खुदाई के दौरान सुनाई दी रहस्यमयी आवाज, जमीन से निकली बालाजी की प्रतिमा, लोग बोले- ये चमत्कार है

Last Updated:September 15, 2026, 14:58 IST
Sikar Balaji Ki Pratima: सीकर समाचार, सीकर बालाजी मंदिर, बालाजी प्रतिमा सीकर, बालाजी की प्रतिमा, सीकर वायरल समाचारसीकर में खुदाई के दौरान बालाजी की प्रतिमा मिलने की घटना चर्चा का विषय बन गई है. स्थानीय लोगों के अनुसार, खुदाई के दौरान आवाज सुनाई दी कि मुझे बाहर निकालो. इसके बाद खुदाई करने पर बालाजी की प्रतिमा सामने आई. इस घटना के बाद श्रद्धालुओं में आस्था और उत्सुकता बढ़ गई. प्रतिमा मिलने की घटना को लोग धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं और इसी के बाद इसे बोलता बालाजी नाम दिया गया.
Sikar News: सीकर शहर के बड़ा तालाब स्थित बोलता बालाजी मंदिर की कहानी जितनी पुरानी है, उतनी ही रोचक भी है. करीब 100 साल से यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. मंदिर के पुजारी पं. सुनील तिवाड़ी बताते हैं कि इस मंदिर की पहचान एक ऐसी घटना से जुड़ी है, जिसे आज भी भक्त चमत्कार के रूप में याद करते हैं. मान्यता है कि तालाब की खुदाई के दौरान जमीन के अंदर से आवाज सुनाई दी थी- मुझे बाहर निकालो.
पं. सुनील तिवाड़ी के अनुसार करीब एक सदी पहले बड़ा तालाब क्षेत्र में खुदाई का काम चल रहा था. इसी दौरान उनके परदादा बिलास तिवाड़ी को अचानक किसी के बोलने जैसी आवाज सुनाई दी. आवाज इतनी स्पष्ट थी कि उन्हें लगा जैसे जमीन के नीचे कोई उन्हें बाहर निकालने के लिए कह रहा हो. घटना के बाद उन्होंने तत्कालीन राजा को इसकी जानकारी दी. इसके बाद राजा के निर्देश पर उस स्थान पर खुदाई करवाई गई.
कहानी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब खुदाई के दौरान वहां से बालाजी महाराज की प्रतिमा निकली. प्रतिमा मिलने के बाद इसे उसी स्थान पर स्थापित किया गया और पूजा-अर्चना शुरू हुई. चूंकि प्रतिमा मिलने से पहले आवाज सुनाई देने की मान्यता थी, इसलिए धीरे-धीरे यह स्थान बोलता बालाजी के नाम से प्रसिद्ध हो गया. आज भी मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इस घटना को मंदिर के इतिहास का सबसे खास अध्याय मानते हैं.
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इस मंदिर की एक और खास बात यह है कि इसकी सेवा-पूजा एक ही परिवार की कई पीढ़ियों से चली आ रही है. पुजारी पं. सुनील तिवाड़ी बताते हैं कि उनके परदादा बिलास तिवाड़ी के बाद सीताराम तिवाड़ी ने मंदिर की सेवा संभाली. इसके बाद राजकुमार तिवाड़ी ने पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी निभाई और अब वे स्वयं नियमित रूप से मंदिर की पूजा और व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं. यानी करीब एक सदी से परिवार की चार पीढ़ियां बालाजी सेवा से जुड़ी हैं.
मंदिर में रोजाना सुबह 9 बजे और शाम 7 बजे आरती होती है. दोनों समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और सामान्य दिनों में करीब 40 से 50 भक्त आरती में शामिल होते हैं. मंगलवार और शनिवार को शाम 4 बजे महिला मंडल की ओर से भजन-कीर्तन किया जाता है. मंदिर के संचालन के लिए फिलहाल कोई औपचारिक समिति नहीं है, लेकिन भक्त मंडल के करीब 150 सदस्य सेवा और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं.
पूर्णिमा के दिन मंदिर में बालाजी महाराज को रोट का भोग लगाया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. इस दिन भी श्रद्धालुओं की विशेष आस्था देखने को मिलती है. मंदिर से जुड़ा सबसे बड़ा आयोजन हनुमान जयंती के आठ दिन बाद शुरू होने वाला स्थापना महोत्सव है. यह आयोजन लगातार दस दिन चलता है. इस दौरान मंदिर में धार्मिक कार्यक्रम होते हैं और बड़ी संख्या में शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
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September 15, 2026, 14:58 IST



