Agriculture Tips: सितंबर में सरसों की इन किस्मों की करें बुवाई, मिलेगी बंपर उपज, बस इन बाताें का रखें ख्याल

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सितंबर में सरसों की इन किस्मों की करें बुवाई, कम लागत में मिलेगी बंपर उपज
Last Updated:September 17, 2026, 08:04 IST
Improved Mustard Variety: राजस्थान में सरसों रबी मौसम की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है. सरसों की खेती अलग-अलग तरह की मिट्टी, सिंचाई सुविधा और मौसम की परिस्थितियों में की जाती है. ऐसे में हर किसान के लिए एक ही किस्म उपयुक्त नहीं हो सकती. सिरोही के कृषि अधिकारी नरपत सिंह के अनुसार किसान को बुवाई का समय, खेत में नमी, सिंचाई सुविधा और स्थानीय जलवायु को ध्यान में रखकर बीज की किस्म का चयन करना चाहिए.किसान पूसा बोल्ड के अलावा आरएच-749, गिरिराज और आरएच-30 जैसे किस्मों का चयन कर सकते हैं. केवल किस्म के नाम के आधार पर उपज का अनुमान लगाने के बजाय खेत की स्थिति और कृषि प्रबंधन को ध्यान में रखना चाहिए.
राजस्थान में सरसों रबी मौसम की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल है. प्रदेश में सरसों की खेती अलग-अलग तरह की मिट्टी, सिंचाई सुविधा और मौसम की परिस्थितियों में की जाती है. ऐसे में हर किसान के लिए एक ही किस्म उपयुक्त नहीं हो सकती. किसान के लिए अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी समेत अन्य परिस्थितियों के हिसाब से सही बीज का चयन कर खेती कर सकते हैं. सिरोही के कृषि अधिकारी नरपत सिंह ने बताया कि सरसों की खेती जिले में काफी किसान करते हैं. सामने सही किस्म का चयन सबसे जरुरी है. किस्म का चुनाव बुवाई के समय, खेत में नमी, सिंचाई की सुविधा और स्थानीय जलवायु को देखते हुए करना चाहिए. समय पर बुवाई वाली सिंचित फसल के लिए अलग किस्में बेहतर रहती हैं, वहीं वर्षा आधारित या सीमित सिंचाई वाले खेतों के लिए अलग किस्मों को किसान चुनते हैं.
कृषि अधिकारी ने बताया कि समय पर बुवाई वाली सिंचित फसल के लिए अलग किस्में बेहतर रहती हैं, वहीं वर्षा आधारित या सीमित सिंचाई वाले खेतों के लिए अलग किस्मों को किसान चुनते हैं. प्रदेश में काफी समय से किसानों के बीच पूसा बोल्ड का उपयोग काफी हो रहा है. यह मोटे दाने वाली सरसों की फेमस किस्म है और समय पर बोई जाने वाली सिंचित इलाकों में इसका उपयोग किया जाता है. पूसा बोल्ड को उत्तरी राजस्थान समेत उत्तर-पश्चिमी जिलों में समय पर बुवाई वाली सिंचित परिस्थितियों के लिए लिस्टेड किया गया है. इस किस्म की उपज क्षमता खेत की स्थिति, मौसम और कृषि प्रबंधन के अनुसार बदल सकती है. इसलिए केवल किस्म का नाम देखकर उपज का अनुमान लगाने की जगह कृषि कार्यालय से सलाह लेना चाहिए.
सरसों की आरएच-749 भी राजस्थान में उपयोग होने वाली प्रमुख किस्मों में शामिल है. इसे समय पर बोई गई सिंचित सरसों के लिए काम मने लेने की सलाह दी जाती है. इस किस्म में बड़े दाने, लंबी फलियां और अच्छी उपज क्षमता दर्ज की गई थी. वहीं सरसों की आरएच-725 को राजस्थान में सरसों की अच्छी किस्मों में शामिल किया गया है और इसे अलग-अलग उत्पादन परिस्थितियों में उपयोग किया जाता है. बारिश पर निर्भर खेती या सीमित सिंचाई वाले खेतों में किसान को जिले की लेटेस्ट एग्रिकल्चर सलाह के आधार पर किस्म को चुनना चाहिए.
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गिरिराज यानी डीआरएमआरआईजे-31 भी एक महत्वपूर्ण उन्नत किस्म है, इसे आईसीएआर, भरतपुर से जुड़ी उन्नत किस्म के रूप में विकसित किया गया है. इस किस्म को राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में समय पर बोई जाने वाली फसल के लिए सलाह दी जाती है. इसके बीज बड़े आकार के होते हैं और इसमें अच्छी उपज तथा तेल की मात्रा प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं.
वहीं सरसों की आरएच-30 किस्म राजस्थान में उपयोग की जाने वाली प्रमुख किस्म है. कृषि सलाह में इसे समय पर बोई जाने वाली किस्म में शामिल किया है. इसके अलावा प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अब कई नई और उन्नत किस्में भी उपलब्ध हैं. किसान केवल पारंपरिक किस्म पर निर्भर रहने के बजाय अपने क्षेत्र में हाल के वर्षों में सफल किस्मों की जानकारी भी ले सकते हैं.
First Published :
September 17, 2026, 08:04 IST



