Vastaneshwar Mahadev Temple | Unique Shiva Temple in Sirohi

Last Updated:September 17, 2026, 08:26 IST
Vastaneshwar Mahadev Temple In Sirohi: सिरोही के ईसरा गांव में अरावली की पहाड़ियों के बीच वास्तानेश्वर महादेव का अनोखा शिव मंदिर स्थित है. इस मंदिर में भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु मेहमान के रूप में विराजमान हैं. मान्यता है कि 33 करोड़ देवी-देवताओं ने आबू स्थापना के समय यहां विश्राम किया था. सबसे पहले भगवान विष्णु की पूजा होती है, फिर शिव जी की. यहीं से प्रसिद्ध आबू परिक्रमा शुरू होती है. यहां सावन, हरियाली अमावस्या और शिवरात्रि पर मेला लगता है. पास ही संत मुनिजी महाराज का मंदिर, प्राचीन कुंड और प्राकृतिक झरना भी है.
ख़बरें फटाफट
Sirohi: राजस्थान के सिरोही जिले में अरावली की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच एक ऐसा अद्भुत शिव मंदिर स्थित है, जो अपने आप में बिल्कुल अनूठा है. आबूराज की तलहटी में बसे पिंडवाड़ा तहसील के ईसरा गांव में मौजूद इस मंदिर को वास्तान जी या वास्तानेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक शिव मंदिर है, लेकिन यहां भगवान विष्णु मेहमान के रूप में विराजमान हैं. यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है, बल्कि इसका ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व भी बहुत अधिक है.
वास्तान जी मंदिर में भगवान शिव और भगवान विष्णु एक साथ विराजमान हैं, जिसे हरि और हर का अद्भुत संगम कहा जाता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में भगवान विष्णु ने इस स्थान पर मेहमान के रूप में विश्राम किया था. यही कारण है कि आज भी इस शिव मंदिर में सबसे पहले प्रथम पूजनीय के रूप में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की जाती है और उसके ठीक बाद भगवान शिव की आराधना होती है. पहाड़ी पर कुछ सीढ़ियां चढ़ने के बाद एक प्राकृतिक गुफा में मुख्य गर्भ गृह स्थित है. इस गुफा में सामने की तरफ भगवान शिव और उनका पवित्र शिवलिंग स्थापित है, वहीं दाईं ओर भगवान विष्णु की काले रंग की आकर्षक प्रतिमा विराजमान है. गर्भ गृह की गुफा के बाहर भी कई प्राचीन मूर्तियों और शिवलिंगों की पूजा होती है.
आबू का प्राचीन द्वार और परिक्रमा का आरंभऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टिकोण से वास्तान जी मंदिर को आबू का पुराना द्वार माना जाता है. हर साल होने वाली प्रसिद्ध आबू परिक्रमा की शुरुआत भी इसी पवित्र स्थान से होती है. इस परिक्रमा में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं. मान्यता है कि जब ब्रह्म खाई पर आबू की स्थापना हुई थी, तब 33 कोटि देवी-देवताओं ने आबू की यात्रा की थी. इस यात्रा के दौरान सभी देवी-देवताओं ने इसी स्थान पर रात्रि विश्राम किया था. देवताओं के यहां ‘वास’ (निवास) करने के कारण ही इस स्थान का नाम वास्तान जी पड़ गया.
तपस्वी संत मुनिजी महाराज की तपोभूमियह पवित्र स्थल केवल देवताओं के वास के लिए ही नहीं, बल्कि महान तपस्वियों की साधना स्थली के रूप में भी प्रसिद्ध रहा है. आबू के प्रसिद्ध तपस्वी संत मुनि जी महाराज ने इसी स्थान पर कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी. प्राचीन समय में लोग उन्हें भक्त मौनी महाराज के नाम से पहचानते थे, क्योंकि वे हमेशा मौन धारण करके अपनी तपस्या में लीन रहते थे. आज भी मंदिर परिसर में मुनिजी महाराज का एक भव्य मंदिर बना हुआ है. यहां दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. हर साल यहां मुनिजी महाराज की याद में एक विशाल मेले का आयोजन भी किया जाता है.
प्राकृतिक सौंदर्य और मेलो का आयोजनमंदिर में दर्शन करने आने वाले स्थानीय भक्तों का कहना है कि लोगों की वास्तान जी के प्रति अगाध आस्था है. सावन के पवित्र महीने, खास तौर पर हरियाली अमावस्या और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है. इस दौरान सिरोही और आस-पास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में भक्त भगवान शिव और विष्णु के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. अरावली की वादियों में स्थित होने के कारण यहां का प्राकृतिक सौंदर्य भी देखते ही बनता है. मंदिर के पास ही एक प्राचीन कुंड है और मानसून के दौरान यहां एक बेहद सुंदर झरना भी बहता है, जो श्रद्धालुओं के मन को मोह लेता है. अरावली पर्वतमाला की हरियाली और यहां का शांत वातावरण इस शिव मंदिर को एक बेहतरीन आध्यात्मिक स्थल बनाता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
और पढ़ेंLocation :
Sirohi,Sirohi,Rajasthan
First Published :
September 17, 2026, 08:26 IST



