5 करोड़ लोगों को नहीं मिलेगा अन्न का एक दाना! ये कैसे संकट की चेतावनी, आधा दर्जन देशों में अलर्ट जैसे हालात

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5 करोड़ लोगों को नहीं मिलेगा अन्न का एक दाना! ये कैसे संकट की चेतावनी?
Last Updated:September 18, 2026, 14:10 IST
अल नीनो के कारण एशिया में भुखमरी का संकट पैदा हो गया है. विश्व खाद्य कार्यक्रम की ओर से दी गई चेतावनी में कहा गया कि इससे करीब 5 करोड़ लोग प्रभावित हो सकते हैं. भारत, श्रीलंका समेत कई देशों में सूखे और खाद्य असुरक्षा की चेतावनी के बीच बचाव के लिए काम शुरू कर दिए गए हैं. 5 करोड़ लोगों को नहीं मिलेगा अन्न का एक दाना! ये कैसे संकट की चेतावनी, आधा दर्जन देशों में अलर्ट जैसे हालात; (सांकेतिक तस्वीर)
आधी दुनिया एक बार फिर बड़े संकट के मुहाने पर खड़ी है. पूरे एशिया में भुखमरी जैसे हालातों की चेतावनी दी जा रही है. हाल ही में विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी दी कि करीब पांच करोड़ लोग भुखमरी की चपेट में आ सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी कहा कि अल नीनो हमारी आंखों के सामने ही और विकराल होता जा रहा है और आने वाले दिनों में इसका असर लोगों की जिंदगी को मुसीबतों से भर सकता है.
द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार एशिया के कई देश इस समय इस गंभीर मौसमी संकट की तैयारी में जुट गए हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल का अल नीनो पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड को तोड़ सकता है क्योंकि डर है कि इस बार ये सबसे तेज और शक्तिशाली रूप ले सकता है. एक बार फिर प्रशांत महासागर में असामान्य रूप से गर्म हो रहे पानी और जलवायु परिवर्तन के मिलने से यह स्थिति और खतरनाक बनती दिखाई दे रही है.
भारत में मॉनसून में दिखे संकेत जहां तक भारत की बात है तो यहां इस संकट के संकेत जून से लेकर सितंबर तक के चार महीने के मॉनसून सीजन में पहले से ही दिखने लगे हैं. जून और अगस्त में औसत से काफी कम बारिश होने के साथ ही सितंबर में मानसून की बारिश कई इलाकों में लगभग आधी रह गई है. खासतौर पर महाराष्ट्र के कई जिलों में अभी से सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं. खरीफ की फसलों जिनमें चावल, दालें, कपास और मक्का जैसी फसलें आती हैं, इन पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. विशेषज्ञ मान रहे हैं कि आने वाले महीनों में इनकी पैदावार घट सकती है और खाद्य पदार्थों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं. गरीब और निम्न मध्यम वर्ग के परिवारों पर यह बोझ सबसे ज्यादा पड़ेगा, जिससे लोग दाने-दाने के लिए मोहताज होते दिखाई देंगे.
क्या चल रहीं यहां तैयारियां? हालांकि पिछले 4 महीनों से लगातार वैज्ञानिकों की चेतावनी को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार ने इस चुनौती को गंभीरता से लिया है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि किसानों के लिए सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है. तीन सौ पचास से ज्यादा संवेदनशील जिलों में पानी बचाने के काम तेज किए जा रहे हैं. किसानों को कम पानी वाली और छोटी अवधि की फसलें जैसे दालें और बाजरा लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. साथ ही जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि सूखे का असर कम हो सके.
किन-किन देशों में हालात कंट्रोल से बाहर हो रहे? अल-नीनो से सिर्फ भारत की स्थिति ही खराब नहीं है, बल्कि श्रीलंका में इस बार पिछले एक दशक का सबसे भयानक सूखा पड़ा है. एक लाख साठ हजार से ज्यादा लोग पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं. कई जलाशय वहां सूख गए हैं. सरकार को याला नेशनल पार्क जैसे पर्यटन स्थलों को बंद करना पड़ा है और जानवरों के लिए पानी टैंकरों से पहुंचाया जा रहा है. उत्तर-पूर्वी इलाके में तालाब सूखने से हजारों मछलियां मर गईं. देश की आपदा प्रबंधन एजेंसी समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने की योजना पर काम कर रही है, हालांकि मौजूदा क्षमता बहुत सीमित है, ऐसे में यहां संकट गहराया हुआ है.
अन्न उत्पादन में गिरावट का अनुमान दक्षिण-पूर्व एशिया में भी हालात काफी चिंताजनक हैं. पिछले अल नीनो के अनुभव के बावजूद इस बार संकट ज्यादा गहरा माना जा रहा है. इस बार क्षेत्रीय चावल उत्पादन में आठ से दस प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है. इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देशों में परिवार अपनी आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं. ऐसे में फसल उत्पादन में कमी के चलते अगर दाम थोड़े भी बढ़े तो इन देशों में सामाजिक तनाव बढ़ सकता है. विशेषज्ञ कहते हैं कि खाद्य सुरक्षा अब सिर्फ कृषि का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बन चुका है. कई देश जैविक खाद और पुनर्योजी खेती को बढ़ावा दे रहे हैं.
