Bikaner News I बीकानेर के ‘कलयुग के कर्ण’ राव लूणकरण की गौरवगाथा

Last Updated:August 29, 2026, 12:40 IST
बीकानेर के इतिहास में राव लूणकरण का नाम वीरता, दानशीलता और प्रजावत्सल शासन के लिए सम्मान से लिया जाता है. अत्यधिक उदारता के कारण उन्हें ‘कलयुग का कर्ण’ कहा गया, उन्होंने राज्य की सुरक्षा मजबूत करने के साथ जल संरक्षण, पर्यावरण और धार्मिक स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया. लूणकरणसर कस्बे और झील की स्थापना उनकी दूरदर्शिता और जनकल्याणकारी सोच का उदाहरण है.
बीकानेर. बीकानेर रियासत के शासक राव लूणकरण अपनी वीरता, उदारता और प्रजा के प्रति उत्तरदायित्व के कारण इतिहास में विशिष्ट स्थान रखते हैं. उनकी अत्यधिक दानशीलता के चलते उन्हें ‘कलयुग का कर्ण’ कहा गया. उन्होंने न केवल राज्य की सीमाओं और सुरक्षा को मजबूत किया, बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण और धार्मिक स्थलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया. राव लूणकरण ने अपने शासनकाल में एक दयालु, उदार और प्रजावत्सल शासक की भूमिका निभाई. वर्ष 1526 में नारनौल क्षेत्र के ढोसी युद्ध में लड़ते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए. दानशीलता, वीरता और जनकल्याणकारी कार्यों के कारण उनका नाम आज भी बीकानेर के इतिहास में बड़े सम्मान से लिया जाता है.
इतिहासकार जानकीदत्त श्रीमाली ने बताया कि राव बीका के बाद उनके दूसरे पुत्र राव लूणकरण बीकानेर के शासक बने. वे प्रकृति प्रेमी थे और उन्होंने जाल के वृक्ष को राज्य वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया. उनके शासनकाल में गांवों और मंदिरों के आसपास पेड़-पौधे लगवाने तथा हरियाली बढ़ाने के प्रयास किए गए. राव लूणकरण की दानशीलता से जुड़ी कई घटनाओं का इतिहास में उल्लेख मिलता है. जैसलमेर विजय के बाद उन्होंने अपने चारण कवि को एक लाख ‘पसाव’ का दान दिया था. उनकी उदार परंपरा का प्रभाव अगली पीढ़ी पर भी पड़ा. बताया जाता है कि उनके पुत्र कर्मसी ने सिरोही के आशा चारण को एक करोड़ का दान दिया था. जरूरतमंदों और धार्मिक कार्यों के लिए राव लूणकरण ने राज्य कोष के द्वार खोल दिए थे.
महापराक्रमी योद्धा और कुशल प्रशासक
चित्तौड़ के महाराणा रायमल की पुत्री और महाराणा सांगा की बहन आनंदकुमारी से विवाह के अवसर पर भी राव लूणकरण ने उपहारों की वर्षा कर अपनी उदारता का परिचय दिया. तत्कालीन राज्य कवि ने उनके शासन की प्रशंसा करते हुए बीकानेर की तुलना कश्मीर से की थी. कवि के अनुसार, राव लूणकरण की उदार नीतियों के कारण राज्य समृद्ध, सुरक्षित और आदर्श बन गया था. श्रीमाली के अनुसार, राव लूणकरण केवल दानवीर ही नहीं, बल्कि महापराक्रमी योद्धा और कुशल प्रशासक भी थे. राव बीका की मृत्यु के बाद सीमावर्ती शक्तियों ने बीकानेर राज्य में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया.
ऐसे समय में राव लूणकरण ने आक्रमणकारियों और उपद्रवी ताकतों को दंडित कर राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित की. फतेहपुर के शासक परिवार के आंतरिक विवाद के कारण बीकानेर में बढ़ते हस्तक्षेप को भी उन्होंने सैन्य कार्रवाई के जरिए रोका. उनकी सबसे बड़ी विशेषता जनता के प्रति उत्तरदायित्व था. बीकानेर क्षेत्र में मीठे पानी की कमी दूर करने के लिए उन्होंने अपने नाम पर लूणकरणसर कस्बे और झील की स्थापना करवाई. यह स्थान आज भी उनके दूरदर्शी शासन और जल प्रबंधन की पहचान बना हुआ है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Bikaner,Rajasthan
First Published :
August 29, 2026, 12:40 IST



