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Food Story: चंबल का पानी या मसालों का जादू? जानिए क्यों कोटा की मशहूर कचौरी के स्वाद की दुनिया दीवानी है

कोटा. राजस्थान के हाड़ौती अंचल में स्थित कोटा शहर अपनी अनूठी संस्कृति और खान-पान के लिए दुनियाभर में जाना जाता है. यहीं की प्रसिद्ध ‘कोटा कचौरी’ ने देश ही नहीं इसके साथ साथ ही विदेशों तक अपनी एक खास पहचान और जबरदस्त डिमांड बना रखी है. इस मशहूर जायके के इतिहास और इसकी खासियतों को खुद जोधपुर परिवार के संचालक कमल पाठक ने एक इंटरव्यू में साझा किया है. कोटा की कचौरी का स्वाद पूरी दुनिया में क्यों अलग माना जाता है, इस पर कमल पाठक ने बताया कि यहां चंबल के पानी की एक खास तासीर है, जो इस कचौरी के स्वाद को अनूठा बनाती है.

यह कचौरी शुद्ध मूंगफली के तेल में तैयार की जाती है. इसकी शुद्धता, मसालों का बेजोड़ जायका ही इसकी असली पहचान है. इस कचौरी की दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हर छोटे-बड़े फंक्शन, पिकनिक, शादी-ब्याह या सुबह के नाश्ते में इसे विशेष तौर पर शामिल किया जाता है. यहां तक कि घर पर कोई मेहमान आ जाए, तो उनका स्वागत भी सबसे पहले कोटा की कचौरी या जोधपुर की प्याज कचौरी से ही किया जाता है.

मसालों और हींग का खास मेल कचौरी को बनाता है खास

मसालों और हींग का खास मेल सामान्य कचौरियां तो देश के कई हिस्सों में बनती हैं, लेकिन कोटा की कचौरी में कुछ ऐसा खास है जो इसे बाकी जगहों से अलग करता है. इसमें इस्तेमाल होने वाली हींग पूरी तरह शुद्ध होनी चाहिए. इसके अलावा शुद्ध मसाले, विभिन्न प्रकार के गरम मसाले और काली मिर्च का मसाला ही इसे ऐसा जायका देता है जो देश के किसी भी कोने में चले जाएं, दोबारा कहीं और नहीं मिलेगा.

1965 कोटा ऐसे हुई थी शुरूआत

कोटा में इस जायकेदार सफर की शुरुआत स्व. कुंदन लाल जी पाठक जो मूल रूप से जोधपुर के रहने वाले थे ने वर्ष 1965 में ‘जोधपुर स्वीट्स’ के नाम से की थी. इसके अलावा, गुलाबचंद जी के दादाजी स्व. जगदीश जी ने जयपुर में ‘जगदीश होटल’ की नींव रखी थी, जहां 65 कमरों का होटल शुरू किया गया था. उसके बाद कोटा में आकर जोधपुर स्वीट्स के नाम से कारोबार शुरू किया था.

कोटा के अलावा जोधुपर में भी हो रहा है संचालन

उस समय कोटा उद्योग नगरी के नाम से जाना जाता था. समय के साथ यह दुकान आज एक बड़े शोरूम का रूप ले चुकी है. अब इस विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाया जा रहा है. जोधपुर स्वीट्स का संचालन दूसरी पीढ़ी के रूप में गुलाबचंद, अरुण और कमल द्वारा किया जा रहा है. वहीं, अब इसके बाद तीसरी पीढ़ी के साहिल, तनय और कार्तिक भी इस बिजनेस को पूरी जिम्मेदारी के साथ संभाल रहे हैं. अब कोटा के अलावा जोधपुर में इनकी शाखाएं संचालित हो रही हैं.

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