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मिट्टी के गणपति बनाकर महिलाओं ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश, गणेश उत्सव से पहले तैयार की 21 मूर्तियां

Last Updated:September 08, 2026, 19:27 IST

Rajsamand Ganesh Chaturthi: गणेश उत्सव से पहले राजसमंद में पर्यावरण संरक्षण को लेकर अनूठी पहल देखने को मिली. महिलाओं और युवतियों ने प्राकृतिक मिट्टी से 21 गणेश प्रतिमाएं तैयार कीं. इस पहल के जरिए आस्था के साथ प्रकृति की रक्षा का संदेश दिया गया. आयोजकों ने लोगों से POP की प्रतिमाओं के बजाय मिट्टी के गणपति अपनाने का आह्वान किया, ताकि गणेश उत्सव को पर्यावरण के अनुकूल और प्रकृति के करीब बनाया जा सके.

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मिट्टी के गणपति बनाकर महिलाओं-युवतियों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेशZoomगणेश उत्सव से पहले राजसमंद में अनूठी पहल

राजसमंद। राजसमंद जिले के केलवा कस्बे में गणेश उत्सव के पावन पर्व से ठीक पहले पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल देखने को मिली है. ‘स्वच्छ केलवा, हरित केलवा’ के तत्वावधान में स्थानीय नीलकंठ महादेव मंदिर और रामपोल दरवाजा परिसर में ‘आओ मिट्टी के गणपति बनाएं’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया. इस विशेष कार्यक्रम ने न केवल स्थानीय लोगों में धार्मिक उल्लास का संचार किया, बल्कि पर्यावरण बचाने का एक मजबूत संदेश भी समाज तक पहुंचाया.

कार्यक्रम के दौरान केलवा कस्बे की महिलाओं में गजब का उत्साह देखने को मिला. पारंपरिक उल्लास के साथ बड़ी संख्या में पहुंची महिलाओं ने अपने हुनर और कला का प्रदर्शन करते हुए अपने हाथों से शुद्ध प्राकृतिक मिट्टी के लगभग 21 मनमोहक गणेश विग्रह तैयार किए. बिना किसी केमिकल या सांचे के, पूरी श्रद्धा और तल्लीनता के साथ गढ़ी गई इन प्रतिमाओं में हर किसी की आस्था और कलात्मकता साफ झलक रही थी. इस रचनात्मक गतिविधि ने पूरे मंदिर परिसर के माहौल को पूरी तरह भक्तिमय और खुशनुमा बना दिया.

पीओपी और रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों पर चर्चाकार्यक्रम के संयोजक मीना रजक ने इस पहल के पीछे के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित लोगों को जागरूक किया. उन्होंने बताया कि बाजार में बिकने वाली प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) और जहरीले रासायनिक रंगों से बनी गणेश प्रतिमाएं जल स्रोतों और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं. विसर्जन के दौरान ऐसे तत्व पानी को दूषित करते हैं, जिससे जलीय जीवों और मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. इसके विपरीत, प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमाएं विसर्जन के बाद पूरी तरह पर्यावरण में घुल जाती हैं और जल को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचाती हैं.

‘आस्था के साथ प्रकृति की रक्षा’ का संदेशइस आयोजन का मुख्य ध्येय ‘आस्था के साथ प्रकृति की रक्षा’ करना था. आयोजकों ने बताया कि गणेश उत्सव हमारी संस्कृति का एक अहम हिस्सा है, लेकिन इसे प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना भी बहुत धूमधाम से मनाया जा सकता है. कार्यक्रम के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को यह समझाया गया कि पर्यावरण के प्रति हमारी भी कुछ नैतिक जिम्मेदारियां हैं, जिनका निर्वहन करके हम आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ और सुरक्षित धरती सौंप सकते हैं.

पर्यावरण-अनुकूल उत्सव मनाने का संकल्पकार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी प्रतिभागियों और उपस्थित नागरिकों ने एक सामूहिक संकल्प लिया. उन्होंने इस वर्ष पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल (इको-फ्रेंडली) गणेश उत्सव मनाने का दृढ़ निश्चय किया. साथ ही, आसपास के अन्य लोगों को भी रासायनिक मूर्तियों का त्याग कर मिट्टी के गणपति अपनाने के लिए प्रेरित करने का प्रण लिया. इस अनूठी पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है.

Location :

Rajsamand,Rajasthan

First Published :

September 08, 2026, 19:27 IST

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