वनडे में बने 811 रन… कहां है बॉल और बैट कॉन्टेस्ट, क्या सिर्फ ‘आंकड़ों का खेल’ बनकर रह गया है वनडे क्रिकेट

Last Updated:October 02, 2026, 11:55 IST
811 runs made ind vs wi 2nd odi: भारत और वेस्टइंडीज के बीच गुवाहाटी में खेले गए दूसरे वनडे में 811 रन बने, जिससे गेंदबाजों की भूमिका मूक दर्शक जैसी रह गई. कप्तान शुभमन गिल के नाबाद 223 और रोहित शर्मा के 101 रनों की बदौलत बने इस विशाल स्कोर ने मैच को बोरिंग और एकतरफा बना दिया. दिग्गजों का मानना है कि सपाट पिचों और टी-20 के बढ़ते प्रभाव के कारण वनडे क्रिकेट आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है.अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा वनडे क्रिकेट.
नई दिल्ली. गुवाहाटी में भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेला गया दूसरा वनडे मुकाबला किसी क्रिकेट मैच से ज्यादा बल्लेबाजों के अभ्यास सत्र जैसा लगा. इस मुकाबले में गेंदबाजों की स्थिति सिर्फ मूक दर्शकों जैसी रह गई, जहां दोनों टीमों की ओर से कुल मिलाकर 811 रन बनाए गए. एक जमाना था जब वनडे क्रिकेट में इतने रन बनना किसी ऐतिहासिक घटना की तरह जश्न की वजह बनता था, लेकिन आज के दौर में यह महज़ एक और आम मैच बनकर रह गया है. इस तरह के मुकाबलों ने अब दर्शकों में रोमांच पैदा करने के बजाय उन्हें एक और थका देने वाले रन-फेस्ट से ऊबने पर मजबूर कर दिया है, जिसे रवि शास्त्री ने कमेंट्री के दौरान सटीक रूप से ‘नेशनल हाईवे’ पिच करार दिया.
इस रन-बरसात के बीच भारतीय कप्तान शुभमन गिल (Shubman Gill) की नाबाद 223 रनों की पारी बेहद शानदार रही, जिसमें उनकी बेहतरीन टाइमिंग, सटीक प्लेसमेंट और रन बनाने की कभी न खत्म होने वाली भूख ने उनकी क्लास का परिचय दिया. ऐसा ही नज़ारा रोहित शर्मा के सहज 101 रनों की पारी में भी देखने को मिला. इसके अलावा वेस्टइंडीज की ओर से भी तीन शतक जड़े गए. इन बल्लेबाजों को अपनी कला दिखाने के लिए असली चुनौतियों की जरूरत थी, लेकिन उन्हें न तो पिच से कोई मदद मिली और न ही गेंदबाजों की तरफ से कोई कड़ा मुकाबला मिला.
बल्ले और गेंद के बीच खत्म होता संतुलनभारत के पूर्व मीडियम-पेसर और 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य मदन लाल (Madan Lal) ने इस एकतरफा मुकाबले पर टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में अपनी बेबाक राय रखते हुए कहा कि यह बेहद बोरिंग मैच था. पाटा विकेट पर 800 से ज्यादा रन बने और गेंदबाजों के लिए उसमें कुछ भी नहीं था. गेंदबाजों को भी कुछ ऐसा मिलना चाहिए जिसके दम पर वे मुकाबला कर सकें, क्योंकि तभी बल्ले और गेंद के बीच असली जंग देखने को मिलेगी. उनके मुताबिक एक आदर्श वनडे मैच वह होता है जहां प्रत्येक पारी का स्कोर 280 रन के आसपास रहे, क्योंकि दर्शक वही मुकाबला देखना पसंद करते हैं जहां दोनों पक्षों के बीच कड़ा संघर्ष हो.
सपाट पिचों और टी-20 का बढ़ता प्रभावमदन लाल का मानना है कि इसके लिए पिचों के क्यूरेटरों को इन सपाट पिचों में कुछ जान डालनी होगी, हालांकि उन्हें ऐसा होने की ज्यादा उम्मीद नहीं है. वहीं, दिल्ली के पूर्व तेज गेंदबाज संजीव शर्मा इस प्रवृत्ति के पीछे टी-20 क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव को मुख्य वजह मानते हैं. उनका कहना है कि टी-20 में टीमें आसानी से 200 से ज्यादा रन बना लेती हैं और बल्लेबाज उसी आश्वस्ति व आत्मविश्वास को 50 ओवर के फॉर्मेट में भी ले आ रहे हैं, जिसके चलते आने वाले समय में और भी टीमें वनडे में 400 से ज्यादा के स्कोर को आसानी से हासिल करती हुई नजर आएंगी.
गेंदबाजी की गुणवत्ता पर मंडराता खतराइस तरह के बेतहाशा स्कोर वाले मैचों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि लंबे समय में यह ट्रेंड गेंदबाजी की गुणवत्ता को कमजोर कर रहा है. संजीव शर्मा इस बात से पूरी तरह सहमत नजर आए और उन्होंने कहा कि कुलदीप यादव को छोड़कर दोनों में से किसी भी टीम के पास गेंदबाजी विभाग में कोई मैच-विजेता नहीं था. हालांकि भारत का गेंदबाजी आक्रमण थोड़ा कमजोर जरूर था, लेकिन वेस्टइंडीज की गेंदबाजी का स्तर तो बेहद खराब था.
अस्तित्व के संकट से जूझता वनडे क्रिकेटकैलेंडर में टी-20 की भरमार के बीच आज वनडे क्रिकेट एक बड़े अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है. 50 ओवर के इस फॉर्मेट का सबसे बड़ा आकर्षण यही रहा है कि यह टी-20 की तुलना में मैच को समय देता है ताकि उसमें उतार-चढ़ाव आ सकें, कहानी बन सके और खेल खुलकर सांस ले सके. शुभमन गिल का इस फॉर्मेट में दूसरा दोहरा शतक रिकॉर्ड बुक्स में जरूर दर्ज हो जाएगा, लेकिन बिना किसी कड़े संघर्ष के बना कोई भी रिकॉर्ड सिर्फ आंकड़ों की गिनती बनकर रह जाता है.
About the AuthorKamlesh Raiचीफ सब एडिटर
कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…
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New Delhi,New Delhi,Delhi
First Published :
October 02, 2026, 11:55 IST



