5 सुपरस्टार्स जिन्होंने डायरेक्शन में भी आजमाया हाथ, 2 ने दी ब्लॉकबस्टर तो एक ने दी डिजास्टर, 1 की फिल्म हुई अमर

Last Updated:September 08, 2026, 19:19 IST
अभिनय और निर्देशन एक ही सिक्के के दो पहलू जैसे हैं. दोनों के लिए अलग तरह की रचनात्मक सोच और समझ की जरूरत होती है. अभिनेता जहां अपने किरदार को पर्दे पर जीवंत करने की जिम्मेदारी निभाता है, वहीं निर्देशक पूरी फिल्म की कहानी, माहौल और कलाकारों के प्रदर्शन को एक दिशा देता है. सिनेमा की दुनिया में कई ऐसे नाम हैं जिन्होंने पर्दे के सामने रहने के बाद पर्दे के पीछे से भी कमान संभाली.
नई दिल्ली. बॉलीवुड से लेकर साउथ तक इन कलाकारों ने पर्दे के सामने अपना दमखम दिखाने के बाद फिल्म निर्देशन की कमान भी संभाली. इन कलाकारों ने कैमरे के सामने अपनी काबिलियत साबित करने के साथ-साथ कैमरे के पीछे भी अपनी क्रिएटिव सोच और विजन का दम दिखाया.
सबसे पहले बात करते हैं रीजनल सिनेमा के उस सुपरस्टार की जिसने कन्नड़ फिल्मों को पूरे देश में पहचान दिलाई. आपने अंदाजा लगा लिया होगा कि हम ऋषभ शेट्टी की बात कर रहे हैं. ऋषभ शेट्टी उन कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी फिल्म के हर हिस्से से छाप छोड़ी है. कांतारा में उन्होंने सिर्फ लीड रोल नहीं निभाया, बल्कि फिल्म के निर्देशन की जिम्मेदारी भी अपने कंधों पर ली. फिल्म में कर्नाटक की लोक परंपराओं, मान्यताओं, प्रकृति और संस्कृति को कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया.
ऋषभ ने जिस तरह स्थानीय रंग और पौराणिक मान्यताओं को कहानी के साथ जोड़ा, उसने फिल्म को बाकी फिल्मों से बिल्कुल अलग बना दिया. फिल्म में उनका किरदार जितना दमदार था, उतना ही खास उनका निर्देशन भी रहा. खासकर फिल्म का क्लाइमैक्स और उससे जुड़ा भावनात्मक असर दर्शकों को लंबे समय तक याद रहा. कांतारा की सफलता ने यह साबित कर दिया कि अगर कहानी अपनी मिट्टी से जुड़ी हो और उसे ईमानदारी से पेश किया जाए, तो वह भाषा और रीजनल सीमाओं को पार कर सकती है.
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फरहान अख्तर ने साल 2001 में आई फिल्म ‘दिल चाहता है’ से बतौर निर्देशक डेब्यू किया था. जब फरहान ने ये फिल्म बनाई थी तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि यह फिल्म आने वाले सालों में दोस्ती की परिभाषा ही बदल देगी. फिल्म में आमिर खान, अक्षय खन्ना और सैफ अली खान की दोस्ती के जरिए युवाओं की जिंदगी, रिश्तों, प्यार और अपने करियर को लेकर होने वाली उलझनों को दिखाया गया. ‘दिल चाहता है’ हिंदी सिनेमा की कल्ट फिल्मों में शामिल हो चुकी है.
आमिर खान की ‘तारे ज़मीन पर’ सिर्फ बच्चों पर बनी फिल्म नहीं थी, बल्कि इसने पढ़ाई और बच्चों को समझने के तरीके पर भी एक जरूरी सवाल खड़ा किया. आमिर ने फिल्म में अभिनय करने के साथ-साथ निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाली. कहानी एक ऐसे बच्चे की थी, जिसे पढ़ाई में परेशानी होती है और जिसकी मुश्किल को समझने के बजाय लोग उसे कमजोर और लापरवाह मानने लगते हैं.
‘तारे जमीन पर’ आमिर खान के करियर की सबसे बेहतरीन फिल्मों में शामि है. इस फिल्म का निर्देशन आमिर खान और अमोल गुप्ता ने मिलकर किया था. फिल्म ने न सिर्फ छप्परफाड़ कमाई की थी. इसके साथ ही क्रिटिक्स ने भी इसे खूब सराहा था.
अजय देवगन भी अभिनय के साथ-साथ निर्देशन की कमान संभाल चुके हैं. हालांकि अजय देवगन के निर्देशन में बनी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई हैं. इन फिल्मों का आंकलन अगर कमाई के आंकड़ों से करेंगे तो भले ये सफल नहीं हैं, लेकिन इन सबकी कहानी बड़ी दमदार है. अजय देवगन ने साल 2008 में यू मी और हम से बतौर डायरेक्टर डेब्यू किया था. उसके बाद उन्होंने शिवाय, रनवे 34 और भोला की भी कमान संभाली.
कमल हासन का नाम भी भारतीय सिनेमा के उन कलाकारों में लिया जाता है, जिन्होंने हमेशा कुछ नया करने की कोशिश की है. ‘हे राम’ भी उनकी इसी सोच का एक उदाहरण है. इस फिल्म में कमल हासन ने अभिनय के साथ-साथ लेखन और निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाली. यानी फिल्म की कहानी से लेकर उसे पर्दे पर उतारने तक, वह इसके क्रिएटिव प्रोसेस के केंद्र में रहे.
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September 08, 2026, 19:19 IST



