Ajmer Famous Spot | where to visit in ajmer

Last Updated:September 15, 2026, 18:43 IST
Best places to visit in Ajmer : अजमेर की सोनी जी की नसियां में 2-3 हजार साल पुरानी मूर्तियां प्रदर्शित हैं. कुछ मूर्तियां अढ़ाई दिन के झोपड़े से लाई गई थीं. यहां की कलात्मकता और भव्यता देखते ही बनती है. करीब दो वर्ष पहले यहां मौजूद सर्वेंट क्वार्टर्स को हटाकर एक विशेष हॉल तैयार किया गया, जहां अब इन प्राचीन कलाकृतियों और मूर्तियों को व्यवस्थित तरीके से प्रदर्शित किया गया है.
ख़बरें फटाफट
अजमेर. अजमेर की ऐतिहासिक धरती पर यूं तो कई ऐसी धरोहरें हैं, जो अपने भीतर सदियों का इतिहास समेटे हुए हैं, लेकिन सोनी जी की नसियां की बात ही कुछ अलग है. यहां पहुंचते ही इसकी कलात्मकता, भव्यता और बारीक कारीगरी अपनी ओर ध्यान खींच लेती है. कहा जाता है कि यह ऐसी अनमोल धरोहर है, जिसकी कलात्मकता और भव्यता दुनिया में हर जगह देखने को नहीं मिलती. अगर आप कभी अजमेर आएं तो सोनी जी की नसियां को देखना आपकी यात्रा को एक अलग अनुभव दे सकता है.
सोनी जी की नसियां से जुड़े सदस्य भूपेंद्र ने बताया कि यहां कई मूर्तियां ऐसी हैं, जिन्हें करीब सवा सौ साल पहले अजमेर के अढ़ाई दिन के झोपड़े से यहां लाया गया था. उस समय इन ऐतिहासिक प्रतिमाओं को सुरक्षित रखने और प्रदर्शित करने के लिए उचित स्थान उपलब्ध नहीं था. लंबे समय तक इन्हें संभालकर रखा गया और करीब दो वर्ष पहले यहां मौजूद सर्वेंट क्वार्टर्स को हटाकर एक विशेष हॉल तैयार किया गया, जहां अब इन प्राचीन कलाकृतियों और मूर्तियों को व्यवस्थित तरीके से प्रदर्शित किया गया है.
पत्थर में दिखाई देती है कारीगरों की कलानसिया की देखरेख से जुड़े सदस्य ने आगे बताया कि सोनी जी की नसियां में प्रदर्शित मूर्तियां 2 हजार से 3 हजार वर्ष पुरानी हैं. इनकी बारीक नक्काशी और कलात्मकता देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस दौर के कलाकार और कारीगर कितने निपुण रहे होंगे. बिना आधुनिक मशीनों और तकनीक के उस समय पत्थर पर इतनी बारीकी से काम करना अपने आप में अद्भुत है. यही वजह है कि यहां आने वाले लोग इन कलाकृतियों को देखकर उस दौर की कला और शिल्पकला को करीब से महसूस कर पाते हैं.
आज भी महसूस होती है खास अनुभूतिसोनी जी की नसियां से जुड़े लोगों का कहना है कि इन प्रतिमाओं की सिर्फ ऐतिहासिक और कलात्मक अहमियत ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक महत्व भी है. उनका कहना है कि उस समय संतों द्वारा विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई थी और इसी कारण इन प्रतिमाओं में आज भी एक विशेष ऊर्जा मौजूद होने की अनुभूति होती है. प्रतिमाओं की जांच आधुनिक तकनीक से किए जाने के बाद भी उनमें ऊर्जा होने की बात कही जाती है.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Ajmer,Ajmer,Rajasthan
First Published :
September 15, 2026, 18:43 IST



