Famous Temple: जहां कभी मिलती थी फांसी की सजा, वहां अब बरसती है महादेव की कृपा, जानिए फांसीकाट मंदिर की कहानी

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जयपुर के इस शिव मंदिर का नाम क्यों पड़ा फांसीकाट? कहानी जान रह जाएंगे हैरान
Last Updated:August 30, 2026, 06:45 IST
Jaipur Famous Phansikat Mahadev Temple: जयपुर की ऐतिहासिक पहचान केवल हवेलियों और बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि परकोटे की गलियों में कई ऐसे मंदिर भी हैं जिनसे दिलचस्प लोकमान्यताएं जुड़ी हैं. किशनपोल बाजार में स्थित फांसीकाट महादेव मंदिर भी ऐसा ही धार्मिक स्थल है. स्थानीय मान्यता के अनुसार इस जगह का संबंध रियासतकाल में दी जाने वाली फांसियों से रहा है, जिसके बाद यहां भगवान शिव की स्थापना हुई और मंदिर फांसीकाट महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ. मंदिर से जुड़ी लोककथा में एक महात्मा का भी जिक्र मिलता है, जिन्हें झूठे आरोप में फांसी की सजा दी गई थी. आज यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए संकटमोचन आस्था का केंद्र है. सावन और महाशिवरात्रि पर यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं.
जयपुर के परकोटे की ऐतिहासिक गलियों में चलते हुए जब कदम किशनपोल बाजार के अजायबघर रास्ते के नुक्कड़ पर पहुंचते हैं, तो आसपास की भीड़ और बाजार के शोर के बीच एक अलग तरह की शांति महसूस होती है. इसी शांत वातावरण में स्थित है फांसीकाट महादेव मंदिर. यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि जयपुर के इतिहास और धार्मिक परंपराओं से जुड़ा ऐसा स्थान है. इस मंदिर करबारे में कई रोचक मान्यताएं आज भी लोगों के बीच प्रचलित हैं. संकट के समय भगवान शिव के दरबार के रूप में देखते हैं और यहां पहुंचकर मन की परेशानियों से निजात पाते हैं.
लोक मान्यता के अनुसार रियासतकाल में इसी स्थान के आसपास एक पेड़ पर गंभीर अपराधों के दोषियों को फांसी दी जाती थी. बताया जाता है कि अंग्रेजी शासन के दौरान कुछ अपराधियों को महाराजा की अनुमति के बिना फांसी दे दी गई थी. इस घटना से राज दरबार नाराज हुआ था. समय बीतने के साथ इस स्थान पर भगवान शिव की स्थापना की गई और धीरे-धीरे यह फांसीकाट महादेव के नाम से प्रसिद्ध हो गया.
मंदिर से जुड़ी एक अन्य लोककथा भी श्रद्धालुओं के बीच काफी प्रचलित है. समाजसेवी संजय जायसवाल बताते हैं कि उनके बुजुर्गों से उन्होंने एक महात्मा की कहानी सुनी थी, जिन्हें झूठे आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई थी. बताया जाता है कि फांसी दिए जाने से पहले महात्मा ने सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना की. जब उन्हें दंड देने की तैयारी की जा रही थी, तभी अचानक वहां एक काला सर्प दिखाई दिया. इस घटना के बाद फांसी की कार्रवाई रोक दी गई और महात्मा की जान बच गई.
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आज भी फांसीकाट महादेव मंदिर में आने वाले कई श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं. कोई पारिवारिक परेशानी से छुटकारा पाने की प्रार्थना करता है तो कोई लंबे समय से चल रहे विवाद या मानसिक तनाव से राहत की उम्मीद लेकर भगवान शिव के सामने शीश नवाता है. कई लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना यहां जरूर सुनी जाती है. यही कारण है कि बाजार की व्यस्तता के बीच स्थित होने के बावजूद मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है.
आधुनिकता और तेजी से बदलते शहरी जीवन के बीच भी इस मंदिर से जुड़ा लोकविश्वास आज तक कायम है. सावन के महीने में मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन किए जाते हैं. इस दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है और मंदिर परिसर में शिव भक्ति का माहौल दिखाई देता है. शोभायात्रा और सहस्त्रघट जैसे आयोजनों के माध्यम से भगवान शिव की आराधना की जाती है. स्थानीय लोगों के लिए ये आयोजन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी परंपरा और सामुदायिक आस्था को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है.
महाशिवरात्रि के अवसर पर फांसीकाट महादेव मंदिर में खासा उत्साह देखने को मिलता है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं. भक्त महादेव से परिवार की सुख-शांति के साथ-साथ पूरे समाज की सुरक्षा और खुशहाली की कामना करते हैं. स्थानीय लोगों की प्रार्थना रहती है कि समाज में चोरी, डकैती और अन्य आपराधिक घटनाओं पर रोक लगे तथा लोगों में आपसी भाईचारा बना रहे. इस तरह मंदिर की आस्था व्यक्तिगत मनोकामनाओं से आगे बढ़कर सामाजिक शांति और सद्भाव की भावना से भी जुड़ी हुई है.
First Published :
August 30, 2026, 06:45 IST



