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क्या लंग्स कैंसर ठीक नहीं होता? शुरुआत में पहचानने का क्या है तरीका, स्पेशलिस्ट डॉक्टर से जानें सारी बात

Lung Cancer: बॉलीवुड के कैरेक्टर एक्टर मुश्ताक खान का निधन हो गया. उनकी आयु महज 56 साल थी. कहा जा रहा है कि उन्हें लंग्स कैंसर था. कुछ लोगों में यह धारणा है कि लंग्स ठीक नहीं होता. यह बात पूरी तरह से गलत है. आजकल मेडिकल साइंस में कैंसर का इलाज बहुत एडवांस स्टेज में पहुंच गया है. इसलिए यह कहना कि कैंसर का इलाज मुमकिन नहीं है, गलत है. मुश्ताक खान को लंग्स कैंसर क्यों ठीक नहीं हुआ, यह तो उनके डॉक्टर ही बता पाएंगे लेकिन हमने आम जनमानस के लिए यह जानने की कोशिश की कि लंग्स कैंसर क्या सच में सबसे ज्यादा खतरनाक है. क्या इसे ठीक नहीं किया जा सकता है. किसी को अगर लंग्स कैंसर हो जाए तो किस तरह इसका इलाज करें और किसी को हो ही नहीं, इसके लिए क्या करें. इन्हीं सारे सवालों का जवाब तलाशने के लिए हमने मैक्स हेल्थकेयर में सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रिंसपल कंसल्टेंट डॉ. श्रीनिकेत मोहन राघवन से बात की.

लंग्स कैंसर का कारण क्या है

डॉ. श्रीनिकेत राघवन बताते हैं कि लंग्स कैंसर का अगर सबसे बड़ा कारण किसी को माना जाए तो यह है तंबाकू या तंबाकू जनित पदार्थ. जितने भी लंग्स कैंसर के मामले आते हैं, उनमें से सबसे ज्यादा का संबंध तंबाकू से ही है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि जो लोग तंबाकू किसी भी रूप में नहीं लेते, उनमें लंग्स कैंसर नहीं होगा. इसके अलावा भी लंग्स कैंसर के कई कारण हो सकते हैं. खतरनाक प्रदूषण, कैंसर जनित रसायन, एस्बेस्टस, रेडॉन गैस, फेफड़े में टीबी जैसे पुराने निशान आदि के प्रभाव से भी लंग्स कैंसर हो सकता है. कुछ लोगों के परिवार में अगर पहले से निकट संबंधियों को है तो भी हो सकता है लेकिन यह बताना मुश्किल है सटीक कारण इसका क्या है.

क्या लंग्स कैंसर सबसे खतरनाक है

डॉ. श्रीनिकेत राघवन ने बताया कि लंग्स कैंसर हो या कोई और कैंसर, मेडिकल भाषा में हम किसी भी कैंसर को यह नहीं कह सकते हैं कि यह ज्यादा खतरनाक है या कम खतरनाक है. कैंसर कितना खतरनाक है यह इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर की कोशिकाएं प्रभावित अंग से कहां-कहां पहुंची है. और जहां पहुंची है वहां यह अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा रही है या नहीं. मसलन कैंसर कहां-कहां पहुंचा है, इससे हम कैंसर के स्टेज डिसाइड करते हैं. मान लीजिए किसी को लंग्स कैंसर है और उसकी कोशिकाएं लंग्स से सीधे ब्रेन में पहुंच गई है. यह अगर एक बाल के साइज का भी ट्यूमर बन गया तो इसे हम फोर्थ स्टेज मानते हैं. वहीं दूसरी तरफ कैंसर की कोशिकाएं लग्स से शरीर की सारी हड्डियों में पहुंच गई तो भी उसे हम फोर्थ स्टेज मानेंगे. इसलिए किसी को कम खतरनाक या ज्यादा खतनाक मानना मेडिकल भाषा में उचित नहीं है.

तो किस स्टेज में लंग्स कैंसर ठीक हो सकता है

डॉ. श्रीनिकेत राघवन बताते हैं कि अगर अगर लंग्स कैंसर को सही स्टेज में ही पकड़ में आ जाता है तो इसका इलाज करना आसान है. इसमें कैंसर कोशिकाएं लंग्स के एक छोटे हिस्से में मौजूद रहती है और वहां से वह आगे नहीं बढ़ती है. इसमें सर्जरी के जरिए प्रभावित हिस्से या गांठ को निकालकर हटा दिया जाता है. इसके बाद कैंसर को दोबारा वापस आने से रोकने के लिए कीमोथेरेपी या रेडिएशन दिया जाता है. लेकिन 100 फीसदी की गारंटी किसी भी स्टेज में नहीं है. हमारे शरीर के हर हिस्से में लिंफ नोड्स होते हैं. इसकी नलिकाएं पूरे शरीर में जाल की तरह फैली होती है. इसमें कई चीजों से बने द्रव भरे होते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी का हिस्सा होता है. जब कैंसर कोशिकाएं लिंफ नोड्स में पहुंच जाती है तो इसे पूरी तरह ठीक करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण है लेकिन इसका भी इलाज है. कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी के कॉम्बिनेशन से ट्यूमर को काफी हद तक सिकोड़ा या नियंत्रित किया जा सकता है. कई मरीज इसके बाद लंबे समय तक हेल्दी लाइफ जीते हैं. जब कैंसर कोशिकाएं लंग्स से निकलकर हड्डियों, ग्लैंड, दिमाग या लिवर तक फैल जाता है तो इसे आमतौर पर पूरी तरह ठीक करना मुश्किल होता है. इस स्टेज में मरीज की अन्य तकलीफों को कम की जाती है और जीवन को और आगे बढ़ाने की कोशिश की जाती है.

