क्या है जापान का Hara Hachi Bu? पेट 80% भरने पर खाना रोकने की परंपरा के पीछे क्या सोच है?

Last Updated:October 12, 2026, 19:19 IST
जापान की Hara Hachi Bu परंपरा में पेट करीब 80 फीसदी भरने पर खाना रोकने की सलाह दी जाती है. ओकिनावा से जुड़ी इस आदत के पीछे क्या सोच है, यह सेहत के लिए कैसे फायदेमंद हो सकती है और इसे अपनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, जानिए.
आजकल हेल्दी रहने के लिए लोग तरह-तरह के डाइट ट्रेंड अपनाते हैं. कोई कैलोरी गिनता है, तो कोई खाने की मात्रा कम करने पर ध्यान देता है. लेकिन जापान में खानपान से जुड़ी एक पुरानी परंपरा है, जिसमें पेट पूरी तरह भरने से पहले ही खाना रोकने की सलाह दी जाती है. इसे Hara Hachi Bu कहा जाता है. यह परंपरा खासतौर पर जापान के ओकिनावा क्षेत्र से जुड़ी है और इसे संतुलित तरीके से खाने की आदत के रूप में देखा जाता है.
Hara Hachi Bu एक जापानी कहावत है, जिसका सामान्य अर्थ है पेट को लगभग 80 फीसदी भरने तक खाना और उसके बाद रुक जाना. इसका मतलब भूखे रहना या जानबूझकर शरीर को कम खाना देना नहीं है. इसका मकसद है कि इंसान पेट भरकर असहज महसूस करने तक खाने के बजाय उस समय रुक जाए, जब उसे लगे कि अब पर्याप्त खाना हो गया है. आसान भाषा में समझें तो खाना खाते समय इस बात पर ध्यान देना कि भूख खत्म हो रही है या नहीं, न कि प्लेट में रखा सारा खाना खत्म करना ही जरूरी समझना. यह आदत धीरे-धीरे खाने और शरीर के भूख व पेट भरने के संकेतों को समझने से जुड़ी है.
ओकिनावा से क्यों जुड़ी है यह परंपरा?
ओकिनावा जापान का एक द्वीपीय क्षेत्र है, जो लंबे समय तक वहां के बुजुर्गों और अधिक उम्र तक जीने वाले लोगों के कारण चर्चा में रहा है. वहां के पारंपरिक खानपान और जीवनशैली पर शोध करने वाले विशेषज्ञों ने Hara Hachi Bu जैसी आदतों का भी उल्लेख किया है. हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि सिर्फ इस नियम का पालन करने से लोग लंबी उम्र जीते हैं. जीवनकाल पर खानपान, शारीरिक गतिविधि, नींद, सामाजिक संबंध, आनुवंशिकता और स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे कई कारकों का असर पड़ता है. इस परंपरा को लंबी उम्र का अकेला कारण मानने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं.
खाने के तरीके के पीछे क्या सोच है?
Hara Hachi Bu का मुख्य विचार है कि खाना खाते समय जल्दबाजी न करें और अपने शरीर के संकेतों पर ध्यान दें. कई बार टीवी देखते हुए, मोबाइल चलाते हुए या बहुत तेजी से खाना खाने पर व्यक्ति को यह समझने में देर हो सकती है कि उसका पेट भर चुका है. इसलिए इस तरीके को अपनाने के लिए धीरे-धीरे खाना, हर निवाले को अच्छी तरह चबाना और बीच-बीच में रुककर यह महसूस करना मददगार हो सकता है कि अभी और भूख है या नहीं. पेट में भारीपन होने तक खाने के बजाय आराम से संतुष्ट महसूस होने पर रुकना इसका व्यावहारिक तरीका है.
क्या इससे सेहत को फायदा हो सकता है?
भूख और पेट भरने के संकेतों को समझकर खाना कुछ लोगों को जरूरत से ज्यादा खाने से बचने में मदद कर सकता है. इससे कुल कैलोरी सेवन और वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. हालांकि, Hara Hachi Bu पर उपलब्ध शोध सीमित है और इसके सभी संभावित फायदों की पुष्टि के लिए और अध्ययन जरूरी हैं. यह भी जरूरी है कि 80 फीसदी पेट भरने का कोई सटीक माप नहीं होता. इसे कैलोरी घटाने की सख्त सीमा या हर व्यक्ति के लिए जरूरी नियम नहीं समझना चाहिए. बच्चों, गर्भवती महिलाओं, अधिक पोषण की जरूरत वाले लोगों या खाने से जुड़ी किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए भोजन की जरूरत अलग हो सकती है.
About the AuthorVividha SinghSub Editor
विविधा सिंह हिंदी डिजिटल पत्रकारिता का उभरता हुआ नाम हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में साढ़े चार साल का अनुभव है. वर्तमान में वह हिंदी में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह लाइफस्टाइल वर्टि…
और पढ़ेंLocation :
Delhi,Delhi,Delhi
First Published :
October 12, 2026, 19:19 IST



