Ganesh Chaturthi: जयपुर के इस गणेश मंदिर में सिंदूर नहीं, दूध से होता है अभिषेक, सूर्य भी करते हैं चरण स्पर्श

Last Updated:September 12, 2026, 09:35 IST
Jaipur Shri Shwet Siddhi Vinayak Temple: जयपुर की ‘छोटी काशी’ में गणेश चतुर्थी पर प्राचीन गणेश मंदिरों की रौनक बढ़ गई है. सूरजपोल मंडी इलाके में स्थित श्रीश्वेत सिद्धिविनायक मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं के लिए खास पहचान रखता है. करीब 250 साल पुराने इस मंदिर में सफेद संगमरमर से बनी गणेशजी की प्रतिमा स्थापित है. मान्यता है कि सुबह सूर्य की पहली किरण सीधे गणपति के चरणों का स्पर्श करती है. मंदिर की सबसे खास परंपरा यहां गणेशजी का सिंदूर के बजाय दूध और दूब से अभिषेक करना है. मंदिर से जयपुर के राजघराने की आस्था भी जुड़ी हुई बताई जाती है. गणेश चतुर्थी पर विशेष पूजा और दुग्धाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.जयपुर की ‘छोटी काशी’ में गणेश चतुर्थी पर प्राचीन गणेश मंदिरों की रौनक बढ़ गई है.
जयपुर. गुलाबी नगरी के नाम से दुनियाभर में पहचान रखने वाला जयपुर अपनी ऐतिहासिक इमारतों और हवेलियों के साथ-साथ प्राचीन मंदिरों के लिए भी खास पहचान रखता है. मंदिरों की बहुतायत और धार्मिक आस्था के चलते जयपुर को ‘छोटी काशी’ भी कहा जाता है. गणेश चतुर्थी के मौके पर इन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. इसी कड़ी में जयपुर के सूरजपोल मंडी इलाके में स्थित श्रीश्वेत सिद्धिविनायक मंदिर इन दिनों खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
करीब 250 साल से भी ज्यादा पुराने इस मंदिर की कई ऐसी विशेषताएं हैं, जो इसे शहर के दूसरे गणेश मंदिरों से अलग पहचान देती हैं. सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर में विराजित गणपति की प्रतिमा पर सुबह सूर्य की पहली किरण पड़ती है. इसके अलावा यहां गणेशजी का अभिषेक सिंदूर से नहीं बल्कि दूध से करने की परंपरा है. गणेश चतुर्थी पर मंदिर में विशेष पूजा और दुग्धाभिषेक के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.
सफेद संगमरमर से बना है प्राचीन मंदिर
सूरजपोल मंडी के पास जयपुर के परकोटे में स्थित श्रीश्वेत सिद्धिविनायक मंदिर करीब ढाई सौ साल से अधिक पुराना बताया जाता है. सफेद संगमरमर से बने होने के कारण इसे श्रीश्वेत सिद्धिविनायक मंदिर के नाम से जाना जाता है. मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित भगवान गणेश की प्रतिमा और उससे जुड़ी सूर्य की किरणों की मान्यता है. सुबह सूर्य की पहली किरण सीधे गणपति की प्रतिमा के चरणों का स्पर्श करती है. श्रद्धालु इसे भगवान गणेश का विशेष आशीर्वाद मानते हैं.
सिंदूर नहीं, दूध से होता है गणपति का अभिषेक
आमतौर पर भगवान गणेश की पूजा में सिंदूर का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन श्रीश्वेत सिद्धिविनायक मंदिर में गणपति का अभिषेक दूध से किया जाता है. दूध और दूब से भगवान गणेश की पूजा यहां की प्रमुख परंपराओं में शामिल है. गणेश चतुर्थी के दिन इस परंपरा का विशेष महत्व रहता है. मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है.
जयपुर के राजघराने से जुड़ी है मान्यता
मंदिर की ऐतिहासिकता को जयपुर के राजघराने से भी जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि जयपुर के राजा सवाई रामसिंह भगवान गणेश के भक्त थे और किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत से पहले यहां आकर गणपति का दुग्धाभिषेक करते थे. मंदिर की स्थापना को लेकर अलग-अलग लोक मान्यताएं भी प्रचलित हैं, लेकिन गणेशजी के प्रति लोगों की आस्था पीढ़ियों से बनी हुई है.
सात बुधवार दर्शन की भी है परंपरा
मंदिर में श्रद्धालुओं की कई अलग-अलग मान्यताएं हैं. कई भक्त लगातार सात बुधवार तक यहां दर्शन करने की परंपरा निभाते हैं. मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ गणेशजी के दरबार में आने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही वजह है कि जयपुर के स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं. गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर की रौनक और बढ़ जाती है. विशेष पूजा, दूध से अभिषेक और गणपति के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं. मंदिर की प्राचीनता, सफेद संगमरमर की बनावट, सूर्य की पहली किरण का गणपति के चरणों तक पहुंचना और दूध से अभिषेक की परंपरा इसे जयपुर के प्रमुख गणेश मंदिरों में अलग पहचान देती है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Jaipur,Rajasthan
First Published :
September 12, 2026, 09:35 IST
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