मेवाड़ राजपरिवार को बड़ी क्षति, राजमाता विजयराज कुमारी के निधन से शोक

Last Updated:September 15, 2026, 14:09 IST
Rajmata Vijayraj Kumari Mewar: राजमाता विजयराज कुमारी का निधन मेवाड़ राजपरिवार के लिए केवल एक पारिवारिक क्षति नहीं, बल्कि उस व्यक्तित्व की विदाई है जिसने लंबे समय तक परंपरा और आधुनिक सोच के बीच संतुलन बनाते हुए अपनी जिम्मेदारियां निभाईं. उनके संस्कार, सेवा और सामाजिक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत बने रहेंगे.
उदयपुर के मेवाड़ राजपरिवार में एक बार फिर शोक की लहर है.श्रीजी लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की माता और राजमाता साहिबा श्रीमती विजयराज कुमारी मेवाड़ का निधन हो गया. उनके निधन से मेवाड़ राजपरिवार के साथ ही उन लोगों में भी शोक की भावना है, जो लंबे समय से उनके सामाजिक, शैक्षिक और परोपकारी कार्यों से जुड़े रहे. राजमाता विजयराज कुमारी का जीवन केवल राजपरिवार की गरिमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने सेवा, शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई.
राजमाता विजयराज कुमारी का संबंध कच्छ के शाही परिवार से था.वे महाराज फतेहसिंह जी कच्छ की कनिष्ठ सुपुत्री और कच्छ के महाराव साहब की पौत्री थीं. उनकी प्रारंभिक शिक्षा ऊटी के फ्रांसिस्कन कॉन्वेंट में हुई. बचपन से ही अनुशासन और शिक्षा को महत्व देने वाली राजमाता को आगे चलकर यूरोप और अमेरिका की यात्रा का अवसर मिला. 1960 के दशक में की गई इन यात्राओं के दौरान उन्होंने वहां हो रहे सामाजिक और आर्थिक बदलावों को करीब से देखा.
महाराणा अरविन्द सिंह मेवाड़ से विवाह के बाद वे उदयपुर आईं और मेवाड़ की परंपराओं तथा जिम्मेदारियों का हिस्सा बनीं.राजमहल से संचालित विभिन्न परोपकारी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे कई सार्वजनिक और निजी धर्मार्थ ट्रस्टों से जुड़ी रहीं.इनमें श्री एकलिंगजी ट्रस्ट प्रमुख रहा, जो मेवाड़ के प्राचीन मंदिरों के संरक्षण और विकास से जुड़ा है.
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शिक्षा के क्षेत्र में भी राजमाता विजयराज कुमारी का योगदान महत्वपूर्ण रहा.1980 के दशक में महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल के विकास में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके मार्गदर्शन में विद्यालय ने शिक्षा के क्षेत्र में पेशेवर दृष्टिकोण और उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया. उनके लिए शिक्षा केवल पढ़ाई तक सीमित विषय नहीं थी, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों को बेहतर दिशा देने का माध्यम थी.
राजमाता की पहचान आध्यात्मिक क्षेत्र से भी गहराई से जुड़ी रही.वे बिहार स्कूल ऑफ योग की समर्पित अनुयायी थीं और संस्थान तथा उसके विद्वान गुरुओं की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार में योगदान देती रहीं. इसके साथ ही वे हिस्टोरिकल रिसॉर्ट्स होटल्स प्राइवेट लिमिटेड की संयुक्त प्रबंध निदेशक के रूप में भी जिम्मेदारी निभाती रहीं.
परिवार की बात करें तो राजमाता विजयराज कुमारी ने अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कार, आध्यात्मिक सोच और परिवार की परंपराओं से जोड़े रखा. यही विरासत आज श्रीजी लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के व्यक्तित्व में भी दिखाई देती है. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ सामाजिक सरोकारों, शिक्षा, संस्कृति और मेवाड़ की विरासत को आगे बढ़ाने से जुड़े विभिन्न कार्यों में सक्रिय रहे हैं.
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September 15, 2026, 14:09 IST



