Rajasthan

Agriculture: बारिश रूठी तो ग्वार बनी सहारा, किसानों को मिल रही अच्छी उपज, 6500 रुपए क्विंटल भाव दे रहा राहत

होमफोटोकृषि

बारिश ने दिया धोखा तो ग्वार बनी सहारा, 6500 तक भाव से नागौर के किसान खुश

Last Updated:October 06, 2026, 08:48 IST

Nagaur Guar Market Prices: कमजोर मानसून और बारिश के बीच लंबे अंतराल ने नागौर के किसानों की चिंता बढ़ाई, लेकिन ग्वार की फसल ने इस बार राहत दी है. नागौर क्षेत्र में करीब 50 से 55 प्रतिशत रकबे में ग्वार की बुवाई बताई जा रही है. अब खेतों में कटाई और फसल निकालने का काम तेज हो गया है. कई किसान 2 से 3 क्विंटल प्रति बीघा तक उत्पादन मिलने की बात कह रहे हैं. वहीं मंडियों में ग्वार के भाव करीब 6400 से 6500 रुपए प्रति क्विंटल चल रहे हैं. कम बारिश के बावजूद समय-समय पर मिली नमी से कई खेतों में फसल अच्छी स्थिति में पहुंची. अच्छे उत्पादन और भाव ने किसानों की उम्मीद बढ़ाई है. ग्वार का अवशेष पशुओं के चारे के रूप में भी काम आता है, जिससे खेती के साथ पशुपालन करने वाले किसानों को अतिरिक्त फायदा मिल रहा है.

कमजोर मानसून और बारिश के बीच लंबे अंतराल ने इस खरीफ सीजन में किसानों की चिंता बढ़ाई, लेकिन ग्वार की फसल ने राहत दी है. नागौर क्षेत्र में इस बार करीब 50 से 55 प्रतिशत रकबे में ग्वार की बुवाई होने की बात सामने आ रही है. अब खेतों में ग्वार की कटाई और फसल निकालने का काम तेजी से चल रहा है. कई जगह किसान परिवार सहित फसल समेट रहे हैं, जबकि बड़े खेतों में कृषि मशीनरी की मदद ली जा रही है.

शुरुआत में कम बारिश के कारण किसानों को ग्वार की फसल को लेकर चिंता थी. मानसून के दौरान बारिश पर्याप्त नहीं हुई और कई बार बारिश के बीच लंबा अंतराल भी रहा. इसके बावजूद अलग-अलग समय पर हुई बारिश से खेतों में फसल को जरूरत के मुताबिक नमी मिलती रही. यही वजह रही कि कम बारिश की स्थिति में भी कई खेतों में ग्वार की फसल अच्छी स्थिति में पहुंच गई और अब उत्पादन किसानों की उम्मीद के अनुरूप दिखाई दे रहा है.

2 से 3 क्विंटल प्रति बीघा तक उत्पादन किसानों के लिए इस समय सबसे बड़ी राहत बना हुआ है. किसानों के मुताबिक जिन खेतों में समय पर बारिश हुई और मिट्टी में नमी बनी रही, वहां ग्वार की फसल बेहतर रही है. हालांकि उत्पादन खेत की मिट्टी, बारिश की मात्रा, बुवाई के समय और मौसम पर निर्भर करता है. कई किसान 2 से 3 क्विंटल प्रति बीघा तक उत्पादन मिलने की बात कह रहे हैं, जिससे कमजोर मानसून के बावजूद उन्हें फसल से अच्छी उम्मीद बंधी है.

Add as Preferred Source on Google

ग्वार की फसल से इस बार किसानों को केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि बाजार भाव से भी राहत मिल रही है. मंडियों में ग्वार के भाव करीब 6400 से 6500 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास बताए जा रहे हैं. किसानों का कहना है कि खेती में बीज, जुताई, बुवाई, निराई-गुड़ाई, कटाई और फसल निकालने तक लगातार खर्च होता हैं. ऐसे में अच्छे भाव मिलने से लागत निकलने और कुछ आमदनी बचने की उम्मीद बढ़ गई है.

ग्वार की एक खासियत यह भी है कि कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसान इसे जोखिम कम करने वाली फसल के रूप में देखते हैं. सीमित पानी में भी ग्वार उत्पादन दे सकती है, हालांकि लगातार सूखा पड़ने या मौसम ज्यादा प्रतिकूल रहने पर उत्पादन प्रभावित हो सकता है. इस बार नागौर में बारिश की कमी के बावजूद फसल पूरी तरह चौपट नहीं हुई. यही कारण है कि जिन किसानों की दूसरी फसलों पर मौसम का असर पड़ा, उनके लिए ग्वार कुछ हद तक सहारा बनकर सामने आई है.

फसल तैयार होने के बाद अब गांवों में सुबह से खेतों में ग्वार की कटाई का काम शुरू हो जाता है. कहीं किसान और मजदूर हाथ से फसल काटकर ढेरियां बना रहे हैं, तो कहीं ट्रैक्टर और कृषि मशीनों से फसल निकालने का काम किया जा रहा है. कटाई के बाद ग्वार को साफ कर मंडी तक पहुंचाया जा रहा है. खेतों में दिखाई दे रही ग्वार की ढेरियां इस समय खरीफ सीजन के अंतिम चरण की तस्वीर दिखा रही हैं.

ग्वार किसानों के लिए दाने की बिक्री के साथ पशुपालन में भी उपयोगी है. फसल निकालने के बाद बचने वाला अवशेष पशुओं के चारे के काम आता है. नागौर में बड़ी संख्या में किसान खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं, इसलिए ग्वार की फसल से खेत पर ही चारे का अतिरिक्त संसाधन मिल जाता है. कम बारिश के बावजूद 50-55 प्रतिशत तक बुवाई, 2-3 क्विंटल प्रति बीघा उत्पादन और 6400-6500 रुपए क्विंटल भाव ने इस बार ग्वार को किसानों के लिए राहत की फसल बना दिया है.

First Published :

October 06, 2026, 08:48 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj