दूध के दांत जल्दी टूटना कितना नुकसानदेह? क्या टेढ़े निकल सकते हैं पक्के दांत, जानिए डेंटिस्ट की राय

Last Updated:September 23, 2026, 14:55 IST
छोटे बच्चों के दूध के दांत गिरना एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है, लेकिन जब चोट लगने या संक्रमण की वजह से कोई दांत समय से पहले टूट जाता है, तो यह माता-पिता की चिंता बढ़ा देता है. अक्सर पैरेंट्स इस उलझन में रहते हैं कि क्या इससे आगे आने वाले पक्के दांत टेढ़े-मेढ़े हो जाएंगे या बच्चे को भविष्य में ब्रेसेस लगवाने पड़ेंगे? फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल की पीडियाट्रिक डेंटिस्ट डॉ. मेघा जैन के अनुसार, दूध के दांत पक्के दांतों के लिए गाइड का काम करते हैं. ऐसे में अगर समय से पहले दांत टूट जाए, तो तुरंत सही कदम उठाना बेहद जरूरी है.
फरीदाबाद: बच्चों के दूध के दांत एक उम्र के बाद धीरे-धीरे गिरते हैं और उनकी जगह पक्के दांत आते हैं. लेकिन कई बार गिरने या चोट लगने की वजह से दूध का दांत समय से पहले टूटकर निकल जाता है. ऐसे में माता-पिता के मन में सवाल रहता है कि इसका असर आगे आने वाले पक्के दांतों पर तो नहीं पड़ेगा. क्या खाली हुई जगह में दूसरे दांत खिसक सकते हैं और क्या बच्चे को बाद में दांत सीधे कराने के लिए इलाज कराना पड़ सकता है. इसी बारे में दांतों की डॉक्टर से जानते हैं कि ऐसी स्थिति में माता-पिता को क्या ध्यान रखना चाहिए.
लोकल-18 से बातचीत में फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल के डेंटल विभाग में बच्चों की स्पेशलिस्ट डॉक्टर मेघा जैन बताती हैं कि बच्चों के दूध के दांत काफी जरूरी होते हैं. इनका काम सिर्फ खाना चबाने तक सीमित नहीं रहता. ये पक्के दांतों के लिए जगह बनाए रखने और उन्हें सही दिशा में आने में मदद करते हैं. इसलिए अगर कोई दूध का दांत समय से पहले गिर जाता है तो आगे आने वाले स्थायी दांतों के निकलने में परेशानी हो सकती है. दूध का दांत पक्के दांत के लिए एक तरह से रास्ता दिखाने का काम करता है.
संक्रमण या कीड़ा लगने से कमजोर होते हैं दांतडॉक्टर मेघा जैन बताती हैं कि घर पर देखकर यह तय करना आसान नहीं है कि कोई दूध का दांत सही समय पर गिरा है या जल्दी निकल गया है. इसकी सही जानकारी जांच के बाद ही मिलती है. कई बार दांत में कीड़ा लगने के बाद वह कमजोर हो जाता है. कुछ मामलों में दांत के आसपास पस और इंफेक्शन भी हो जाता है. ऐसी वजह से दांत अपनी तय उम्र से पहले निकल सकता है. इसलिए ऐसी स्थिति आने पर बच्चे को डेंटिस्ट के पास ले जाना जरूरी है.
खाली जगह की तरफ खिसक सकते हैं दूसरे दांतडॉक्टर मेघा जैन बताती हैं कि दूध का दांत निकलने के बाद बनी खाली जगह में आसपास के दांत अपनी जगह से खिसक सकते हैं. दांत पूरी तरह एक जगह स्थिर नहीं रहते. पीछे वाला दांत आगे की तरफ और आगे वाला पीछे की तरफ आ सकता है. इससे पक्के दांत के लिए मिलने वाली जगह कम हो जाती है. बाद में स्थायी दांत टेढ़ा या गलत जगह पर निकल सकता है. कुछ बच्चों में आगे चलकर दांतों को सीधा करने वाले इलाज की जरूरत भी पड़ सकती है.
स्पेस मेंटेनर का फैसला जांच के बादडॉक्टर मेघा जैन बताती हैं कि हर बच्चे को स्पेस मेंटेनर लगाना जरूरी नहीं होता. इसका फैसला बच्चे की उम्र और किस दूध के दांत के समय से पहले निकलने पर हुआ है, इस आधार पर किया जाता है. इसके साथ यह भी देखा जाता है कि नीचे आने वाला पक्का दांत कितना विकसित हुआ है. दूध के दांत और स्थायी दांत के बीच की स्थिति जानने के लिए जरूरत पड़ने पर एक्स-रे कराया जाता है. रिपोर्ट देखने के बाद ही तय किया जाता है कि स्पेस मेंटेनर की जरूरत है या नहीं.
चोट लगने पर इन बातों की रखें सावधानीडॉक्टर मेघा जैन बताती हैं कि अगर चोट लगने से दूध का दांत टूट जाए या निकल जाए तो बच्चे को जल्द से जल्द नजदीकी डेंटिस्ट को दिखाना चाहिए. टूटे हुए दांत को खुद से वापस मसूड़े में लगाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. दूध का दांत साफ कपड़े में रखकर डॉक्टर को दिखाया जा सकता है. जांच के दौरान दांत के साथ यह भी देखा जाता है कि बच्चे के मसूड़े, होंठ, आसपास के दांत या हड्डी में चोट तो नहीं आई है.
चोट के बाद बच्चे को दर्द या मसूड़ों में परेशानी हो सकती है. ऐसे समय बच्चे को चोट वाली जगह पर बार-बार उंगली लगाने से रोकना चाहिए, क्योंकि इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है. अगर दर्द, सूजन या दूसरी परेशानी बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. समय पर जांच कराने से आगे आने वाले पक्के दांतों के लिए जरूरी जगह को बचाने में मदद मिल सकती है.
About the AuthorRahul Goel
Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at Hindi, managing State and Local18 content operations a…
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Faridabad,Haryana
First Published :
September 23, 2026, 14:55 IST



