IPS Anil Kumar Success Story: डॉक्टर थे ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ IPS अनिल कुमार, शंभूपुर कांड की 2 मासूम अनाथ बच्चियों के लिए बने मसीहा

Last Updated:September 27, 2026, 08:51 IST
IPS Anil Kumar Success Story: शंभूपुर गोलीबारी में अनाथ हुईं दो मासूम बच्चियों को आजमगढ़ के एसएसपी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट आईपीएस डॉ. अनिल कुमार ने गोद लेने का ऐलान किया है. पढ़िए सरकारी स्कूल से पढ़कर डॉक्टर और फिर यूपीएससी क्रैक करके आईपीएस बनने वाले इस जांबाज अधिकारी की पूरी कहानी.IPS Anil Kumar Success Story: आईपीएस अनिल कुमार दादा की इच्छा का मान रखने के लिए डॉक्टर बने थे
नई दिल्ली (IPS Anil Kumar Success Story). उत्तर प्रदेश पुलिस अपने सख्त तेवर और अपराधियों के खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन के लिए जानी जाती है. लेकिन जब बात इंसानियत और दरियादिली की आती है तो खाकी का संवेदनशील चेहरा भी देखने को मिलता है. आजमगढ़ के SSP और तेजतर्रार आईपीएस डॉ. अनिल कुमार अपनी बहादुरी के साथ-साथ एक बेहद नेक काम के चलते चर्चा में हैं. हाल ही में शंभूपुर गांव में हुए दहला देने वाले गोलीबारी कांड के बाद 2 मासूम बच्चियां अनाथ हो गईं. ऐसे मुश्किल वक्त में इन बच्चियों के सिर पर साया बनकर खड़े हुए एसएसपी अनिल कुमार ने इन्हें गोद लेने का बड़ा फैसला किया है.
इस घटना ने सबका दिल झकझोर दिया है. आजमगढ़ में अरविंद सिंह नामक शख्स ने खौफनाक कदम उठाते हुए अपनी ही पत्नी, बेटे और घर पर पूजा कराने आए 2 पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और जवाबी कार्रवाई करते हुए मुठभेड़ में मुख्य आरोपी को ढेर कर दिया. इस खूनी खेल के बाद आरोपी की 2 नन्ही बेटियां (11 महीने और 11 साल की) अनाथ हो गईं. मां का साया पहले ही उठ चुका था. पिता के कुकर्मों और एनकाउंटर के बाद वे दुनिया में अकेली रह गईं. ऐसे में IPS अनिल कुमार ने इन मासूमों की जिम्मेदारी उठाने का बीड़ा लिया है.
बच्चियों के भविष्य के लिए आगे आया खाकी परिवार
शंभूपुर गोलीबारी की इस वीभत्स घटना के बाद बच्चियां दुनिया में अकेली रह गईं तो आजमगढ़ के SSP डॉ. अनिल कुमार देवदूत बनकर सामने आए. उन्होंने बच्चियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अपनी 1 महीने की सैलरी फिक्स डिपॉजिट के रूप में जमा करने की घोषणा की. SSP की पहल से प्रेरित होकर आजमगढ़ पुलिस महकमे के अन्य कर्मियों ने भी बच्चियों की मदद के लिए अपनी 1 दिन की सैलरी देने का फैसला किया. पुलिस की मानवीय पहल की सराहना हो रही है. इससे पता चलता है कि खाकी सिर्फ कानून का डंडा चलाना नहीं जानती. जरूरत पड़ने पर मां-बाप का साया बनकर बच्चों की ढाल भी बन सकती है.
सरकारी स्कूल से तय किया डॉक्टर बनने का सफर
मूल रूप से राजस्थान के झुंझुनूं जिले के रहने वाले डॉ. अनिल कुमार का शुरुआती जीवन काफी संघर्षों से भरा रहा है. उनके पिता श्री Sharwan सरकारी शिक्षक थे. अपनी शुरुआती शिक्षा के दौरान उन्होंने गांव के ही सरकारी स्कूल में जमीन पर बैठकर पढ़ाई की. अपनी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने स्कूली पढ़ाई में शानदार मुकाम हासिल किया. इसके बाद उन्होंने मेडिकल की तरफ कदम बढ़ाया और डॉक्टर संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की. पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली के नामी हॉस्पिटल में बतौर जूनियर डॉक्टर अपनी सेवाएं भी दीं.
मेडिकल कॉलेज के सीनियर बने यूपीएससी क्रैक करने की सबसे बड़ी प्रेरणा
डॉक्टर बनने के बाद भी अनिल कुमार के मन में देश और समाज के लिए कुछ बड़ा करने की ललक थी. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जिस मेडिकल कॉलेज से उन्होंने MBBS किया, वहां उनके कई सीनियर UPSC परीक्षा पास करके IAS, IPS और IFS बने. अपने सीनियर्स को प्रशासनिक सेवा में सफलता हासिल करते देख अनिल कुमार के मन में भी सिविल सेवा परीक्षा पास करने का जुनून सवार हो गया. उनकी बहन ने भी उनके नक्शेकदम पर चलते हुए प्रशासनिक सेवा में रहकर देश की सेवा की. अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने मेडिकल का सफेद कोट छोड़कर प्रशासनिक सेवा की राह चुनी.
यूपीएससी क्रैक कर बने 2016 बैच के आईपीएस
डॉ. अनिल कुमार ने अपनी कठोर मेहनत के बल पर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की. उन्होंने यूपीएससी सीएसई में 613वीं रैंक हासिल की. वे 2016 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. उनका आईडी नंबर: 20161613 है. 19 दिसंबर 2016 को उनकी आधिकारिक तौर पर पुलिस सेवा में भर्ती हुई. अपनी बेहतरीन कार्यकुशलता के बल पर उन्होंने 18 सितंबर 2025 को आजमगढ़ में बतौर एसएसपी (SP Azamgarh) का कार्यभार संभाला. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन्होंने 12वीं में 90 प्रतिशत अंक हासिल किए थे. वह अपने दादा की इच्छा का मान रखने के लिए डॉक्टर बने थे.
यूपी पुलिस के खूंखार ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’
अपनी कार्यशैली और सख्त तेवरों के लिए मशहूर डॉ. अनिल कुमार को उत्तर प्रदेश पुलिस का ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ कहा जाता है. आईपीएस अफसर के तौर पर अपने करियर के दौरान वे कई बड़े और खूंखार अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर चुके हैं. उनके करियर के कई ऑपरेशन बेहद चर्चित रहे हैं. साहसिक सेवाओं के लिए उन्हें शासन और प्रशासन कई बड़े पदकों से नवाज चुका है. अब तक उन्हें डीजीपी के सिल्वर डिस्क (26/01/2021), डीजीपी के गोल्ड डिस्क (26/01/2023) और डीजीपी के प्लेटिनम डिस्क (15/08/2025) से सम्मानित किया जा चुका है.
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Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is kno…
September 27, 2026, 08:51 IST



