मोबाइल है, सिग्नल नहीं… साबरसर में फोन करने के लिए छत और धोरों पर चढ़ रहे 700+ घरों के लोग

Last Updated:September 10, 2026, 08:59 IST
Jodhpur News: जोधपुर के शेरगढ़ उपखंड की साबरसर ग्राम पंचायत में 700 से ज्यादा घरों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या बताई जा रही है. करीब 7 हजार की आबादी वाले क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि जरूरी कॉल के लिए उन्हें छतों और ऊंचे धोरों पर जाना पड़ता है. कमजोर सिग्नल से ऑनलाइन पढ़ाई, ई-मित्र और सरकारी ऑनलाइन काम भी प्रभावित हो रहे हैं. ग्रामीणों ने क्षेत्र का सर्वे करवाकर टावर या अन्य तकनीकी व्यवस्था से नेटवर्क सुधारने की मांग की है.
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जोधपुर. मोबाइल फोन आज बातचीत से लेकर पढ़ाई, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं तक हर जरूरी काम का अहम हिस्सा बन चुका है. लेकिन शेरगढ़ उपखंड की साबरसर ग्राम पंचायत में ग्रामीणों को मोबाइल नेटवर्क के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत क्षेत्र के 700 से ज्यादा घरों में मोबाइल सिग्नल की सुविधा पर्याप्त नहीं है. कई बार जरूरी फोन करने या रिसीव करने के लिए लोगों को घर की छत, ऊंचे धोरों या नेटवर्क मिलने वाली दूसरी जगहों का सहारा लेना पड़ता है.
करीब 7 हजार की आबादी वाली साबरसर ग्राम पंचायत में कई राजस्व गांव और ढाणियां शामिल हैं. इनमें शिवपुरा, विश्वकर्मा नगर, नागाणा राय नगर, वीर तेजाजी नगर, जिलानी नगर, श्री खेतसिंह नगर, भैया नगर और गंगा सागर सहित अन्य क्षेत्र बताए गए हैं. ग्रामीणों के मुताबिक इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद पंचायत के कई हिस्सों में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा पर्याप्त नहीं है. लोगों का कहना है कि कुछ स्थानों पर घर के आंगन में खड़े होकर भी सिग्नल नहीं मिलता. ऐसे में जरूरी कॉल के लिए बाहर निकलना पड़ता है. कई ग्रामीणों को फोन पर बात करने के लिए छत या ऊंची जगह तलाशनी पड़ती है. नेटवर्क मिलने के बाद ही वे जरूरी बातचीत या ऑनलाइन काम पूरा कर पाते हैं.
जरूरी कॉल के लिए तलाशनी पड़ती है नेटवर्क वाली जगह
ग्रामीणों से जुड़े रामूराम ने बताया कि नेटवर्क की समस्या केवल फोन पर बातचीत तक सीमित नहीं है. कई बार जरूरी कॉल बीच में कट जाती है या सामने वाले की आवाज स्पष्ट सुनाई नहीं देती. इससे लोगों को दोबारा फोन करना पड़ता है और कई जरूरी कामों में देरी होती है. ग्रामीणों के अनुसार बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई भी प्रभावित होती है. मोबाइल इंटरनेट के जरिए पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को नेटवर्क मिलने वाली जगह तलाशनी पड़ती है. इसी तरह रोजमर्रा के ऑनलाइन कामों के लिए भी लोगों को पहले यह देखना पड़ता है कि फोन में सिग्नल आ रहा है या नहीं.
ई-मित्र और सरकारी ऑनलाइन काम भी प्रभावित
मोबाइल नेटवर्क की कमी का असर पंचायत मुख्यालय पर होने वाले ऑनलाइन कामों पर भी दिखाई देता है. ग्रामीणों के मुताबिक ई-मित्र सहित कई सेवाओं के संचालन में परेशानी आती है. सरकारी योजनाओं से जुड़े आवेदन, योजना संबंधी प्रक्रियाएं और राशन वितरण से जुड़े ऑनलाइन कामों में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि नेटवर्क कमजोर होने से कई बार ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती. इससे लोगों को अनावश्यक इंतजार करना पड़ता है. जिन कामों के लिए पहले से समय निकालकर पंचायत मुख्यालय या ई-मित्र केंद्र पहुंचते हैं, उनमें नेटवर्क की समस्या के कारण दोबारा आने की नौबत भी आ सकती है.
ग्रामीणों ने टावर लगाने की मांग की
ग्रामीणों का कहना है कि आज मोबाइल नेटवर्क केवल बातचीत का माध्यम नहीं रह गया है. सरकारी सेवाओं, बैंकिंग, शिक्षा और रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए इंटरनेट की जरूरत लगातार बढ़ रही है. ऐसे में पंचायत के बड़े हिस्से में नेटवर्क की समस्या लंबे समय से बनी रहना चिंता का विषय है. ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और मोबाइल कंपनियों से क्षेत्र का सर्वे करवाने की मांग की है. उनका कहना है कि जरूरत के अनुसार टावर या अन्य तकनीकी व्यवस्था के जरिए नेटवर्क सुविधा बेहतर की जानी चाहिए. इससे ग्रामीणों को हर जरूरी कॉल या ऑनलाइन काम के लिए छत और धोरों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
First Published :
September 10, 2026, 08:59 IST



