टिकट बंटते ही बीजेपी में बगावत, कई बड़े पदाधिकारी नाराज होकर छोड़ा पद

Last Updated:August 31, 2026, 12:17 IST
Alwar Nagar Nikay Chunav BJP Ticket Dispute: अलवर नगर निगम चुनाव में बीजेपी के संभावित टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर विरोध खुलकर सामने आ गया है. 65 वार्डों में प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया. विवेकानंद मंडल अध्यक्ष जितेंद्र सिंह राठौड़ और केशव मंडल अध्यक्ष महेश निहलवानी ने टिकट वितरण पर नाराजगी जताते हुए अपने पद छोड़ दिए. वरिष्ठ महामंत्री संजू यादव और महिला मोर्चा की पदाधिकारी मधु आर्य ने भी पार्टी नेतृत्व के फैसले पर सवाल उठाए हैं. नाराज नेताओं का आरोप है कि वर्षों से संगठन के लिए मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर बाहरी और कांग्रेस वाले लोगों को टिकट में प्राथमिकता दी गई. चुनाव से ठीक पहले सामने आए इस सामूहिक असंतोष ने बीजेपी संगठन की चिंता बढ़ा दी है.
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अलवर नगर निगम चुनाव में बीजेपी के संभावित टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर विरोध खुलकर सामने आ रहा है
अलवर. नगर निगम चुनाव के लिए बीजेपी की ओर से 65 वार्डों में संभावित प्रत्याशियों के टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर विरोध खुलकर सामने आ गया है. टिकटों में जमीनी कार्यकर्ताओं की कथित अनदेखी से नाराज कई मंडल अध्यक्षों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. नेताओं ने टिकट वितरण में बाहरी चेहरों और कांग्रेस पृष्ठभूमि वाले लोगों को तवज्जो देने का आरोप लगाया है. चुनाव से ठीक पहले एक साथ कई पदाधिकारियों के इस्तीफे से बीजेपी संगठन में खलबली मच गई है. नाराज कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक पार्टी को मजबूत करने के लिए मेहनत की, लेकिन टिकट बांटते समय उनकी निष्ठा और मेहनत को नजरअंदाज कर दिया गया. कार्यकर्ताओं की नाराजगी का असर अब चुनावी मैदान में भी दिखाई देने की आशंका है. ऐसे में बीजेपी के सामने प्रत्याशियों को चुनाव जिताने के साथ ही अपने नाराज कार्यकर्ताओं को साधने की चुनौती खड़ी हो गई है.
विवेकानंद मंडल के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह राठौड़ ने टिकट वितरण से नाराज होकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया. राठौड़ के मुताबिक मंडल के अधीन आने वाले वार्डों में लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं की जगह ऐसे लोगों को टिकट दिया गया, जिनकी संगठन में सक्रियता और पृष्ठभूमि को लेकर कार्यकर्ताओं में सवाल हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि समर्पित कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर कांग्रेस पृष्ठभूमि वाले नेताओं को प्राथमिकता दी गई. साथ ही सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित वार्डों में दूसरे वर्ग के प्रत्याशियों को टिकट देने पर भी उन्होंने सवाल उठाए. राठौड़ ने कहा कि स्थानीय मंत्री और बड़े नेताओं ने कार्यकर्ताओं के साथ दगा किया है. उनका कहना है कि निकाय चुनाव किसी एक बड़े नेता का नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं का चुनाव है. ऐसे में कार्यकर्ताओं की अनदेखी का सीधा असर पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है.
केशव मंडल अध्यक्ष ने भी छोड़ा पद
टिकट वितरण से नाराजगी के चलते केशव मंडल अध्यक्ष महेश निहलवानी ने भी इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर संगठन के लिए मेहनत की और लोगों के बीच पार्टी की जमीन मजबूत की. इसके बावजूद टिकट वितरण में बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी गई. निहलवानी के मुताबिक लगातार मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं को यदि चुनाव के समय ही नजरअंदाज किया जाएगा तो इससे संगठन के भीतर असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है. उन्होंने टिकट वितरण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए.
महामंत्री और महिला मोर्चा की पदाधिकारी भी नाराज
विरोध की आवाज मंडल अध्यक्षों तक ही सीमित नहीं है. बीजेपी के वरिष्ठ महामंत्री संजू यादव ने भी टिकट वितरण पर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि वे वर्ष 1999 से पार्टी के अलग-अलग पदों पर काम कर रहे हैं, लेकिन यदि कार्यकर्ताओं के सम्मान और उनकी राय का ध्यान नहीं रखा जाएगा तो ऐसी व्यवस्था में काम करना मुश्किल है. वहीं बीजेपी महिला मोर्चा की प्रमुख पदाधिकारी मधु आर्य ने भी पार्टी नेतृत्व के फैसले के खिलाफ नाराजगी जताते हुए पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है. उनका कहना है कि निकाय चुनाव में जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है, लेकिन टिकट वितरण में उनकी राय को महत्व नहीं दिया गया.
महापौर बनाने की राह में बगावत बड़ी चुनौती
नगर निगम चुनाव से ठीक पहले मंडल अध्यक्षों और प्रमुख पदाधिकारियों के इस्तीफे बीजेपी के लिए बड़ा झटका माने जा रहे हैं. पार्टी जहां अलवर नगर निगम में बोर्ड बनाने और महापौर पद हासिल करने की रणनीति पर काम कर रही है, वहीं संगठन के भीतर ही असंतोष खुलकर सामने आ गया है. अब बीजेपी नेतृत्व के सामने दोहरी चुनौती है. एक तरफ घोषित प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में मजबूती से उतारना होगा, वहीं दूसरी ओर नाराज कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को मनाना होगा. यदि यह असंतोष समय रहते नहीं थमा तो बगावत का असर कई वार्डों के चुनावी समीकरण पर पड़ सकता है. खासकर उन सीटों पर बीजेपी को नुकसान हो सकता है, जहां नाराज कार्यकर्ताओं की पकड़ मजबूत है. चुनाव से पहले सामने आई यह बगावत बीजेपी के लिए महापौर की राह मुश्किल करने वाला बड़ा फैक्टर बन सकती है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Alwar,Rajasthan
First Published :
August 31, 2026, 12:17 IST



