Durva Grass Ganesh Idol: 11 किलो दूब 1 महीना मेहनत और साकार हुए गणपति, जोधपुर का ये गणेश रूप देख रह जाएंगे दंग

Last Updated:September 21, 2026, 17:21 IST
Durva Grass Ganesh Idol: जोधपुर में गणेश उत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल देखने को मिली है. पर्यावरण प्रेमी सूरजमल पंवार ने करीब 11 किलो दूब से तीन फीट ऊंचे गणपति को साकार किया है. एक महीने की मेहनत से तैयार इस हरित गणेश प्रतिमा को विसर्जन के बाद पार्क में दोबारा लगाया जाएगा, ताकि गणपति की आस्था के साथ हरियाली का संदेश भी आगे बढ़ता रहे.
जोधपुर. गणेश उत्सव में आपने मिट्टी, प्लास्टर ऑफ पेरिस और अलग-अलग तरह की धातुओं से बनी गणेश प्रतिमाएं तो खूब देखी होंगी, लेकिन जोधपुर में इस बार गणपति की ऐसी अनूठी प्रतिमा तैयार की गई है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है. यहां दूब यानी हरी घास से करीब तीन फीट ऊंचे गणपति साकार किए गए हैं. खास बात यह है कि यह प्रतिमा पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ-साथ श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र भी बनी हुई है.
प्रताप नगर निवासी पर्यावरण प्रेमी सूरजमल पंवार ने इस अनोखी गणेश प्रतिमा को तैयार किया है. सूरजमल ने बताया कि प्रतिमा को तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगा. सबसे पहले मिट्टी से गणपति का आकार तैयार किया गया. इसके बाद करीब 11 किलो दूब को मंत्रोच्चारण और पूजा-विधि के साथ प्रतिमा पर रोपा गया. लगातार करीब 15 से 20 दिनों तक नियमित पानी देने के बाद दूब बढ़ती गई और देखते ही देखते गणपति का पूरा स्वरूप हरी-भरी प्रतिमा में बदल गया.
पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ गणेश आराधनासूरजमल पंवार बताते हैं कि वे हमेशा पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए कुछ नया करने का प्रयास करते हैं. इससे पहले वे मिट्टी के गणेश, 51 चूहों वाले गणेश और फिटकरी से गणेश प्रतिमा तैयार कर चुके हैं. उनका कहना है कि इस बार उनकी इच्छा थी कि देश और पर्यावरण हमेशा हरा-भरा रहे, इसी भावना के साथ उन्होंने दूब से गणपति को साकार किया और भगवान गणेश से हरियाली का आशीर्वाद मांगा.
विसर्जन के बाद भी कायम रहेगी गणेश प्रतिमा की यादइस प्रतिमा की खासियत सिर्फ इसे बनाने तक ही सीमित नहीं है, विसर्जन के बाद भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश जारी रहेगा. सूरजमल ने बताया कि प्रतिमा के विसर्जन के लिए किसी अच्छे पार्क का चयन किया जाएगा, जहां इस दूब को दोबारा लगाया जा सके. इससे दूब भी जीवित रहेगी और पार्क में हरियाली भी बढ़ेगी. इस तरह गणपति उत्सव के बाद भी गणेश जी की याद हरियाली के रूप में सालभर बनी रहेगी.
बच्चों ने भी सीखा पर्यावरण और आस्था का पाठसूरजमल की इस पहल का असर नन्हे-मुन्ने बच्चों पर भी देखने को मिल रहा है. बच्चों ने अपने नाना से प्रेरणा लेते हुए खुद छोटे-छोटे गणपति बनाना शुरू कर दिया. किसी बच्चे ने मिट्टी से गणेश जी तैयार किए हैं तो किसी ने क्ले से प्रतिमा बनाई है. यानी घर के बड़े जहां पर्यावरण और आस्था का संदेश दे रहे हैं, वहीं बच्चे भी अपनी रचनात्मकता के जरिए इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.
जगन्नाथ की तर्ज पर भी सजे गणपतिजोधपुर में गणेश उत्सव के दौरान एक और अनोखा स्वरूप देखने को मिल रहा है. लखजी की पोल स्थित साढ़ा बास में भगवान जगन्नाथ की तर्ज पर करीब दो फीट ऊंची गणेश प्रतिमा तैयार की गई है. इसमें भगवान गणेश को श्याम वर्ण का स्वरूप दिया गया है। प्रतिमा का यह अलग अंदाज भी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
और पढ़ेंLocation :
Jodhpur,Rajasthan
First Published :
September 21, 2026, 17:21 IST



