Trinetra Ganesh Mela | Ranthambore Trinetra Ganesh Mela 2026

Last Updated:September 12, 2026, 08:36 IST
Ranthambore Trinetra Ganesh Mela 2026: सवाई माधोपुर के प्रसिद्ध रणथंभौर दुर्ग में स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर का ऐतिहासिक लक्खी मेला 14 सितंबर को भरने जा रहा है. मेले में देशभर से लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं. मान्यताओं के अनुसार, यहां भगवान गणेश अपनी पत्नियों रिद्धि-सिद्धि और पुत्र शुभ-लाभ के साथ सपरिवार विराजमान हैं. प्राचीन कथाओं में राजा हम्मीर को स्वप्न में दर्शन देकर संकट हरने का चमत्कार भी इस मंदिर की अपार महिमा और आस्था को बढ़ाता है.
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एक दरबार, लाखों भक्त और सदियों पुरानी मान्यता… रणथंभौर में शुरू होगा त्रिनेत्र गणेश का लक्खी मेला
Ranthambore: सवाई माधोपुर के ऐतिहासिक रणथंभौर दुर्ग में स्थित विश्व प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर में एक बार फिर आस्था का लक्खी मेला 14 सितंबर को भरने जा रहा है. अरावली की सुरम्य पर्वतमालाओं और रणथंभौर नेशनल पार्क की हरियाली के बीच स्थित इस मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगा है. मेले को लेकर स्थानीय लोगों और देशभर से आने वाले भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है.
जिला मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर दूर रणथंभौर दुर्ग में विराजमान भगवान त्रिनेत्र गणेश लाखों लोगों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र हैं. वैसे तो यहां सालभर भक्तों की भारी कतार लगी रहती है, लेकिन गणेश मेले के दौरान आयोजित होने वाले इस लक्खी मेले का विशेष महत्व है. प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता के रूप में पूजे जाने वाले भगवान गणेश के दरबार में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु अपनी हाजिरी लगाने पहुंचते हैं. मेले से पहले ही मंदिर परिसर और दुर्ग के रास्तों पर पदयात्रियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नजर आने लगी है.
भगवान गणेश का शिव और कृष्ण से जुड़ा अनूठा रहस्यत्रिनेत्र गणेश मंदिर का इतिहास बहुत ही अनूठा और कई रहस्यों से भरा हुआ है. पौराणिक किंवदंतियों और मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव द्वारा जब गणेश जी का शीश काटा गया था, तो वह शीश इसी पवित्र स्थान पर आकर गिरा था. तब से यहां भगवान गणेश के शीश की विशेष पूजा अर्चना की जाने लगी. एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण के विवाह से नाराज होकर गणेश जी ने अपनी मूषक सेना के माध्यम से उनके रास्ते में भारी बाधाएं उत्पन्न कर दी थीं. इसके बाद भगवान कृष्ण ने रणथंभौर में ही भगवान गणेश का विवाह रिद्धि और सिद्धि के साथ करवाया था. इसी कारण यहां भगवान गणेश सपरिवार यानी अपनी पत्नियों रिद्धि-सिद्धि और पुत्रों शुभ-लाभ के साथ विराजमान माने जाते हैं.
राजा हम्मीर का स्वप्न और अन्न भंडार का चमत्कारइस प्राचीन मंदिर से जुड़ी राजा हम्मीर की कथा भी बहुत ही प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि साल 1299 में दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने रणथंभौर दुर्ग पर हमला कर दिया था. यह युद्ध काफी लंबा खिंच गया, जिससे किले के अंदर राशन और आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी हो गई. तब भगवान गणेश ने राजा हम्मीर को स्वप्न में दर्शन दिए और संकट जल्द दूर होने का आशीर्वाद दिया. अगले दिन चमत्कारिक रूप से किले के अन्न भंडार भरे हुए मिले और उसी स्थान पर भगवान गणेश की स्वयंभू प्रतिमा प्रकट हुई. कई ऐतिहासिक प्रमाणों में इस मंदिर का निर्माण 10वीं सदी के आसपास माना जाता है.
जिला प्रशासन की पुख्ता और सख्त तैयारियांलक्खी मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़, सुरक्षा और सुविधा के लिए सवाई माधोपुर जिला प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं. यातायात, पेयजल, साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए पुलिस और प्रशासन अलर्ट मोड पर काम कर रहा है. भक्त लंबी पैदल यात्राएं कर त्रिनेत्र गणेश के दरबार में पहुंच रहे हैं और अपनी मनोकामनाएं मांग रहे हैं. 14 सितंबर को ऐतिहासिक दुर्ग रणथंभौर की धरती एक बार फिर से भगवान त्रिनेत्र गणेश के जयकारों से गूंज उठेगी.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Sawai Madhopur,Sawai Madhopur,Rajasthan
First Published :
September 12, 2026, 08:36 IST



