‘देश में नहीं मिलता पहले जैसा सुकून’ अपने ही बयान पर घिरे संजय दत्त, अब मांगी माफी, बोले- गलत मतलब निकाला गया

Last Updated:October 05, 2026, 06:08 IST
देश में शांति वाले अपने विवादित बयान पर ट्रोल होने के बाद अब बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त ने अपनी सफाई पेश की है. उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और यह सिर्फ एक मजाक था. जानिए क्या है पूरा मामला!संजय दत्त ने विवादित पर तोड़ी चुप्पी (फोटो साभार-@shekhusuman)
नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त अपने एक हालिया बयान को लेकर विवादों में आ गए हैं. शेखर सुमन के चैट शो ‘शेखर टूनाइट’ के गांधी जयंती स्पेशल एपिसोड में संजय दत्त ने कहा था कि वह देश में और ज्यादा शांति चाहते हैं और अब उन्हें भारत में वैसी शांति महसूस नहीं होती है. उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर काफी बवाल मच गया था. अब इस पूरे विवाद पर संजय दत्त ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए सफाई पेश की है.
उन्होंने कहा है कि उनका मकसद किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना या अनादर करना बिल्कुल नहीं था.
शो पर दिए बयान पर संजय दत्त ने दी सफाई
संजय दत्त ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करके अपनी बात रखी. उन्होंने लिखा कि वह यह साफ करना चाहते हैं कि उनका इरादा किसी भी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था. उन्होंने बताया कि यह पूरी बातचीत एक स्क्रिप्टेड शो का हिस्सा थी. इसका मकसद केवल मनोरंजन और हल्का फुल्का मजाक करना था. अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए संजय दत्त ने कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से समझ लिया गया. उन्होंने बताया कि इस बातचीत के पीछे की भावना प्यार, भाईचारा और सद्भावना फैलाने की थी. यह ठीक वैसा ही था जैसा उनकी फिल्म मुन्ना भाई में गांधीगिरी के जरिए दिखाया गया था. अफसोस की बात है कि उनकी बातों को सही संदर्भ से बाहर निकालकर देखा गया. इसके अलावा एक्टर ने अपने इंस्टग्राप स्टोरी पर भी सफाई दी है.
I would like to clarify that it was never my intention to hurt, offend, or disrespect the sentiments of any individual, community, or institution.
My remarks were made in the context of a scripted conversation intended to be light-hearted and humorous. The spirit behind them was similar to the humour and satire seen in films like Munna Bhai, particularly the concept of ‘Gandhigiri,’ which was intended to convey a message of love, warmth, togetherness, and goodwill. Unfortunately, my words were interpreted outside of that intended context.



