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शकील बदायूनी के 1 पान ने किया कमाल, लिख डाला कालजयी रोमांटिक गाना, 66 साल बाद भी आशिकों का फेवरेट

Last Updated:September 20, 2026, 07:01 IST

Bollywood Best Romantic Song : मोहम्मद रफी ने 1960 में एक बेशकीमती गाना गाया था. उस गाने को आप रोमांटिक गानों का किंग कह सकते हैं. संगीतकार रवि और गीतकार शकील बदायूनी ने घंटों माथा-पच्ची के बाद इसे क्रिएट किया था. कहते हैं कि इसके बनाने में गीतकार शकील बदायूनी के एक पान का बड़ा कमाल था. गुरु दत्त और वहीदा रहमान पर फिल्माया यह कालजयी गाना कैसे बना था, इसके पीछे बड़ा दिलचस्प किस्सा है.

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शकील बदायूनी के 1 पान ने किया कमाल, लिख डाला कालजयी रोमांटिक गानाZoomमोहम्मद रफी का बेशकीमती गाना (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के लिए हजारों खूबसूरत गाने लिख गए हैं, मगर कुछ गीत हमेशा से श्रोताओं के दिलों में बसे हुए हैं. मोहम्मद रफी का ऐसा ही एक सदाबहार गाना है, जिसके बनने में शकील बदायूनी के एक पान का कमाल छिपा है. वह 66 साल पुराना गाना आज भी बहुत पॉपुलर है, जिसकी गिनती बेहतरीन रोमांटिक हिंदी गानों में होती है. इसे आप रोमांटिक गानों का सरताज कहेंगे, तो भी कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. वह गाना है- ‘चौदहवीं का चांद हो’, जिसे शकील बदायूनी ने 1960 की फिल्म ‘चौदहवीं का चांद’ के लिए लिखा था. संगीतकार रवि ने इसका संगीत तैयार किया था. गाने को वहीदा रहमान और गुरु दत्त पर फिल्माया गया था. गुरु दत्त ने इसे डायरेक्ट भी किया था.

मोहम्मद रफी के इस गाने के बिना हिंदी सिनेमा के रोमांटिक गानों का जिक्र अधूरा है. इसके बनने का किस्सा भी बड़ा दिलचस्प है. जब फिल्म का टाइटल ट्रैक बनाने पर चर्चा हो रही थी, तब गुरु दत्त ने संगीतकार रवि को गाने की पूरी सिचुएशन समझाई, तो उन्होंने अपने दिमाग में लाइन सोच ली. वह लाइन थी- ‘चौदहवीं का चांद हो.’ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गाने को लेकर जब गुरुदत्त, रवि और शकील बदायूनी की पहली बैठक हुई, तो रवि ने शकील साहब को मुखड़े की पहली पंक्ति सौंपते हुए उस पर गाना लिखने को कहा.

बार-बार लिखते-काटते रहे शकील बदायूनीशकील बदायूनी ने तुरंत पंक्ति ‘चौदहवीं का चांद हो’ के साथ ‘या आफताब हो’ लाइन जोड़ दी. मुखड़े की एक लाइन बन चुकी थी, मगर दूसरी लाइन पर काफी माथापच्ची करने के बाद भी कोई सटीक भाव के साथ लाइन नहीं सूझ रही थी. कोई पंक्ति गीतकार शकील को पसंद आती, तो संगीतकार रवि को आपत्ति होती. किसी लाइन से गुरुदत्त संतुष्ट नहीं होते. शकील बदायूनी बार-बार लिखते और उसे काटते-मिटाते रहे. बात नहीं बन पा रही थी. फिर गुरुदत्त बैठक खत्म करके चले गए और रवि और शकील साथ बैठे रहे. रवि ने शकील से कहा उन्हें किसी भी तरह गाने को आज ही तैयार करना है.

संगीतकार ने 4 घंटे में तैयार किया गाना संगीतकार रवि को याद आया कि शकील साहब को पान बहुत पसंद है. कहते हैं कि पान खाने के बाद गीतकार शकील के मन में अच्छे-खूबसूरत विचार जन्म लेते थे. रवि ने फिर गीतकार से उनके पान के डिब्बे के बारे में पूछा, मगर वे उसे घर भूल आए थे. संगीतकार ने फिर किसी को शकील साहब के घर भेजा. किसी तरह उनका पान का डिब्बा आया. पान के स्वाद-सुगंध से जब शकील साहब का गला तर हुआ, तो खूबसूरत पंक्तियां उनके जेहन में कौंधने लगीं. उन्होंने तुरंत संगीतकार से कहा कि मिल गई वो लाइन जिसकी हमें जरूरत है. इस तरह मुखड़े की दूसरी पंक्ति ‘जो भी हो तुम खुदा की कसम लाजवाब हो’ का जन्म हुआ. कहते हैं कि फिर रवि और शकील साहब ने करीब चार घंटे में पूरा गाना तैयार कर डाला. जब गुरुदत्त को गाना सुनाया, तो वह भी सुनकर अभिभूत हुए. फिर मोहम्मद रफी ने अपनी मखमली आवाज से गाकर गीत को अमर कर दिया.

About the AuthorAbhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…

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New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

September 20, 2026, 07:01 IST

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