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चंबल में बढ़ा ऊदबिलावों का कुनबा, बच्चों को शिकार सिखाते कैमरे में कैद, एक्सपर्ट बोले- नदी के लिए शुभ संकेत

Last Updated:August 29, 2026, 06:18 IST

Kota Chambal Wildlife: कोटा में चंबल नदी अब वन्यजीव पर्यटन के लिहाज से भी खास पहचान बना रही है. नदी के मुकुंदरा टाइगर रिजर्व से सटे हिस्से में ऊदबिलावों की संख्या बढ़ने के संकेत मिले हैं. हाल में ऊदबिलावों को अपने बच्चों को शिकार की ट्रेनिंग देते हुए देखा गया, जिससे विशेषज्ञों में उत्साह है. वन्यजीव विशेषज्ञ एएच जैदी के अनुसार चंबल क्षेत्र में इनकी संख्या करीब 20 है और परिस्थितियां अनुकूल रहने पर यह आंकड़ा 50 तक पहुंच सकता है. शोधकर्ताओं के मुताबिक ऊदबिलावों की मौजूदगी नदी के जलीय पर्यावरण और पानी की गुणवत्ता के लिए भी अच्छी मानी जाती है. मानसून में चंबल की प्राकृतिक खूबसूरती बढ़ने के साथ यहां झरने और वन्यजीव पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं. वाटर सफारी और वाइल्डलाइफ टूरिज्म के विस्तार के बीच ऊदबिलावों की मौजूदगी कोटा के पर्यटन को नया आकर्षण दे सकती है

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चंबल में बढ़ा ऊदबिलावों का कुनबा, बच्चों को शिकार सिखाते कैमरे में कैदZoomकोटा के चंबल नदी में दिखा ऊदविलावों का कुनबा

कोटा. चंबल नदी की पहचान अब केवल कोटा शहर की लाइफलाइन और खूबसूरत नदी के तौर पर नहीं रह गई है. यहां का शांत वातावरण और साफ पानी वन्यजीवों को भी अपनी ओर खींच रहा है. खासकर नदी में रहने वाले ऊदबिलावों की बढ़ती मौजूदगी ने वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है. मुकुंदरा टाइगर रिजर्व से लगे चंबल के हिस्से में इन जलीय जीवों की गतिविधियां लगातार देखने को मिल रही हैं. हाल ही में ऊदबिलावों का एक परिवार कैमरे में कैद हुआ, जिसमें बड़े ऊदबिलाव अपने बच्चों को मछलियों का शिकार करने की कला सिखाते नजर आए.

यह दृश्य इसलिए भी खास है, क्योंकि इससे चंबल के जलीय पर्यावरण में ऊदबिलावों के अनुकूल माहौल होने के संकेत मिलते हैं. वन्यजीवों पर लंबे समय से नजर रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक चंबल क्षेत्र में ऊदबिलावों की संख्या बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं. उनके अनुसार फिलहाल यहां करीब 20 ऊदबिलाव होने का अनुमान है, लेकिन अनुकूल परिस्थितियां बनी रहीं तो आने वाले समय में इनकी संख्या 50 तक पहुंच सकती है. उनका कहना है कि चंबल के आसपास का प्राकृतिक वातावरण इनके प्रजनन के लिए भी उपयुक्त है.

ऊदबिलाव दिखे तो नदी के लिए क्यों अच्छी खबर?

ऊदबिलावों की बढ़ती संख्या का एक असर पर्यटन पर भी दिखाई देने लगा है. वन्यजीव और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी में रुचि रखने वाले लोग इनकी तस्वीरें और गतिविधियां कैमरे में कैद करने के लिए चंबल किनारे पहुंच रहे हैं. इससे कोटा के वाइल्डलाइफ टूरिज्म को एक नया आकर्षण मिल रहा है. वन्यजीव शोधकर्ताओं के अनुसार किसी नदी में ऊदबिलावों की मौजूदगी उसके जलीय इकोसिस्टम की स्थिति का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है. ऊदबिलाव मुख्य रूप से मीठे पानी में रहते हैं और मछलियों समेत अन्य जलीय जीवों का शिकार करते हैं.

चंबल में लगातार नजर आ रहे हैं उदविलाव

चंबल में इनके परिवारों का लगातार नजर आना बताता है कि नदी का वातावरण उनके लिए अनुकूल बना हुआ है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि ऊदबिलाव अब अपने बच्चों को शिकार करने की प्रक्रिया भी सिखाते दिखाई दे रहे हैं. इसका मतलब यह है कि यहां उनका समूह केवल अस्थायी तौर पर मौजूद नहीं है, बल्कि वे नदी के आसपास अपना प्राकृतिक जीवन चक्र आगे बढ़ा रहे हैं. विशेषज्ञ इसे चंबल के जलीय पर्यावरण के लिहाज से सकारात्मक संकेत मान रहे हैं.

मानसून में चंबल की खूबसूरती बनी आकर्षण

मानसून के दौरान चंबल का प्राकृतिक नजारा और ज्यादा आकर्षक हो गया है. नदी की ऊंची-नीची कराइयों से जगह-जगह पानी के झरने गिर रहे हैं, जबकि नदी के किनारे वन्यजीवों की गतिविधियां भी दिखाई दे रही हैं. ऐसे में पर्यटकों को एक ही जगह नदी, झरने और वन्यजीवों का अनुभव मिल रहा है. कोटा में वाटर सफारी के साथ जंगल और वाइल्डलाइफ सफारी को भी पर्यटन की नई पहचान देने की कोशिश की जा रही है. मुकुंदरा टाइगर रिजर्व से जुड़े चंबल क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी इस दिशा में संभावनाओं को और मजबूत करती है. ऊदबिलावों का बढ़ता कुनबा अब चंबल की एक नई पहचान बन सकता है. अगर इनके लिए अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियां बनी रहीं तो आने वाले समय में यह इलाका वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए खास आकर्षण बन सकता है.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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August 29, 2026, 06:18 IST

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