NPS New Rule : एनपीएस में भी मिलेगी गारंटी वाली पेंशन, फिर नियम बदलने की तैयारी में पीएफआरडीए और सरकार

Last Updated:September 08, 2026, 08:02 IST
NPS New Rule : एनपीएस में जिस बात से कर्मचारी घबराते थे, अब उस खामी को दूर करने पर विचार किया जा रहा है. पीएफआरडीए ने इस मसले पर वित्त मंत्रालय से बातचीत शुरू कर दी है कि एनपीएस का चुनाव करने वालों को भी गारंटी वाली पेंशन मुहैया कराई जाए. इसके लिए एनपीएस कोष का वायदा बाजार में निवेश बढ़ाया जा सकता है.एनपीएस योजना में गारंटी वाली पेंशन पर विचार किया जा रहा है.
नई दिल्ली. सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था खत्म करने के बाद जब से नई पेंशन स्कीम यानी एनपीएस को लागू किया गया है, तभी से इसका विरोध हो रहा है. साल 2004 से शुरू हुई इस व्यवस्था में सरकारी कर्मचारियों को उनके अंशदान और बाजार के रिटर्न के आधार पर पेंशन मिलती है और इसमें राशि की कोई गारंटी नहीं होती. कर्मचारियों की इस चिंता और विरोध को देखते हुए पीएफआरडीए और वित्त मंत्रालय ने एनपीएस में भी गारंटी वाली पेंशन व्यवस्था लागू करने पर विचार शुरू किया है. इसका मकसद एनपीएस का चुनाव करने वाले कर्मचारियों को भी आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है.
सरकार ने एनपीएस का विरोध करने वाले कर्मचारियों के लिए यूनीफाइड पेंशन स्कीम यानी यूपीएस भी पेश किया था. इसमें रिटायरमेंट के बाद पेंशन की गारंटी दी गई थी, लेकिन बदले में अंशधारकों की ज्यादातर जमा राशि को पीएफआरडीए के कोष में डाल देने का प्रावधान बनाया था. यही वजह रही कि यूपीएस का चुनाव बहुत कम कर्मचारियों ने किया और वे ओपीएस यानी पुरानी पेंशन की मांग पर अड़े रहे. अब एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों को गारंटी वाली पेंशन का लाभ देने पर विचार किया जा रहा है.
क्या है पीएफआरडीए की तैयारीपेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने एनपीएस में बाजार के उतार-चढ़ाव के बजाय गारंटी वाली पेंशन मुहैया कराने के लिए वित्त मंत्रालय से बातचीत शुरू की है. इसके तहत एनपीएस का चुनाव करने वाले कर्मचारियों को बाजार के रिटर्न के आधार पर नहीं, बल्कि गारंटी वाली पेंशन देने का प्रावधान किया जाएगा. अभी एनपीएस एक अंशदान वाली व्यवस्था और इसमें पहले से पेंशन की कोई गारंटी नहीं होती है. इसे देखते हुए पीएफआरडीए न्यूनतम सुनिश्चित रिटर्न की योजना तैयार कर रहा है.
क्या हो सकता है बदलावपीएफआरडीए ने सितंबर, 2025 में भी इसी तरह का प्रस्ताव दिया था और इस पर विचार करने के लिए एक समिति भी बनाई थी. समिति का काम एनीपएस की लॉक इन अवधि, नियामकीय ढांचा, शुल्क, जोखिम प्रबंधन जैसे मुद्दों पर एक नियम बनाना था. पीएफआरडीए का मानना है कि गारंटी वाली पेंशन दिलाने के लिए एनपीएस के पैसों का प्रबंधन करने की जिम्मेदारी और बढ़ जाएगी. साथ ही इसके प्रबंधन की लागत भी बढ़ने का अनुमान है. इससे बचने के लिए एनपीएस को फ्यूचर और ऑप्शन जैसे जोखिम वाले विकल्पों में निवेश करना पड़ सकता है. अभी पेंशन कोष को कई शर्तों के साथ वायदा बाजार में निवेश करने की अनुमति मिलती है.
एक साल में 5 बड़े बदलाव
दिसंबर, 2025 में एनपीएस में 12 लाख से अधिक जमा होने पर एकमुश्त पैसे निकालने की सीमा 60 से बढ़ाकर 80 फीसदी कर दी गई है.
पेंशन कोष प्रबंधकों को इसका कुछ हिस्सा जिंसों यानी कमोडिटी में लगाने की भी अनुमति मिल गई है. साथ ही बैंकों के नए ढांचे को भी मंजूरी दी गई है.
जनवरी, 2026 में बैंकों को ऐसा ढांचा बनाने की मंजूरी दी गई, जो एनपीएस कोष का स्वतंत्र रूप से प्रबंधन करने के लिए पेंशन फंड बना सकें.
बच्चों के लिए शुरू की गई एनपीएस वात्सल्य योजना के तहत भी ढील गई और इसमें निकासी के साथ निवेश पर भी सरल नियम बनाए गए हैं.
जून, 2026 से ग्राहक सेवा केंद्रों के लिए नियमों को और सख्त बनाया गया, क्योंकि इन्हीं केंद्रों से लोग एनपीएस खाते खोलते हैं.
About the AuthorPramod Kumar Tiwari
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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New Delhi,Delhi
First Published :
September 08, 2026, 08:02 IST



