Rajasthan

14 Towns Heritage Included in UNESCO Tentative World Heritage List

Last Updated:September 27, 2026, 09:25 IST

Rajasthan Heritage Sites: शेखावाटी की ऐतिहासिक विरासत को इस बार दो महत्वपूर्ण पहचान मिली हैं. क्षेत्र की भित्ति चित्रकला को भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में शामिल किया गया है, जबकि 14 ऐतिहासिक कस्बों के हवेली समूह यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची में जगह बना चुके हैं. बिसाऊ की हवेलियां, छतरियां और मूक रामलीला, महनसर की स्वर्ण सज्जा, रामगढ़ के मंदिर और जोहड़, फतेहपुर की भित्ति चित्रकला और चूरू की हवेलियां इस विरासत की खास पहचान हैं. इन स्थलों को साझा हेरिटेज सर्किट और टूरिस्ट रूट से जोड़कर पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है.

शेखावाटी अंचल को हवेलियों की खुली कला दीर्घा के रूप में देखा जाता है. यहां की सांस्कृतिक विरासत इस जगह को और भी अधिक खास बनाती है. यहां की भित्ति चित्रकला, छतरियां, मंदिर, जोहड़, किले, हवेलियां और लोक परंपराएं सदियों के इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए हैं. इस बार शेखावाटी की विरासत को दो महत्वपूर्ण पहचान मिली है. यहां की भित्ति चित्रकला भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की राष्ट्रीय सूची में शामिल हुई है, जबकि 14 ऐतिहासिक कस्बों के हवेली समूह यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल है.

बिसाऊ की पहचान सिर्फ हवेलियों तक सीमित नहीं है. यहां की ऐतिहासिक हवेलियां, छतरियां और बिसाऊ गढ़ अपनी स्थापत्य शैली के लिए जाने जाते हैं. हवेलियों की दीवारों पर बनी चित्रकला तत्कालीन समाज, पहनावे, रहन-सहन और जीवनशैली की कहानी कहती है. इसके साथ ही बिसाऊ की मूक रामलीला भी बेहद खास लोक परंपरा है. संवाद के बजाय अभिनय और भाव-भंगिमाओं के जरिए रामकथा का मंचन इसकी अलग पहचान बनाता है.

महनसर की स्वर्ण सज्जा और बारीक भित्ति चित्रकला शेखावाटी की कलात्मक समृद्धि का उदाहरण है. हवेलियों की दीवारों पर धार्मिक प्रसंगों के साथ तत्कालीन जीवन के कई दृश्य दिखाई देते हैं. तोलारामजी का कमरा जैसे ऐतिहासिक स्थल भी इस विरासत का हिस्सा हैं. यदि महनसर को हेरिटेज गांव के रूप में विकसित किया जाए तो पर्यटकों को केवल एक हवेली देखने के बजाय पूरे गांव की स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत समझने का अवसर मिल सकता है.

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रामगढ़ शेखावाटी की हवेलियों के साथ मंदिर, छतरियां और जल संरचनाएं भी खास हैं. रुइया की हवेली, रामगोपाल पोद्दार की छतरी, प्राचीन जोहड़ और शनि मंदिर यहां की विरासत को अलग स्वरूप देते हैं. इन स्थलों को एक निर्धारित हेरिटेज टूरिस्ट रूट से जोड़ा जा सकता है. खासतौर पर पुराने जोहड़ों और जल संरचनाओं का संरक्षण जरूरी है, क्योंकि ये केवल ऐतिहासिक स्थल नहीं बल्कि मरुस्थलीय क्षेत्र में पानी बचाने की पारंपरिक तकनीक और सामुदायिक व्यवस्था के प्रमाण भी है.

फतेहपुर शेखावाटी की चित्रकला और स्थापत्य की अलग-अलग तस्वीर पेश करते हैं. फतेहपुर की हवेलियों में धार्मिक कथाओं के साथ रेलगाड़ी, टेलीफोन और बदलते आधुनिक जीवन के शुरुआती दृश्य भी दिखाई देते हैं. नादीन ले प्रिंस द्वारा पुनर्जीवित हवेली और जगन्नाथ सिंघानिया हवेली प्रमुख आकर्षण हैं. वहीं चूरू में सुराना की हवेली, सेठ कन्हैयालाल बागला की हवेली, सेठानी का जोहड़ और टकनेतों की छतरी जैसी विरासतें मौजूद हैं. दोनों कस्बों में हेरिटेज वॉक और विरासत आधारित पर्यटन को बढ़ाया जा सकता है.

मंडावा और नवलगढ़ की तरह शेखावाटी के दूसरे कस्बों को भी पर्यटन के नक्शे पर लाने की जरूरत है. केवल प्रसिद्ध हवेलियों को केंद्र बनाकर पर्यटन विकसित करने के बजाय बिसाऊ की मूक रामलीला, महनसर की स्वर्ण सज्जा, रामगढ़ के मंदिर और जोहड़, चूरू की छतरियां तथा फतेहपुर की चित्रकला को एक साझा विरासत सर्किट से जोड़ा जा सकता है. इससे पर्यटकों का ठहराव बढ़ेगा और स्थानीय गाइड, हस्तशिल्प, खानपान, परिवहन तथा छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को भी आर्थिक अवसर मिल सकते हैं.

शेखावाटी के 14 ऐतिहासिक कस्बों के हवेली समूह को यूनेस्को की संभावित विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है. इस सूची में मंडावा और नवलगढ़ के साथ बिसाऊ, चिड़ावा, महनसर, फतेहपुर, रामगढ़, चूरू, झुंझुनूं सहित अन्य कस्बे भी शामिल हैं. संभावित सूची में शामिल होना विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा नहीं है. इसके बाद संरक्षण, प्रबंधन और नामांकन की प्रक्रिया के अलग-अलग चरण होते हैं. इस अवसर का उपयोग स्थानीय प्रशासन, पर्यटन विभाग, इतिहासकारों और नागरिक समितियों को मिलकर करना चाहिए.

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September 27, 2026, 09:25 IST

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