earbuds | earbuds side effect | earbuds ke nuksan | रोज इअरबड्स लगाकर सुनते हैं गाने? हो जाएं सावधान, पता भी नहीं चलेगा और कान हो जाएगा खराब

Last Updated:September 26, 2026, 14:17 IST
Kanpur News: इअरबड्स का लंबे समय तक तेज आवाज में इस्तेमाल कानों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, जिससे सुनने की क्षमता से जुड़ी नाजुक कोशिकाओं को स्थायी नुकसान हो सकता है. ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. ओमवीर सिंह के अनुसार, एक बार ये कोशिकाएं खराब हो जाएं तो इन्हें ठीक करना संभव नहीं होता.
कानपुर: आज के समय में इअरबड्स लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. सफर हो, ऑफिस हो, जिम हो या घर पर आराम का समय, लोग घंटों कान में इअरबड्स लगाए रहते हैं. कोई म्यूजिक सुनता है तो कोई लंबी कॉलिंग करता है. शुरुआत में यह आदत बिल्कुल सामान्य लगती है, लेकिन लंबे समय तक तेज आवाज में इअरबड्स का इस्तेमाल कानों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. लगातार तेज आवाज कान के अंदर मौजूद सुनने की क्षमता से जुड़ी बेहद नाजुक कोशिकाओं को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकती है.
आवाज कान तक पहुंचेगी, लेकिन समझ नहीं आएगीईएनटी विशेषज्ञ डॉ. ओमवीर सिंह बताते हैं कि कान खराब होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि आवाज बिल्कुल सुनाई देना बंद हो जाए. कई मामलों में आवाज कान तक पहुंचती रहती है, लेकिन उसे समझने में परेशानी होने लगती है. खासकर भीड़ या शोर वाली जगह पर सामने वाला व्यक्ति बोलता रहता है, आवाज भी सुनाई देती है, लेकिन शब्द साफ समझ नहीं आते. धीरे-धीरे यह समस्या बढ़ सकती है और रोजमर्रा की बातचीत भी प्रभावित होने लगती है.
डॉ. ओमवीर सिंह के मुताबिक, कान के अंदर कोक्लीया नाम का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. इसमें मौजूद हेयर सेल्स आवाज को सुनने में मदद करती हैं. तेज आवाज और लंबे समय तक शोर के संपर्क में रहने से इन कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि एक बार ये कोशिकाएं स्थायी रूप से खराब हो जाएं तो इन्हें दोबारा ठीक करना संभव नहीं होता.
एक बार नुकसान हुआ तो हियरिंग एड ही सहाराडॉक्टर के अनुसार, सुनने की क्षमता अगर स्थायी रूप से खराब हो गई तो इसे पहले जैसा करने का कोई आसान इलाज नहीं है. ऐसी स्थिति में मरीज को आवाज सुनने और बातचीत समझने में मदद के लिए हियरिंग एड का सहारा लेना पड़ सकता है. इसलिए कान खराब होने के बाद इलाज खोजने से बेहतर है कि शुरुआत से ही कानों को सुरक्षित रखा जाए.
60 प्रतिशत से ज्यादा वॉल्यूम न रखेंइअरबड्स से होने वाले नुकसान का सबसे बड़ा कारण तेज आवाज और लगातार इस्तेमाल है. कई लोग आसपास के शोर को दबाने के लिए मोबाइल का वॉल्यूम काफी बढ़ा देते हैं. इससे कान पर पड़ने वाला दबाव और बढ़ जाता है. विशेषज्ञों की सलाह है कि इअरबड्स या हेडफोन का वॉल्यूम सामान्य तौर पर 60 प्रतिशत से कम रखा जाए. लगातार कई घंटे सुनने के बजाय बीच-बीच में कानों को आराम देना भी जरूरी है.
अगर इअरबड्स लगाने के बाद कान में घंटी या सीटी जैसी आवाज आने लगे, कुछ समय के लिए आवाज दबी हुई महसूस हो, टीवी या मोबाइल का वॉल्यूम पहले से ज्यादा रखना पड़े या भीड़ में लोगों की बातें समझने में परेशानी होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
ऐसे बचा सकते हैं अपने कानइअरबड्स का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसकी आदत को नियंत्रित करना जरूरी है. वॉल्यूम 60 प्रतिशत से नीचे रखें. लगातार लंबे समय तक इअरबड्स न लगाएं और बीच-बीच में कानों को आराम दें. शोर वाली जगह पर वॉल्यूम बढ़ाने के बजाय अच्छी क्वालिटी के ऐसे हेडफोन का इस्तेमाल करें जो बाहरी शोर को कम कर सकें. सोते समय इअरबड्स लगाकर म्यूजिक सुनने की आदत से भी बचना चाहिए.
सबसे जरूरी बात यह है कि कान में समस्या के शुरुआती संकेत मिलते ही ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराएं. सुनने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने पर अक्सर लोग इसे उम्र या सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन समय रहते जांच और सावधानी बरतने से आगे होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है.
About the Authorआर्यन सेठ
आर्यन सेठ, Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
और पढ़ेंLocation :
Kanpur Nagar,Uttar Pradesh
First Published :
September 26, 2026, 14:17 IST
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



