Pitru Paksha 2026: श्राद्ध पक्ष में चींटियों को क्यों खिलाया जाता है दाना? जानें कीड़ी-नगरा से परंपरा

Last Updated:September 29, 2026, 14:46 IST
Pitru Paksha Tradition: श्राद्ध पक्ष में राजस्थान के कई इलाकों में कीड़ी-नगरा की परंपरा निभाई जाती है. इस परंपरा के तहत चींटियों को दाना या भोजन खिलाया जाता है और इसे पितरों के नाम पुण्य से जोड़कर देखा जाता है. लोकमान्यता के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में जीवों को अन्न देना पुण्यकारी माना जाता है. यह परंपरा प्रकृति, जीवदया और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा से जुड़ी लोक-संस्कृति की झलक दिखाती है.
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जालौर: चींटियों को दाना, पितरों के नाम पुण्य श्राद्ध पक्ष में निभाई जाती है कीड़ी-नगरा की खास परंपरा, श्राद्ध पक्ष में लोग अपने पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण, पूजा और दान-पुण्य करते हैं. इसी दौरान जालोर जिले के निम्बावास गांव में आस्था और जीवदया से जुड़ी एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है. यहां स्थित कीड़ी नगरा में श्रद्धालु चींटियों को अन्न अर्पित करते हैं और इसे पितरों के निमित्त किए जाने वाले पुण्य कार्य से जोड़कर देखते हैं.
भीनमाल से करीब 13 किलोमीटर दूर निम्बावास गांव में स्थित यह कीड़ी नगरा लगभग 150 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ बताया जाता है. यहां बड़ी संख्या में चींटियां प्राकृतिक रूप से अपना बसेरा बनाए हुए हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार यहां पाई जाने वाली चींटियां सामान्य तौर पर दिखाई देने वाली चींटियों की तुलना में आकार में बड़ी होती हैं. इसी वजह से यह स्थान आसपास के लोगों के बीच खास पहचान रखता है.
पितरों के निमित्त किए गए दान का फल प्राप्त होताश्राद्ध पक्ष के दौरान यहां आने वाले श्रद्धालु चींटियों के लिए आटा, शक्कर और अनाज डालते हैं. स्थानीय मान्यता है कि इस तरह जीवों को अन्न देने से पुण्य मिलता है और पितरों के निमित्त किए गए दान का फल प्राप्त होता है. हालांकि यह धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपरा से जुड़ी मान्यता है.
श्रद्धा के अनुसार चींटियों के लिए खाद्य सामग्री अर्पित करते स्थानीय निवासी शैतान सिंह भाटी ने लोकल18 को जानकारी दी की. यह कीड़ी नगरा भीनमाल से करीब 13 किलोमीटर दूर निम्बावास गांव में स्थित है और लगभग 150 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ है. यहां जो चींटियां पाई जाती हैं, वह सामान्य चींटियों से आकार में बड़ी होती हैं. मान्यता है कि यहां चींटियों को आटा, शक्कर और अनाज का दान करने से बहुत पुण्य मिलता है. अमावस्या और पूनम के दिन यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है और मेले जैसा माहौल बन जाता है. जालोर, सिरोही और पाली के अलावा गुजरात से भी लोग यहां पहुंचते हैं. लोग आस्था के साथ यहां दान करते हैं और इसे पुण्य का काम मानते हैं. कीड़ी नगरा में अमावस्या और पूनम के दिन विशेष चहल-पहल देखने को मिलती है. इन मौकों पर आसपास के जिलों के साथ गुजरात से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं. लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार चींटियों के लिए खाद्य सामग्री अर्पित करते हैं.
जीवों के लिए दाना डालने की भावना भी जुड़ीइस परंपरा में जीवों के लिए दाना डालने की भावना भी जुड़ी हुई है. छोटे-छोटे जीवों के लिए अन्न रखना लोगों के लिए सेवा और दया का काम माना जाता है. श्राद्ध पक्ष में जब लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उसी दौरान चींटियों को भोजन देने की यह परंपरा भी निभाई जाती है. निम्बावास का कीड़ी नगरा इस तरह स्थानीय आस्था, जीवदया और पुरानी परंपरा से जुड़ा एक अलग पहचान वाला स्थान बना हुआ है. यहां पहुंचने वाले लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार चींटियों को अन्न अर्पित करते हैं और पितरों के नाम पुण्य की कामना करते हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Jalor,Rajasthan
First Published :
September 29, 2026, 14:46 IST



