Success Story | Sikar News | Who Is Suresh Verma

Success Story Of Sikar Dr Suresh Verma. पढ़ाई में लगातार मेहनत का नतीजा क्या होता है, इसकी एक मिसाल सीकर जिले के रूपपुरा गांव निवासी डॉ. सुरेश कुमार वर्मा और उनकी बेटी प्रियांशी वर्मा ने पेश की है. पिता ने केमिस्ट्री में एनटीए की ओर से आयोजित नेट परीक्षा में 100 परसेंटाइल अंक हासिल कर देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है. वहीं, इसी साल 12वीं की परीक्षा देने वाली उनकी बेटी प्रियांशी वर्मा ने भी केमिस्ट्री विषय में 100 फीसदी अंक हासिल किए हैं. एक ही घर में पिता और बेटी की यह उपलब्धि अब चर्चा में है.
डॉ. सुरेश कुमार वर्मा इस समय राजकीय कन्या महाविद्यालय, चौमूं, जयपुर में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं. जून 2026 में एनटीए की ओर से आयोजित नेट परीक्षा का विज्ञान विषयों का परिणाम जारी होने के बाद उनकी यह उपलब्धि सामने आई. केमिस्ट्री में उन्होंने 100 परसेंटाइल हासिल किए और देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया.
51 बार नेट परीक्षा पास करने का दावा
डॉ. वर्मा के अनुसार, वर्ष 1999 से 2026 तक वे कुल 51 बार नेट परीक्षा पास कर चुके हैं.
इनमें 18 बार उन्होंने ऑल इंडिया स्तर पर पहला स्थान हासिल किया.
वर्ष 2025 तक वे 48 बार सीएसआईआर नेट क्वालिफाई कर चुके थे.
2025 तक उनके नाम 15 बार ऑल इंडिया प्रथम, 2 बार द्वितीय और 4 बार तृतीय स्थान हासिल करने का उल्लेख था.
फरवरी 2025 की नेट परीक्षा में भी उन्होंने सफलता हासिल की थी.
2026 की परीक्षा में सफलता के बाद उनकी कुल नेट सफलताओं का आंकड़ा 51 और प्रथम स्थान की संख्या 18 बताई गई है.
लगातार उपलब्धियों के चलते उनका नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज होने की बात कही गई है.
गेट में भी कई बार हासिल की सफलतानेट के अलावा डॉ. सुरेश वर्मा ने गेट परीक्षा में भी लगातार सफलता हासिल की है. दी गई जानकारी के अनुसार वे गेट परीक्षा 25 बार पास कर चुके हैं. इनमें तीन बार उन्होंने ऑल इंडिया में पहला स्थान हासिल किया. इससे पहले उपलब्ध विवरण में गेट में 18 बार क्वालिफाई करने का उल्लेख था. 2026 तक के अपडेटेड आंकड़े में यह संख्या 25 बताई गई है.
बेटी ने 12वीं में लहराया परचमपिता की इस उपलब्धि के बीच बेटी प्रियांशी की सफलता भी खास है. प्रियांशी वर्मा ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित 12वीं की परीक्षा में केमिस्ट्री विषय में 100 फीसदी अंक हासिल किए हैं. यानी जिस विषय में पिता लंबे समय से पढ़ाई और परीक्षा के जरिए अपनी पहचान बना रहे हैं, उसी विषय में बेटी ने भी पूरे अंक हासिल किए हैं.
पिता के निधन के बाद सात भाई-बहनों की पढ़ाई की जिम्मेदारीडॉ. वर्मा की कहानी सिर्फ परीक्षा में नंबर लाने तक सीमित नहीं है. उनके जीवन में संघर्ष भी रहा है. उनके पिता प्रभुदयाल वर्मा का निधन उस समय हो गया था, जब वे एमएससी की पढ़ाई कर रहे थे. इसके बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी. इसके साथ ही परिवार के सात छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी संभाली. पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका चयन डीआरडीओ में वैज्ञानिक के पद पर भी हुआ था. इसके अलावा आरएएस अधीनस्थ सेवा में भी उनका चयन हुआ. इसके बावजूद उन्होंने शिक्षण को अपने करियर के रूप में चुना. उनका कहना है कि शिक्षक के तौर पर वे देश की आने वाली पीढ़ी को अच्छी शिक्षा देने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं.
युवाओं से शॉर्टकट छोड़ मेहनत करने की अपीललगातार नेट परीक्षा देने और इसमें सफलता हासिल करने के पीछे डॉ. वर्मा का उद्देश्य सिर्फ अपना रिकॉर्ड बनाना नहीं है. वे युवाओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि पढ़ाई में शॉर्टकट के बजाय सही दिशा में मेहनत करनी चाहिए. उनका मानना है कि शिक्षा और शिक्षक दोनों के लिए लगातार मेहनत जरूरी है और पढ़ाई को कभी बीच में नहीं छोड़ना चाहिए. डॉ. वर्मा युवाओं को यह भी कहते हैं कि समय-समय पर अपना मूल्यांकन करते रहना चाहिए. खासकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति और एआई के दौर में यह देखना जरूरी है कि वे खुद को बदलते समय के साथ कहां खड़ा पाते हैं.
सीकर से बड़ी संख्या में सरकारी शिक्षक और सहायक प्रोफेसर
डॉ. वर्मा के अनुसार राजस्थान के सरकारी कॉलेजों और सरकारी विद्यालयों में सीकर जिले से बड़ी संख्या में सरकारी सहायक प्रोफेसर और स्कूल प्राध्यापक हैं. उनका मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में सीकर के युवाओं की मौजूदगी और मेहनत लगातार दिखाई देती है. रूपपुरा गांव से निकलकर रसायन विज्ञान में देशभर में बार-बार शीर्ष स्थान हासिल करने तक डॉ. सुरेश वर्मा का सफर संघर्ष, पढ़ाई और लगातार मेहनत से जुड़ा रहा है. अब इसी कहानी में उनकी बेटी प्रियांशी की उपलब्धि भी जुड़ गई है. पिता ने नेट में केमिस्ट्री में 100 परसेंटाइल हासिल किए तो बेटी ने 12वीं में इसी विषय में 100 फीसदी अंक हासिल किए. दोनों की उपलब्धियां एक ही विषय में होने के कारण परिवार के लिए यह सफलता और भी खास बन गई है.



