बच्चे के कान में है दर्द तो न डालें सरसों का तेल, डॉक्टर ने बताया क्या करना है सबसे पहले

अंबाला: बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर माता-पिता अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर चिंतित रहते हैं. खासकर बच्चों के कान में दर्द, कान बहना या सुनने से जुड़ी परेशानी सामने आए तो परिवार तुरंत घरेलू नुस्खे आजमाने लगते हैं. कई घरों में आज भी कान में सरसों का तेल डालने की परंपरा है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक बिना चिकित्सकीय सलाह के कान में किसी भी तरह का तेल या ड्रॉप डालना नुकसानदायक हो सकता है.
लेटाकर दूध पिलाने की आदत से बचें, बच्चे को गोद में बैठाकर ही पिलाएं दूध
वही इस बारे में अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा ने लोकल 18 को बताया कि कानों की देखभाल में कुछ सामान्य सावधानियां बेहद जरूरी हैं. उन्होंने खास तौर पर बच्चों को दूध पिलाने के तरीके पर ध्यान देने की सलाह दी. उनके मुताबिक छोटे बच्चों को लेटाकर दूध पिलाने की आदत परेशानी का कारण बन सकती है. इसलिए माताओं को बच्चे को गोद में लेकर बैठकर ही दूध पिलाना चाहिए.
बच्चों के कानों की सेहत को लेकर बरतें सावधानी
डॉ. वर्मा के अनुसार, छोटे बच्चों में कान से जुड़ी समस्याओं को लेकर माता-पिता को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए. बच्चे को दूध पिलाते समय उसकी सही पोजीशन का ध्यान रखना जरूरी है. उनका कहना है कि बच्चे को लेटाकर दूध पिलाने के बजाय बैठकर दूध पिलाने की आदत अपनानी चाहिए.
माताओं के खानपान पर भी दें ध्यान
उन्होंने माताओं के खानपान पर भी ध्यान देने की बात कही. हालांकि, बच्चे के कान की किसी भी समस्या का कारण केवल खानपान को मानकर घरेलू उपचार करना उचित नहीं है. समस्या होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है.
नहाते समय कान में पानी डालना पड़ सकता है भारी
वही डॉक्टर जितेंद्र वर्मा ने कानों की देखभाल से जुड़ी एक आम आदत को लेकर भी सावधान किया. उन्होंने कहा कि नहाते समय जानबूझकर कानों में पानी डालना या पानी के थपेड़े मारना ठीक नहीं है. कई लोग नहाते समय कान साफ करने के लिए पानी अंदर तक पहुंचाते हैं, लेकिन इससे परेशानी बढ़ सकती है. उनके मुताबिक छोटी लगने वाली ऐसी आदतें लंबे समय में कानों से जुड़ी दिक्कतों का कारण बन सकती हैं. इसलिए कानों को अनावश्यक रूप से पानी और दूसरी चीजों के संपर्क में लाने से बचना चाहिए.
कान में सरसों का तेल डालने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी
कान में तेल डालने की परंपरा को लेकर भी डॉ. वर्मा ने सावधानी बरतने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि पुराने समय में लोग कान में तेल डालते थे, लेकिन आज किसी भी तरह का तेल या ड्रॉप बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
कान दर्द या संक्रमण में खुद से न डालें ईयर ड्रॉप
खासकर अगर कान में दर्द, कान बहना, चोट, संक्रमण या सुनाई देने में कमी जैसी समस्या हो तो खुद से तेल या ईयर ड्रॉप डालने के बजाय डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. बाजार में मिलने वाली किसी भी ईयर ड्रॉप का इस्तेमाल भी चिकित्सकीय सलाह के बाद ही करना बेहतर है.
बार-बार खांसी जुकाम को न करें नजरअंदाज
डॉ. वर्मा ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ कान की परेशानियों में खांसी, जुकाम और पुराना नजला भी भूमिका निभा सकता है. इसलिए बार-बार होने वाली ऐसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. उन्होंने बताया कि अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में पंचकर्म की सुविधा भी उपलब्ध है, जहां लोग चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार थेरेपी का लाभ ले सकते हैं.
बच्चों के कान में घरेलू नुस्खे आजमाने से पहले कराएं जांच
डॉक्टर की सलाह का सीधा मतलब यही है कि कान बेहद संवेदनशील अंग है. इसमें घरेलू नुस्खे आजमाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है. खासकर बच्चों के मामले में कान में तेल, पानी या कोई ड्रॉप डालने के बजाय पहले चिकित्सकीय जांच कराना सुरक्षित कदम है.



