health care tips | kidni disease | health tips | अगर ये बुरी आदतें हैं तो जल्दी छोड़ दीजिए, वरना चुपचाप किडनी कर देंगी खराब, डॉक्टर ने दी चेतावनी

Last Updated:October 01, 2026, 18:21 IST
Health News: गुर्दे की बीमारी के पीछे कई कारण हो सकते हैं. उन्होंने खासतौर पर उन लोगों को सावधान रहने की सलाह दी, जो नौकरी, यात्रा या किसी अन्य वजह से लंबे समय तक पेशाब रोककर रखते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, डायबिटीज में लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है.
अंबाला: बदलती लाइफस्टाइल और खानपान के बीच किडनी की सेहत को लेकर भी लोगों की चिंता बढ़ रही है. खासकर डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं को किडनी पर असर डालने वाले प्रमुख जोखिम कारकों में माना जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, डायबिटीज में लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं हाई बीपी भी किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है.
इस बारे में लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में कार्यरत आयुर्वेदिक डॉक्टर जितेंद्र वर्मा ने बताया कि गुर्दे की बीमारी के पीछे कई कारण हो सकते हैं. उन्होंने खासतौर पर उन लोगों को सावधान रहने की सलाह दी, जो नौकरी, यात्रा या किसी अन्य वजह से लंबे समय तक पेशाब रोककर रखते हैं. उनके अनुसार आयुर्वेद में शरीर के प्राकृतिक वेगों को रोकने से बचने पर जोर दिया जाता है.
बीमारियों को नियंत्रित रखना जरूरीडॉ. जितेंद्र वर्मा ने बताया कि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दोनों ही किडनी के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं. आधुनिक चिकित्सा में भी डायबिटीज और हाई बीपी को क्रॉनिक किडनी डिजीज के प्रमुख कारणों में माना जाता है, इसलिए इन दोनों बीमारियों को नियंत्रित रखना किडनी की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है. डॉक्टर ने बताया कि पेशाब से जुड़ी समस्या या संक्रमण को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का समय पर इलाज न हो तो यह किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि संक्रमण बढ़ने पर किडनी को नुकसान हो सकता है.
जरूर लें डॉक्टर की सलाहवहीं डॉ. वर्मा ने पानी पीने को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही है. हालांकि किडनी की पथरी से बचाव में पर्याप्त पानी पीना महत्वपूर्ण माना जाता है और पानी की मात्रा व्यक्ति की बीमारी, मौसम और शारीरिक गतिविधि के अनुसार अलग हो सकती है. उन्होंने बताया कि किडनी फेलियर या दूसरी स्थितियों में डॉक्टर तरल पदार्थ की मात्रा सीमित भी कर सकते हैं, इसलिए किडनी के मरीज को पानी की मात्रा अपने डॉक्टर की सलाह से तय करनी चाहिए.
डाइट में किया जा सकता है बदलावडॉक्टर जितेंद्र वर्मा ने किडनी की बीमारी में खानपान पर ध्यान देने की सलाह दी है. उन्होंने बताया कि कुछ खाद्य पदार्थों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत होती है. हालांकि किडनी रोग में हर मरीज का डाइट प्लान एक जैसा नहीं होता. उन्होंने कहा कि बीमारी की स्टेज, पोटैशियम, फॉस्फोरस, सोडियम और प्रोटीन के स्तर के आधार पर डाइट में बदलाव किया जाता है, इसलिए आपको ज्यादा गुर्दे की समस्या में खीरा, टमाटर, दही, चावल या दाल जैसी चीजों का प्रयोग बंद करना चाहिए और इसे लेकर डॉक्टर से भी सलाह ले सकते हैं.
पत्थरचट्टा को लेकर क्या बताए फायदे?डॉ. वर्मा ने बताया कि आयुर्वेद में किडनी और मूत्र संबंधी समस्याओं के संदर्भ में गोक्षुर, पुनर्नवा, वरुण और गिलोय जैसी औषधियों का उल्लेख मिलता है. उन्होंने पत्थरचट्टा का भी जिक्र किया और किडनी रोगियों को किसी भी जड़ी-बूटी या आयुर्वेदिक दवा का इस्तेमाल खुद से शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेने की बात कही, क्योंकि किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर दवाओं और सप्लीमेंट्स का असर अलग हो सकता है.
किडनी की बीमारी शुरुआती दौर में कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के भी रह सकती है. ऐसे में डायबिटीज, हाई बीपी या परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास रखने वाले लोगों के लिए समय-समय पर जांच कराना महत्वपूर्ण है. डॉक्टर की सलाह, ब्लड-यूरिन टेस्ट और बीमारी के अनुसार सही डाइट को अपनाकर किडनी की सेहत पर नजर रखी जा सकती है.
About the Authorआर्यन सेठ
आर्यन सेठ, Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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October 01, 2026, 18:21 IST
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



