अलावा पहले के जमाने के लोग सूखे मेवे का भी खूब सेवन करते थे. इसके लिए बादाम, अखरोट, छुहारे आदि का खूब सेवन करते थे. अगर आज भी इन चीजों को रोजाना की डाइट में शामिल किया जाए तो कई बीमारियों से यूं ही दूर रहा जा सकता है. यही सब हेल्दी फूड है बाकी सब बेकार है.
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August 28, 2026, 05:11 IST



