जयपुर में बनेगा पहला वर्टिकल ई-बस डिपो, 10 हजार वर्गमीटर जमीन में खड़ी होंगी इलेक्ट्रिक बसें

Last Updated:September 17, 2026, 09:54 IST
Rajasthan Infrastructure Development: राजस्थान में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए लगातार प्रयास जारी है. इसी कड़ी में पचार में 10,000 वर्गमीटर जमीन पर बहुमंजिला ई-बस डिपो बनाया जाएगा. जमीन आवंटन को अंतिम स्वीकृति मिल चुकी है और इसका स्वामित्व जेडीए के पास रहेगा. वर्टिकल डिजाइन के जरिए कम जमीन में बस पार्किंग, चार्जिंग स्टेशन और मेंटेनेंस यार्ड जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. नए डिपो से कालवाड़ रोड और आसपास के ग्रामीण इलाकों की सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी मजबूत होने की संभावना है. जोबनेर, माचवा, हाथोज, धानक्या समेत आसपास के क्षेत्रों को इसका लाभ मिल सकता है. पीएम ई-बस सेवा के तहत जयपुर के लिए 450 इलेक्ट्रिक बसें निर्धारित हैं. ऐसे में पचार डिपो को शहर में ई-बस संचालन बढ़ाने के लिए अहम इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर विकसित किया जाएगा.
राजस्थान में इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार मजबूत किया जा रहा है. इसी कड़ी में जयपुर में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को विस्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2025-26 के तहत जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड के लिए कालवाड़ के राजस्व ग्राम पचार में ई-बस डिपो बनाया जाएगा. खसरा नंबर 1455 की कुल 10,000 वर्गमीटर भूमि डिपो के लिए आरक्षित की गई है. इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति मिल चुकी है. खास बात यह है कि डिपो को सामान्य तरीके से बनाने के बजाय बहुमंजिला यानी वर्टिकल स्वरूप में विकसित करने की योजना है.
जेसीटीएसएल ने ई-बस डिपो के निर्माण के लिए शुरुआत में 20,000 वर्गमीटर जमीन की मांग की थी. इसमें इलेक्ट्रिक बसों की पार्किंग, संचालन, रखरखाव और चार्जिंग स्टेशन जैसी सुविधाएं विकसित की जानी थी. इसके बाद जोन स्तर पर 12,300 वर्गमीटर भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया. समिति की बैठक में जमीन के बेहतर उपयोग और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वर्टिकल निर्माण की संभावना पर चर्चा हुई. इसके बाद 10,000 वर्गमीटर भूमि पर सहमति बनी और इसी आधार पर आवंटन को अंतिम रूप दिया गया.
पचार में बनने वाला यह ई-बस डिपो केवल एक मंजिल तक सीमित नहीं रहेगा. जेडीए समिति ने भूमि का अधिकतम और बेहतर उपयोग करने के लिए बहुमंजिला निर्माण किया जाएगा. जेसीटीएसएल के प्रबंध निदेशक की ओर से 29 जून 2026 को पत्र भेजकर आवंटित जमीन पर बहुमंजिला ढांचा तैयार करने की लिखित सहमति दी गई थी. इससे सीमित क्षेत्रफल में ज्यादा सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी और बस संचालन से जुड़ी अलग-अलग व्यवस्थाओं को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकेगा.
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बहुमंजिला डिपो बनने से इलेक्ट्रिक बसों की पार्किंग, चार्जिंग स्टेशन और मेंटेनेंस यार्ड जैसी व्यवस्थाओं को एक ही परिसर में विकसित की जाएगी. ई-बसों के बढ़ते बेड़े को देखते हुए डिपो में जगह का बेहतर प्रबंधन सबसे अहम माना जा रहा है. वर्टिकल डिजाइन के कारण कम जमीन में अधिक उपयोगी क्षेत्र उपलब्ध कराया जा सकेगा. इससे भविष्य में बसों की संख्या बढ़ने पर संचालन व्यवस्था को विस्तार देने में भी सुविधा मिल सकती है. डिपो का निर्माण आधुनिक इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन की जरूरतों के अनुरूप किए जाने की योजना है.
खसरा नंबर 1455 जयपुर मास्टर प्लान-2025 और संबंधित जोनल डेवलपमेंट प्लान के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में आता है. हालांकि नगरीय विकास विभाग के आदेश के अनुसार यहां ई-बस डिपो के निर्माण के लिए भूमि आवंटन को मंजूरी दी गई है. आरक्षित की गई पूरी 10,000 वर्गमीटर भूमि का मालिकाना हक जयपुर विकास प्राधिकरण के पास ही रहेगा. यानी जेसीटीएसएल को डिपो निर्माण और संचालन के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि जमीन का स्वामित्व जेडीए के पास रहेगा.
पचार और कालवाड़ रोड क्षेत्र में नया डिपो बनने के बाद आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को जयपुर शहर से सार्वजनिक परिवहन के जरिए बेहतर जोड़ने की संभावना है. जोबनेर, कालवाड़, रामकुटिया, माचवा, धर्मपुरा, हाथोज, गोविंदपुरा, भंभौरी और धानक्या सहित आसपास के इलाकों से आने-जाने वाले यात्रियों को इसका लाभ मिल सकता है. डिपो से बसों का संचालन बढ़ने पर कालवाड़-चांदपोल जैसे प्रमुख रूटों पर भी इलेक्ट्रिक बस सेवा को मजबूत करने में मदद मिलेगी. इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच परिवहन कनेक्टिविटी का दायरा बढ़ेगा.
इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते संचालन के साथ जयपुर में सार्वजनिक परिवहन के स्वरूप में भी बदलाव की उम्मीद है. पीएम ई-बस योजना के तहत संचालित होने वाली बसें पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में अलग तकनीक और चार्जिंग व्यवस्था पर आधारित होंगी. नए डिपो में चार्जिंग और रखरखाव की सुविधाएं विकसित होने से बसों के नियमित संचालन को सपोर्ट मिलेगा. इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ने से शहर में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक बनाने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण हो सकती है.
केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत राजस्थान को कुल 1,150 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की गई हैं. इनमें से अधिकतम 450 बसें जयपुर के लिए निर्धारित हैं. अगस्त 2026 में मुख्यमंत्री ने जयपुर में 16 ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर सेवा की शुरुआत की थी. अब पचार में नए डिपो के लिए जमीन मिलने के बाद इलेक्ट्रिक बसों के लिए आधारभूत ढांचा तैयार करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है.
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September 17, 2026, 09:54 IST



