Khatu Shyam Ji Mandir Aarti Time Changed

Last Updated:August 29, 2026, 08:41 IST
Khatu Shyam Ji Mandir New Aarti Timings: विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर की आरती के समय में 29 अगस्त से बदलाव किया गया है. श्री श्याम मंदिर कमेटी के अनुसार, सुबह की श्रृंगार आरती अब 7:00 बजे की जगह सुबह 7:15 बजे और संध्या आरती शाम 7:30 बजे की जगह शाम 7:15 बजे होगी. मंगला (4:30 AM), भोग (12:30 PM) और शयन आरती (10:00 PM) अपने पूर्व निर्धारित समय पर ही रहेंगी. मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं से नई समय-सारणी के अनुसार दर्शन के लिए आने की अपील की है.
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Khatu Shyam Ji Mandir Aarti Timings: विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर में बाबा श्याम के दर्शन और आरती में शामिल होने वाले देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आई है. श्री श्याम मंदिर कमेटी ने मंदिर में दैनिक रूप से आयोजित होने वाली प्रमुख आरतियों के समय में बदलाव की आधिकारिक घोषणा की है. यदि आप भी आने वाले दिनों में बाबा श्याम के दरबार में हाजिरी लगाने और आरती का पुण्य लाभ कमाने की योजना बना रहे हैं, तो मंदिर प्रशासन द्वारा जारी की गई नई समय-सारणी के बारे में विस्तार से जान लेना आवश्यक है.
श्री श्याम मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने जानकारी देते हुए बताया कि मंदिर की प्राचीन और धार्मिक परंपराओं के अनुसार समय-समय पर ऋतु परिवर्तन तथा पंचांगीय तिथियों के आधार पर बाबा श्याम की आरती के समय में संशोधन किया जाता है. इसी क्रम में श्रावण शुक्ल पक्ष के समापन और भाद्रपद कृष्ण पक्ष के प्रारंभ होने के अवसर पर 29 अगस्त से यह नई व्यवस्था पूरे मंदिर परिसर में लागू कर दी गई है. सामान्य दिनों में खाटूश्याम जी मंदिर में प्रतिदिन कुल पांच प्रमुख आरतियां आयोजित की जाती हैं, जिनमें से प्रत्येक आरती का अपना विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है. इन पांचों आरतियों में से दो आरतियां सबसे खास मानी जाती हैं क्योंकि इस दौरान बाबा श्याम का दिव्य और अलौकिक श्रृंगार किया जाता है, जिससे भक्तों को बाबा के विभिन्न मनमोहक रूपों के दर्शन प्राप्त होते हैं. मंदिर कमेटी ने इन्हीं दो मुख्य आरतियों के समय में संशोधन किया है.
श्रृंगार और संध्या आरती के समय में किया गया संशोधननई समय-सारणी के अनुसार, बाबा श्याम की प्रसिद्ध ‘श्रृंगार आरती’ का समय बदल दिया गया है. पहले यह आरती सुबह 07:00 बजे आयोजित होती थी, लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत यह सुबह 07:15 बजे संपन्न होगी. इसी प्रकार, शाम के समय होने वाली ‘संध्या आरती’ के समय में भी बदलाव हुआ है. पूर्व में संध्या आरती शाम 07:30 बजे होती थी, जिसे अब 15 मिनट पहले यानी शाम 07:15 बजे कर दिया गया है. श्री श्याम मंदिर कमेटी ने सभी श्याम भक्तों से अपील की है कि वे इस नए समय को ध्यान में रखते हुए ही मंदिर परिसर में दर्शन के लिए पहुंचे, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा या परेशानी का सामना न करना पड़े.
बाबा श्याम की पांचों आरतियों का विस्तृत टाइम टेबलखाटूश्याम जी मंदिर में रोजाना आयोजित होने वाली पांचों आरतियों का नया और पूरा शेड्यूल इस प्रकार है:
मंगला आरती (सुबह 04:30 बजे): यह दिन की पहली आरती होती है, जो ग्रीष्मकाल में प्रातः काल मंदिर के कपाट खुलते ही बाबा श्याम के प्रथम दर्शन के साथ संपन्न की जाती है.
श्रृंगार आरती (सुबह 07:15 बजे): इस आरती में बाबा श्याम का मनमोहक श्रृंगार किया जाता है. उन्हें रंग-बिरंगे ताजे देसी-विदेशी फूलों, स्वर्ण-रजत आभूषणों और आकर्षक देव वस्त्रों (बागा) से सजाया जाता है.
भोग आरती (दोपहर 12:30 बजे): यह आरती अपने पूर्व निर्धारित समय पर ही आयोजित होगी. इसमें बाबा श्याम को विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट पकवानों, पेड़ों और खीर-चूरमे का विशेष भोग लगाया जाता है.
संध्या आरती (शाम 07:15 बजे): शाम के समय बाबा की विशेष धूप-दीप से आरती उतारी जाती है, जिसमें हजारों भक्त एक साथ शामिल होकर जयकारे लगाते हैं.
शयन आरती (रात 10:00 बजे): यह दिन की अंतिम आरती होती है, जिसके संपन्न होने के पश्चात आम दर्शनार्थियों के लिए मंदिर के मुख्य कपाट बंद कर दिए जाते हैं.
जानिए क्यों कहलाते हैं बाबा श्याम ‘हारे का सहारा’?खाटूश्याम जी को सनातन धर्म में ‘हारे का सहारा’ कहा जाता है और भक्त उन्हें साक्षात भगवान श्री कृष्ण का कलयुगी अवतार मानकर पूजते हैं. इसके पीछे महाभारत काल से जुड़ी एक बेहद रोचक और पवित्र पौराणिक कथा है. महाभारत के महान धर्मयुद्ध के समय पांडवपुत्र भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक कौरवों की ओर से युद्ध के मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे. बर्बरीक के पास तीन ऐसे अमोघ बाण थे, जिनसे वे संपूर्ण ब्रह्मांड को कुछ ही क्षणों में समाप्त कर सकते थे. जब भगवान श्रीकृष्ण को बर्बरीक की इस असीम शक्ति और उनके ‘हारे हुए पक्ष का साथ देने’ के वचन का पता चला, तो वे एक ब्राह्मण का छद्म वेश धारण कर बर्बरीक के समक्ष पहुंचे. श्रीकृष्ण ने दान के रूप में बर्बरीक से उनका शीश मांग लिया. वीर बर्बरीक ने बिना किसी हिचकिचाहट और संकोच के अपना शीश काटकर भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया.
बर्बरीक के इस अद्वितीय त्याग और परम भक्ति से अति प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में वे उनके स्वयं के नाम ‘श्याम’ से पूजे जाएंगे. इसके साथ ही श्रीकृष्ण ने यह भी वचन दिया कि जो भी व्यक्ति संसार से निराश, असहाय या हारा हुआ होकर सच्चे श्रद्धा भाव से उनकी शरण में आएगा, बाबा श्याम उसके जीवन का सबसे बड़ा सहारा बनेंगे. इसी पौराणिक वरदान के कारण आज भी करोड़ों भक्त बाबा श्याम को ‘हारे का सहारा’ मानकर उनके दरबार में शीश नवाते हैं.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Sikar,Sikar,Rajasthan
First Published :
August 29, 2026, 08:41 IST



