sikar news I अब स्कूल बताएंगे खेत की सेहत, किसानों को मिलेगा डिजिटल सॉइल हेल्थ कार्ड

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जिला मुख्यालय की दौड़ खत्म! गांव के पास ही होगी मिट्टी-पानी की जांच
Last Updated:August 29, 2026, 14:58 IST
किसानों को अब मिट्टी-पानी की जांच के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. कृषि विभाग प्रदेश के 549 पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में मिट्टी जांच लैब स्थापित करेगा, जिनमें सीकर के 26 स्कूल शामिल हैं. दिसंबर तक शुरू होने वाली इस सुविधा से किसानों को स्थानीय स्तर पर सॉइल हेल्थ कार्ड मिलेगा, वहीं विद्यार्थियों को भी मिट्टी-पानी जांच का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा.
खेत की मिट्टी और पानी की जांच के लिए अब किसानों को जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. गांव के नजदीक ही पीएमश्री स्कूलों में मिट्टी-पानी जांच की सुविधा मिलने वाली है. कृषि विभाग प्रदेश के 549 पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में मिट्टी जांच लैब स्थापित करने जा रहा है. इनमें सीकर जिले के 26 स्कूल शामिल हैं. इसमें किसानों को समय पर जमीन की सेहत की जानकारी दी जाएगी और संतुलित खाद-उर्वरक के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा.
कृषि विभाग ने चयनित पीएमश्री स्कूलों में इसी साल दिसंबर तक लैब स्थापित कर जांच सुविधा शुरू करने का लक्ष्य रखा है. प्रत्येक स्कूल के लिए करीब एक लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया गया है. इसी राशि से लैब के लिए जरूरी उपकरण, केमिकल किट और टेस्टिंग रीएजेंट खरीदे जाएंगे. चयनित स्कूलों को पहले सॉइल हेल्थ कार्ड पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जिसके बाद मिट्टी और पानी के नमूनों की जांच की प्रक्रिया शुरू होगी.
इस योजना की खास बात यह है कि स्कूल की लैब सिर्फ किसानों के लिए जांच केंद्र नहीं होगी. इसमें सरकारी स्कूल के स्टूडेंट्स को व्यावहारिक ज्ञान सीखने का मौका भी मिलेगा. इसमें कक्षा 7, 8, 9 और 11वीं के विद्यार्थियों को मिट्टी-पानी के नमूने लेने और जांच करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा. टीचर्स और कृषि विभाग के एक्सपर्ट मिलकर स्टूडेंट्स को प्रशिक्षण देंगे. इससे बच्चों को किताबी पढ़ाई के साथ कृषि विज्ञान और आधुनिक तकनीक का ज्ञान भी मिलेगा.
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मिट्टी-पानी जांच की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा. खेत से सैंपल लेते समय मोबाइल एप के माध्यम से किसान का विवरण और जीपीएस लोकेशन दर्ज की जाएगी. इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि नमूना किस खेत से लिया गया है और उसकी जांच किस स्तर पर पहुंची. जांच पूरी होने के बाद परिणाम ऑनलाइन दर्ज होंगे और किसान को डिजिटल सॉइल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा.
सीकर में मिट्टी जांच की जरूरत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर साल 30 हजार से अधिक किसान मिट्टी जांच के लिए सैंपल लेकर पहुंचते हैं. इसके मुकाबले करीब 12 हजार सैंपलों की ही जांच हो पाती है. जिला मुख्यालय से दूर रहने वाले किसानों के लिए जांच करवाना और रिपोर्ट हासिल करना समय लेने वाला काम बन जाता है. ऐसे में स्कूलों में लैब खुलने से जांच क्षमता बढ़ने के साथ किसानों को स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलेगी.
समय पर मिट्टी की जांच नहीं होने से कई बार किसान जमीन की वास्तविक जरूरत जाने बिना उर्वरकों और रासायनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं. इससे खेती की लागत बढ़ने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है. सॉइल हेल्थ कार्ड के जरिए किसानों को मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्वों और उसकी जरूरत के अनुसार खाद-उर्वरक प्रबंधन की जानकारी मिल सकेगी. इससे संतुलित पोषण प्रबंधन और बेहतर कृषि उत्पादन की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है.
First Published :
August 29, 2026, 14:58 IST



