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खुशी धीमान ने सोशल मीडिया से ट्रेनिंग लेकर ₹250 में वेस्ट मटेरियल से गुलदस्ते बनाने का शुरू किया बिजनेस, खूब मिल रहे ऑर्डर

सहारनपुर: सोशल मीडिया के इस दौर में नया स्टार्टअप करना बेहद आसान हो गया है. सहारनपुर के हसनपुर की रहने वाली 24 वर्षीय खुशी धीमान की जो की ग्रेजुएशन करने के बाद एक प्राइवेट कंपनी में जॉब कर रही है. खुशी ने सोचा कि जॉब के साथ-साथ क्यों ना एक ऐसा काम किया जाए जिससे उसके घर का खर्च अच्छे से चल सके. खुशी बताती है कि 2015 में उनके पिता की मौत हो गई थी उसके बाद घर की जिम्मेदारी उनकी माता और उनके कंधों पर आ गई. उनकी माता ने संघर्ष करने के बाद उनको पढ़ा लिखाया और अब खुशी अपनी माता का हाथ बंटा रही है और अपने छोटे भाई बहनों को आगे बढ़ा रही है.

खुशी ने वेस्ट मटेरियल से शुरू किया बिजनेस

खुशी ने प्राइवेट जॉब के साथ-साथ घर पर रहकर वेस्ट मटेरियल और रिबन से गुलदस्ता तैयार करना शुरू किया. शुरुआत में एक दो लोगों को गुलदस्तो को गिफ्ट किया तो लोगों को यह बहुत पसंद आए और धीरे-धीरे खुशी को ऑर्डर मिलने लगे. उसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक आईडी बनाई और उस आईडी के माध्यम से उनको अच्छे खासे आर्डर मिल रहे हैं. खुशी ने इसकी ट्रेनिंग इंस्टाग्राम पर आने वाली उन वीडियो से ली और अब इसको अपना एक बिजनेस बना लिया. खुशी का कहना है कि धीरे-धीरे ऑर्डर बढ़ रहे हैं और अब वह प्राइवेट जॉब को छोड़कर इसी काम को करेंगी. अभी भी इसमें एक अच्छी इनकम उनको मिल रही है खुशी इस तरह का काम कर न सिर्फ उन लड़कियों को प्रेरणा दे रही है जो घर बैठे भी हजारों रुपए आसानी से कमा सकती है बल्कि आत्मनिर्भरता की एक अलग कहानी भी लिख रही है.

सोशल मीडिया से ली ट्रेनिंग और शुरू कर दिया मात्र ₹250 से बिजनेस

खुशी धीमान ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि मुझे सोशल मीडिया से ये आइडिया मिला, मैंने पहले खुद से बनाना सीखा, फिर उसके बाद मैंने सोचा कि जब मेरे अंदर ये टैलेंट है तो मैं शायद इसको दिखा सकती हूँ. तो फिर मैंने तुरंत एक आईडी बनाई, मैंने आईडी पे ये सब चीज़ें पोस्ट कीं, उसके बाद से मेरे को ऑर्डर आने लगे और अब थोड़ा-थोड़ा करके बिजनेस बढ़ रहा है और भगवान की कृपा से अगर यही चलता रहा तो बहुत अच्छा हो जाएगा, फिर मुझे जॉब नहीं करनी पड़ेगी. मैं अभी एक प्राइवेट कंपनी में जॉब कर रही हूं, मुझे अभी छह महीने हुए, क्योंकि मैंने अभी रिसेंटली ही जॉइन किया था, तो वहां पे मुझे अभी आठ से दस हज़ार तक के मिल जाता है.

ऐसे तैयार करती हैं गुलदस्ता

इन सबको बनाने के लिए मैंने रिबन काट के, जला कर के फिर उनको बना रखा है, फिर उसके बाद इसको फोल्ड करके ही रिबन बनते हैं, और ये रिबन जो आते हैं मैंने स्टार्टिंग अपना तीन सौ ढाई सौ रुपये से की थी. ऑर्डर की बात करें तो ऑर्डर मुझे इंस्टाग्राम के माध्यम से आते हैं क्योंकि मैंने अपनी आईडी बना रखी है द गिफ्टरी नाम से, उस पे मेरे को ऑर्डर मिलते हैं और कुछ मेरे नॉन में भी हैं जो मुझसे ऑर्डर बनवाते हैं और मैंने अभी तक के ग्यारह-बारह ले चुकी हूँ मैं अपने ऑर्डर और ये जो एक बुके आता है आपका, ये तीन सौ रुपये का बुके आता है, पाँच फ्लोजीज़ का. एक बुके को बनाने में सौ से डेढ़ सौ रुपये का खर्चा आ जाता है. रिव्यू तो अच्छा ही आता है हम खुद से भी बोलते हैं कि मतलब कस्टमर एकदम से खुश हो जाता है. और मुझे लगता है कि मेरे पैसे वेस्ट नहीं हुए और कस्टमर बोलता है कि हाँ आपने बहुत अच्छा बनाया है, हमारे पैसे वेस्ट नहीं हुए, मतलब वो कस्टमर सैटिस्फैक्शन हमें मिल जाता है, हम खुद भी खुश हो जाते हैं और हमारा कस्टमर भी. मार्केट में और बुके आते हैं, वो देखा जाता है कि देने के बाद वो खराब हो जाते हैं, तो लोग उनको फेंक देते हैं, लेकिन ये हमारे द्वारा तैयार किए गए बुके हैं, ये लोग अपने घरों में आराम से हमेशा के लिए रख सकते हैं.

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