पानी के साथ गर्मी और तूफान का खतरा भी मंडरा रहा पूर्वी एशिया में गर्मी और तूफान दोनों का खतरा है. दक्षिण कोरिया में जुलाई सबसे सूखा रहा, फिर अचानक भारी बारिश ने तबाही मचा दी. हालांकि इससे बचाव के लिए लगातार तकनीकी पर काम कर रहे इस देश ने अठारह साल बाद अपनी हीटवेव अलर्ट प्रणाली बदली है. जब तापमान महसूस होने वाला स्तर 38 डिग्री पार करे तो बाहरी काम रोकने की सलाह दी जाएगी. जापान में पहली बार आधिकारिक तौर पर ‘क्रूर गर्मी’ वाला दिन दर्ज किया गया, जब तापमान 40 डिग्री से ऊपर गया. अब सुपर टाइफून की आशंका भी बढ़ गई है. सरकार ने लोगों से घरों को सुरक्षित रखने और जरूरी सामान रखने की अपील की है. कुछ हाईवे अंडरपास भारी बारिश में पहले से बंद कर दिए जाएंगे.
About the Authorप्रिया गौतमSenior Correspondent
Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi..com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …
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September 18, 2026, 14:10 IST
क्या चल रहीं यहां तैयारियां? हालांकि पिछले 4 महीनों से लगातार वैज्ञानिकों की चेतावनी को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार ने इस चुनौती को गंभीरता से लिया है. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि किसानों के लिए सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है. तीन सौ पचास से ज्यादा संवेदनशील जिलों में पानी बचाने के काम तेज किए जा रहे हैं. किसानों को कम पानी वाली और छोटी अवधि की फसलें जैसे दालें और बाजरा लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. साथ ही जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि सूखे का असर कम हो सके.
किन-किन देशों में हालात कंट्रोल से बाहर हो रहे? अल-नीनो से सिर्फ भारत की स्थिति ही खराब नहीं है, बल्कि श्रीलंका में इस बार पिछले एक दशक का सबसे भयानक सूखा पड़ा है. एक लाख साठ हजार से ज्यादा लोग पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं. कई जलाशय वहां सूख गए हैं. सरकार को याला नेशनल पार्क जैसे पर्यटन स्थलों को बंद करना पड़ा है और जानवरों के लिए पानी टैंकरों से पहुंचाया जा रहा है. उत्तर-पूर्वी इलाके में तालाब सूखने से हजारों मछलियां मर गईं. देश की आपदा प्रबंधन एजेंसी समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने की योजना पर काम कर रही है, हालांकि मौजूदा क्षमता बहुत सीमित है, ऐसे में यहां संकट गहराया हुआ है.
अन्न उत्पादन में गिरावट का अनुमान दक्षिण-पूर्व एशिया में भी हालात काफी चिंताजनक हैं. पिछले अल नीनो के अनुभव के बावजूद इस बार संकट ज्यादा गहरा माना जा रहा है. इस बार क्षेत्रीय चावल उत्पादन में आठ से दस प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है. इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देशों में परिवार अपनी आय का बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं. ऐसे में फसल उत्पादन में कमी के चलते अगर दाम थोड़े भी बढ़े तो इन देशों में सामाजिक तनाव बढ़ सकता है. विशेषज्ञ कहते हैं कि खाद्य सुरक्षा अब सिर्फ कृषि का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बन चुका है. कई देश जैविक खाद और पुनर्योजी खेती को बढ़ावा दे रहे हैं.
पानी के साथ गर्मी और तूफान का खतरा भी मंडरा रहा पूर्वी एशिया में गर्मी और तूफान दोनों का खतरा है. दक्षिण कोरिया में जुलाई सबसे सूखा रहा, फिर अचानक भारी बारिश ने तबाही मचा दी. हालांकि इससे बचाव के लिए लगातार तकनीकी पर काम कर रहे इस देश ने अठारह साल बाद अपनी हीटवेव अलर्ट प्रणाली बदली है. जब तापमान महसूस होने वाला स्तर 38 डिग्री पार करे तो बाहरी काम रोकने की सलाह दी जाएगी. जापान में पहली बार आधिकारिक तौर पर ‘क्रूर गर्मी’ वाला दिन दर्ज किया गया, जब तापमान 40 डिग्री से ऊपर गया. अब सुपर टाइफून की आशंका भी बढ़ गई है. सरकार ने लोगों से घरों को सुरक्षित रखने और जरूरी सामान रखने की अपील की है. कुछ हाईवे अंडरपास भारी बारिश में पहले से बंद कर दिए जाएंगे.
चीन में भी गर्मी का कहर चीन और हांगकांग में भी अल-नीनो को लेकर तैयारी तेज है. हांगकांग में अत्यधिक गर्मी के दौरान कंपनियों को कर्मचारियों के लिए ठंडक और आराम का इंतजाम करना अनिवार्य कर दिया गया है. चीन ने सौ दिन का अभियान शुरू किया है और शहरों को जलवायु जोखिम मानचित्र बनाने के लिए कहा है. ताइवान ने चालीस डिग्री से ऊपर तापमान वाले तीन दिन के सिमुलेशन अभ्यास भी किए हैं.
कुल मिलाकर, अल नीनो सिर्फ मौसम का उतार-चढ़ाव नहीं रह गया है, बल्कि खासतौर पर एशिया में यह खाद्य सुरक्षा, पानी, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को एक साथ प्रभावित करने वाला संकट बन चुका है. भारत जैसे बड़े कृषि प्रधान देश के लिए समय रहते तैयारी करना बेहद जरूरी है. अगर ऐसा नहीं हुआ तो मुसीबत बढ़ जाएगी. किसानों को सही सलाह, पानी की बचत और वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ना इस संकट से निपटने का सबसे कारगर तरीका साबित हो सकता है. जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसे मौसमी झटके अब आम होते जा रहे हैं. इसलिए सतर्कता और सामूहिक प्रयास ही सबसे बड़ा बचाव है.
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