क्या कैंसर 100 फीसदी ठीक हो सकता है

कोई भी कैंसर 100 फीसदी ठीक हो, इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती है. डॉ. श्रीनिकेत राघवन बताते हैं कि कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसमें दोबारा पलटकर आने की आशंका सबसे ज्यादा होती है. इसलिए किसी भी केस में यह नहीं कहा जा सकता है कि अब यह पूरी तरह से ठीक हो चुका है.आमतौर पर माना जाता है कि अगर कैंसर शुरुआती चरण में हैं और इसका इलाज हो गया है तो इसका दोबारा से पलटकर वापस आने की आशंका बहुत कम रहती है. इसके बाद कैंसर जितना अधिक फैला हुआ रहेगा, उतना इसके दोबारा से होने का जोखिम रहेगा. अगर किसी मरीज में कैंसर का इलाज किया जा रहा है तो पहला दो साल बहुत महत्वपूर्ण है. इलाज करा रहे मरीजों को हमलोग हर तीन महीने पर चेक अप करके देखते हैं कि दोबारा कैंसर ग्रोथ तो नहीं हो रहा. इसके बाद हर 6 महीने के बाद बुलाते हैं. अगर 5 साल तक कैंसर दोबारा से नहीं पनपता, तो हम लोग यह मानते हैं कि कैंसर अब ठीक हो गया. 5 साल के बाद दोबारा कैंसर के होने की आशंका न के बराबर होती है. 5 साल के बाद अमूमन एक बार मरीज को बुलाया जाता है.

शुरुआती स्टेज में लंग्स कैंसर कैसे पहचानें

डॉ. श्रीनिकेत बताते हैं कि लंग्स कैंसर को शुरुआती स्टेज में पहचानना मुश्किल है लेकिन कुछ संकेतों के आधार पर इसका अंदाजा लगा सकते हैं. जैसे कभी कुछ खांसी हो गई, कभी खांसते समय ब्लीडिंग हो गई. इससे ज्यादा कुछ पता नहीं चलता. यह भी बहुत मामूली होती है. इसलिए शुरुआती स्टेज में पता लगाना मुश्किल है. इसके बाद जब कैंसर का फैलाव बढ़ता है तो इसमें लगातार खांसी होगी, खांसी के साथ खून निकलने लगेगा, सांस लेने में दम फूलने लगेगा. सीढ़िया चढ़ने या मेहनत वाला काम करने में सांस फूलने लगेगा. इससे अगर कैंसर का फैलाव और बढ़ेगा तो हड्डियों तक में दर्द करने लगेगा. सिर में दर्द होगा, कुछ मरीज को बेहोशी भी हो सकती है. इसका मतलब यह हुआ कि बीमारी ब्रेन तक पहुंच चुकी है. सीधे शब्दों में कहें तो अगर शरीर का रिद्म बदल जाए तो यह कैंसर का संकेत हो सकता है. रिद्म बदलने का मतलब है कि शरीर में जो कुछ पहले से सामान्य चल रहा था, अब उसमें बदलाव हो गया है और यह बदलाव परेशान करने लगा है. हालांकि जरूरी नहीं कि हमेशा इन मामलों में कैंसर ही हो लेकिन ज्यादा चांस रहता है.

किन लोगों को लंग्स कैंसर का खतरा ज्यादा है

इसका साफ उत्तर यह है कि जो लोग स्मोकिंग ज्यादा करते हैं, उन लोगों को लंग्स कैंसर का खतरा ज्यादा रहता है. डॉ. श्रीनिकेत राघवन ने बताया कि स्मोकिंग वाले लोग सबसे ज्यादा लंग्स कैंसर के शिकार होते हैं. इसलिए तंबाकू का जो लोग किसी भी रूप में सेवन करते हैं, उन्हें लंग्स कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. यह तंबाकू अगर पान-सुपारी में भी मिलाया जाए तो इससे भी जोखिम रहेगा.

क्या पहले से इसकी कोई जांच है

डॉ. श्रीनिकेत के मुताबिक कैंसर को पहले पहचानना मुश्किल है. कुछ स्थितियों में लक्षण आने से पहले कुछ जांच होती है, लेकिन यह सबके लिए नहीं है. जो लोग ज्यादा स्मोकिंग करते हैं, उन्हें यह टेस्ट किया जा सकता है. वहीं जिन लोगों के परिवार में लंग्स कैंसर की हिस्ट्री हैं, वे लोग इसकी जांच करा सकते हैं. लेकिन यह सबके लिए नहीं है. वास्तव में सीटी स्कैन भी एक एमएम से कम वाले स्पेस को कवर नहीं कर सकता है. इसलिए जब सीटी स्कैन होता है तो 1 एमएम से कम में अगर कैंसर कोशिकाएं हैं तो उसे नहीं पकड़ सकता है. ऐसे में इससे बचाव ही सबसे ज्यादा जरूरी है.

क्या करें कि कैंसर न हो

कैंसर न हो, इसकी कोई गारंटी नहीं दे सकता है. डॉ. श्रीनिकेत बताते हैं कि लंग्स कैंसर न हो, इसके लिए जरूरी है कि आप स्मोकिंग न करें. सिगरेट-शराब को छोड़ दें. गुटखा,-बीड़ी आदि को हाथ न लगाएं. इसके साथ ही प्रदूषण से बचें. हानिकारक रसायनों से दूर रहें. इसके बाद संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन करें. अच्छी नींद लें और तनाव न लें.

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