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सेंसर बोर्ड में 30 साल बाद बड़ा बदलाव, नई गाइडलाइंस से ‘ड्रग्स-हिंसा’ के सीन्स पर कसी नकेल, मेकर्स हो जाएं सचेत

Last Updated:September 19, 2026, 18:03 IST

भारत सरकार पहले ही प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी और पंकज त्रिपाठी सहित 18 लोगों को सेंसर बोर्ड का नया सदस्य बना चुकी है. उन्होंने अब 30 साल पुरानी सेंसर बोर्ड (CBFC) की गाइडलाइंस में बड़े बदलाव किए हैं. नई सिस्टम के तहत फिल्ममेकर्स को हिंसा, ड्रग्स से जुड़े सीन्स को लेकर सचेत रहना पड़ेगा. अब फिल्म सर्टिफिकेशन में U और A के अलावा भी कई कैटेगरीज होंगी.

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सेंसर बोर्ड में 30 साल बाद बड़ा बदलाव, 'ड्रग्स-हिंसा' के सीन्स पर कसी नकेलZoomपंकज त्रिपाठी-प्रीति जिंटा-सुनील शेट्टी, सेंसर बोर्ड के नई सदस्य हैं.

नई दिल्ली: भारत सरकार ने पहले सेंसर बोर्ड के 18 नए सदस्यों की नियुक्ति की. अब उन्हें नई गाइडलाइंस के तहत काम करने का निर्देश मिला है. प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी, पंकज त्रिपाठी सहित कई सितारे सीबीएफसी के नए सदस्य हैं. सीबीएफसी की गाइडलाइंस में 30 साल बाद बदलाव हुए हैं. पुराने नियमों के कई बुनियादी सिद्धांतों को बरकरार रखा गया है. साथ ही, आज के मानकों के अनुरूप सर्टिफिकेशन सिस्टम को अपडेट किया गया है. फिल्म सर्टिफिकेशन में नए नियम शामिल हुए हैं. यानी अब फिल्मों का कॉन्टेंट बनाते समय मेकर्स को समाज के मूल्यों और मानकों का भी ध्यान रखना पड़ेगा, जिसका उल्लंघन करने पर सर्टिफिकेशन में मुश्किलें आ सकती हैं. फिल्मों में ड्रग्स सेवन और हिंसा के दृश्यों पर नकेल कसी गई है.

फिल्म सर्टिफिकेशन की पिछली गाइडलाइंस दिसंबर 1991 में जारी हुई थी, जिसकी जगह सेंसर बोर्ड की नई गाइडलाइंस लेंगी. नई गाइडलाइंस के तहत अगर फिल्म में निशीले पदार्थों के सेवन, तस्करी को दिखाया जाता है, तो मेकर्स को सीन के साथ कानूनी चेतावनी दिखानी होगी. सिनेमैटोग्राफ एक्टर के तहत यूए7+, यूए13+ और यूए16+ कैटेगरीज शामिल हैं. अब यू और ए के साथ इन कैटेगरीज में भी सर्टिफिकेशन देने होंगे.

कॉन्टेंट को लेकर फिल्ममेकर्स रहें सचेतनई सर्टिफिकेशन सिस्टम के अनुसार, अब फिल्मों को उनके कॉन्टेंट के आधार पर U, UA 7+, UA 13+, UA 16+, A या S कैटेगरी में बांटा जा सकता है. बच्चों के लिए अब कई कैटेगरी में बांटा गया है. फिल्ममेकर्स को अब हिंसा, अपराध, नशीली दवाओं के इस्तेमाल से जुड़े सीन्स पर नए दिशा-निर्देशों के तहत काम करना होगा. अन्य संवेदनशील मसलों के फिल्मांकन की भी सीमाएं तय हुई हैं. सेंसर बोर्ड के नियमों के अनुसार, फिल्मों में दिखाए गए समाज-विरोधी बर्ताव या हिंसा को उचित नहीं ठहराया जाएगा.

सेंसर बोर्ड की कॉन्टेंट पर रहेगी पैनी नजरफिल्ममेकर्स अब बच्चों के साथ गलत बर्ताव, जीवों के साथ क्रूरता और दिव्यांग व्यक्तियों से जुड़े सीन को बेवजह नहीं दिखा जा सकेगा. सेंसर बोर्ड के नए नियमों के तहत सांप्रदायिक या देश-विरोधी संवेदनाओं से जुड़े सीन्स पर भी पैनी नजर रखी जाएगी. किसी भी सीन का मूल्यांकन करते समय फिल्म के संदर्भ, उसके कालखंड और आज के सामाजिक मानकों का भी ध्यान रखा जाएगा.

About the AuthorAbhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…

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First Published :

September 19, 2026, 18:03 IST

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