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बाबा रामदेव मेले में 11 हजार लड्डुओं का भोग, पंजाब के लोहार समाज ने कराया कुश्ती दंगल

Last Updated:September 12, 2026, 10:00 IST

Jaisalmer: पश्चिमी राजस्थान के रामदेवरा में बाबा रामदेव का भादवा मेला जोरों पर है. मेले में प्रतिदिन चार लाख श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. गुजरात के अहमदाबाद से आए भक्तों ने देसी घी के 11 हजार मोतीचूर और ड्राई फ्रूट के लड्डू बनाए हैं, जिनका बाबा की समाधि पर भोग लगाकर पदयात्रियों में वितरण किया जाएगा. वहीं दूसरी ओर, पंजाब से आए 10 हजार लोगों के लोहार समाज ने युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए कुश्ती दंगल का आयोजन किया. यह मेला समाज में एकता, समानता और सेवा भाव की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है.

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बाबा रामदेव मेले में 11 हजार लड्डुओं का भोग, पंजाब के लोहार समाज का खास कुश्तीZoomबाबा रामदेव मेले में 11 हजार लड्डुओं का भोग, पंजाब के लोहार समाज का खास कुश्ती दंगल

Jaisalmer: पश्चिमी राजस्थान का महाकुंभ कहलाने वाला लोक देवता बाबा रामदेव का ऐतिहासिक भादवा मेला इन दिनों अपने पूरे शबाब पर चल रहा है. देश के कोने-कोने से प्रतिदिन लगभग चार लाख श्रद्धालु रामदेवरा पहुंच कर बाबा के दरबार में अपनी हाजिरी लगा रहे हैं. जैसलमेर जिले में स्थित रामदेवरा इन दिनों जयकारों से गूंज रहा है. इस विशाल मेले में आस्था, भक्ति और सेवा का एक अनूठा और अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है. बाबा रामदेव के दर्शनों के लिए पोकरण से लेकर रामदेवरा सड़क मार्ग पर लंबी दूरी तय करके आने वाले पदयात्रियों का भारी तांता लगा हुआ है. इन पैदल चलने वाले भक्तों की निस्वार्थ सेवा करने के लिए देशभर से कई संगठन दिन-रात जुटे हुए हैं. यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि यह सांप्रदायिक सौहार्द और विविधता में एकता की भी सबसे बड़ी मिसाल पेश कर रहा है.

बाबा के भक्तों की सेवा करने के विशेष उद्देश्य से गुजरात राज्य के अहमदाबाद शहर से करीब चार दर्जन से अधिक लोग रामदेवरा पहुंचे हैं. इन उत्साही सेवादारों ने पदयात्रियों की सेवा करने के लिए रामदेवरा-पोकरण सड़क मार्ग पर अपना एक विशाल पड़ाव डाल रखा है. यहां विशेष रूप से 11 हजार ड्राई फ्रूट और मोतीचूर के शुद्ध देसी घी वाले स्वादिष्ट लड्डुओं का निर्माण किया जा रहा है. पिछले तीन दिनों से गुजरात के एक दर्जन से अधिक कुशल कारीगर इन लड्डुओं को बनाने में अथक मेहनत कर रहे हैं. आयोजकों के अनुसार सबसे पहले इन 11 हजार लड्डुओं का भोग बाबा रामदेव की पवित्र समाधि पर चढ़ाया जाएगा. इसके पश्चात इन लड्डुओं को पैदल चलकर आने वाले हजारों भक्तों के बीच महाप्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा.

दस सालों से लगातार जारी है सेवा कार्यइस विशाल भंडारे और सेवा कार्य को लेकर गुजरात से आए सभी कार्यकर्ता सड़क मार्ग पर पूरी श्रद्धा और जी जान से मेहनत करते हुए दिखाई दे रहे हैं. सेवादारों ने बताया कि वे लोग पिछले 10 साल से भी अधिक समय से लगातार रामदेवरा आ रहे हैं. प्रतिवर्ष भादवा मेले में यहां आकर दूर-दूर से आने वाले थके-हारे भक्तों की सेवा करने का एक अलग ही आत्मिक आनंद मिलता है. इस बार उनके द्वारा 11 हजार लड्डुओं का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण करवा लिया गया है, जो वहां से गुजरने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का बहुत बड़ा केंद्र बना हुआ है. मार्ग पर अलग-अलग स्थानों पर लोग अपने-अपने तरीके से पदयात्रियों की मनुहार करते हुए उन्हें भोजन और पानी उपलब्ध करा रहे हैं.

पंजाब के लोहार समाज की नशामुक्ति की पहलमेले में केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि समाज सुधार का भी बहुत बड़ा संदेश दिया जा रहा है. पंजाब राज्य से आए लोहार समाज के लगभग 10 हजार लोगों ने रामदेवरा में खुले आसमान के नीचे अपना एक बड़ा डेरा डाला हुआ है. समाज के लोगों की तरफ से रामदेवरा मेले में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए एक बहुत ही नई और अच्छी पहल की गई है. समाज की युवा पीढ़ी को नशे की खतरनाक लत से दूर रखने के प्रमुख उद्देश्य से रामदेवरा में एक विशाल कुश्ती दंगल कार्यक्रम का शानदार आयोजन किया गया. इस अखाड़े के माध्यम से युवा पीढ़ी को यह सख्त नसीहत दी गई कि वे नशे से दूर रहें और उसकी जगह पौष्टिक आहार लेकर अपने शरीर को मजबूत बनाएं.

विविधता में एकता और समानता का प्रतीकलोहार समाज के कुश्ती कार्यक्रम में यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया कि परिवार और समाज में छोटे बच्चे जो कुछ भी देखते हैं, आने वाली पीढ़ी उसी बात पर अमल करती है. इसलिए बड़ों को एक अच्छा उदाहरण पेश करना चाहिए. रामदेवरा में आयोजित इस कुश्ती दंगल को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. कुल मिलाकर, बाबा रामदेव का यह मेला सही मायनों में विविधता में एकता की बेहतरीन मिसाल है. यहां अलग-अलग संस्कृति, वेशभूषा और भाषा के लोग आपस में असीम प्रेम से मिलते हैं. सभी श्रद्धालु ऊंच-नीच, अमीर-गरीब और जाति-पाति का सारा भेदभाव पूरी तरह से भुलाकर सिर्फ रामसापीर की समाधि के दर्शन कर रहे हैं. बाबा के दरबार में इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म माना जाता है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Jaisalmer,Jaisalmer,Rajasthan

First Published :

September 12, 2026, 10:00 IST

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