19 साल में 150 मौतें, 2 हजार करोड़ के एलिवेटेड रोड का वादा, कब सुरक्षित होगी ‘देसूरी नाल’?

पाली. 7 सितंबर 2007… शाम का वो वक्त राजस्थान कभी नहीं भूल सकता. देसूरी की नाल से गुजरता एक ट्रक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिरा और 86 से ज्यादा रामदेवरा जा रहे जातरूओं की सांसें वहीं थम गई. उस खौफनाक हादसे में शेमल गांव में एक ही चिता पर 30 मासूमों और अपनों का अंतिम संस्कार करना पड़ा था. उस दिन सरकार जागी, नेता पहुंचे, दावे हुए और 19 साल का लंबा वक्त बीत गया. जो बच्चे उस हादसे में अनाथ हुए, वे आज जवान हो चुके हैं… लेकिन अरावली की पहाड़ियों के बीच देसूरी की नाल आज भी वहीं की वहीं खड़ी है. वही संकरी सड़क, वही जानलेवा तीखे मोड़ और वही खौफ. इन 19 सालों में इस खूनी मोड़ ने 150 से ज्यादा जानें निगल ली.
इतना कुछ हो जाने के बाद भी 2 हजार करोड़ के एलिवेटेड रोड के वादे सिर्फ कागजी डीपीआर और फाइलों के चक्करों में दबे पड़े हैं. आखिर कब जागेगा प्रशासन और कब सुरक्षित होगा मारवाड़-मेवाड़ का यह जीवनपथ? हादसे के उस वक्त मौके पर मौजूद दिनेश उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताते हैं कि राजसमंद अस्पताल में शव रखने तक की जगह नहीं बची थी. खाई में गिरे ट्रक के नीचे दबे 6-7 साल के बच्चे को निकालते ही उसका शरीर दो हिस्सों में बंट गया था. वह मंजर और बदहवासी आज भी आंखों के सामने तैर जाती है. उस दिन शेमल, मादड़ी देवस्थान और भावा गांव के कई परिवार पल भर में तबाह हो गए थे.
क्यों खतरनाक है यह मार्ग?
मारवाड़ और मेवाड़ को जोड़ने वाले इस मार्ग की भौगोलिक स्थिति सड़क निर्माण और यातायात व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. रास्ते में कई जगह अत्यधिक ढाल और तीखे मोड़ हैं, जबकि पर्याप्त दृश्य दूरी नहीं होने से वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ जाता है. सड़क के एक तरफ गहरी खाई और नदी है, वहीं दूसरी ओर ऊंची अरावली पहाड़ियां मौजूद हैं. ऐसे में सड़क को चौड़ा करने या नए निर्माण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है. इसके अलावा मार्ग का ड्रेनेज सिस्टम भी जर्जर स्थिति में है. बारिश के दौरान पानी की निकासी प्रभावित होने से सड़क को नुकसान पहुंचता है. सड़क की सतह यानी पेवमेंट भी कई जगह क्षतिग्रस्त है, जिससे आवागमन और ज्यादा जोखिम भरा हो जाता है.
क्या है प्रस्तावित समाधान और योजना?
राजसमंद और पाली जिले की सीमा पर मेवाड़ और मारवाड़ को जोड़ने वाले खतरनाक मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए 9 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड स्काई-वे का प्रस्ताव तैयार किया गया है. करीब 2 हजार करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना में नदी की तरफ सिंगल पोल पर एलिवेटेड रोड बनाने की योजना है. इसका उद्देश्य भूमि अधिग्रहण और पेड़ों की कटाई को न्यूनतम रखना है. प्रस्तावित निर्माण पुराने स्टेट हाईवे-16 के किलोमीटर 281/500 से 290/00 के बीच किया जाना है. यह मार्ग लंबे समय से हादसों के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है और पुलिस व परिवहन विभाग इसे डेंजर जोन घोषित कर चुके हैं. 7 सितंबर 2007 को यहां हुए हादसे में 86 लोगों की मौत हुई थी. प्रस्तावित स्काई-वे बनने से यातायात को सुरक्षित और सुगम बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
जिम्मेदारों ने क्या कहा?
पाली के सांसद पीपी चौधरी इसको लेकर लगातार प्रयास करते आ रहे है. पीपी चौधरी कहते है कि पाली से चारभुजा तक 83 किमी मार्ग के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री से आग्रह किया गया है. 1,800 से 2,000 करोड़ की इस परियोजना की डीपीआर बन चुकी है, जिसमें देसूरी नाल का एलिवेटेड रोड शामिल है. जल्द स्वीकृति की उम्मीद है. वही आरएसआरडीसी के अधीक्षण अभियंता अंजू चौधरी का कहना है कि देसूरी-चारभुजा एलिवेटेड रोड की डीपीआर पर कुछ तकनीकी आपत्तियां आई थीं. फिलहाल उनमें संशोधन और सुधार का काम जारी है.



