Nana Patekar Death Reason: कार्डियक अरेस्ट का शिकार हुए नाना पाटेकर? 75 साल की उम्र में निधन, ये लक्षण हैं जानलेवा

Last Updated:October 08, 2026, 08:23 IST
Nana Patekar Death Cause: 75 की उम्र में भारत के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया. रिपोर्ट के अनुसार, अभिनेता अपने गोवा स्थित घर में बेहोश मिले थे. कार्डियक अरेस्ट के ज्यादातर मामलों में ऐसा ही होता है. हालांकि, निधन के कारण को लेकर अभी कोई ऑफिशियल रिपोर्ट नहीं आयी है.
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कार्डियक अरेस्ट का शिकार हुए नाना पाटेकर? 75 साल की उम्र में निधन, ये लक्षण हैं जानलेवा
Nana Patekar Death Cause: फिल्म जगत के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का निधन हो गया. 75 साल की उम्र में नाना पाटेकर कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो गए. रिपोर्ट के अनुसार, 75 साल के अभिनेता अपने गोवा स्थित घर में बेहोश पाए गए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. डॉक्टरों ने लगातार 45 मिनट तक CPR देकर उनके हार्ट को रिवाइव करने की कोशिश की लेकिन नाना पाटेकर की धड़कनें हमेशा के लिए थम गईं.
कार्डियक अरेस्ट एक जानलेवा मेडिकल कंडीशन है, जिसमें यदि मरीज को तुरंत मेडिकल हेल्प न मिले तो मौत का खतरा रहता है. विश्व भर में हजारों लोग रोज इस जानलेवा बीमारी का शिकार होते हैं. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल लगभग 40-50 लाख लोगों की मौत अचानक कार्डियक अरेस्ट के कारण हो रही है. इससे बचाव के उपाय क्या हैं? किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, चलिए इस लेख में समझते हैं.
कार्डियक अरेस्ट क्या है?हालांकि कार्डियक अरेस्ट दिल से जुड़ी बीमारी है लेकिन ये हार्ट अटैक से काफी हद तक अलग और ज्यादा जानलेवा होती है. कार्डियक अरेस्ट अचानक होता है, बिना किसी चेतावनी के. इसमें दिल की धड़कनें अचानक बहुत तेज हो जाती है, जिससे दिल, दिमाग, फेफड़ों और दूसरे अंगों तक खून नहीं पहुंच पाता है. ऐसे में व्यक्ति बेहोश हो जाता है, और इस स्थिति में जब तुरंत इलाज नहीं मिलता है तो मौत हो जाती है.
कार्डियक अरेस्ट आने पर क्या करेंकार्डियक अरेस्ट होने पर ज्यादतर लोग अस्पताल पहुंचने के दौरान ही दम तोड़ देते हैं. ऐसे में जरूरी है कि मरीज को तुरंत फर्स्ट एड दिया जाए. इसके लिए सबसे पहले मरीज के कंधे पर जोर से थपथपाएं. यदि व्यक्ति कुछ बोल न पाएं, और बेहोशी के स्थिति में हो तो तुरंत एंबुलेंस को कॉल करें. साथ ही मरीज को अस्पताल पहुंचने तक लगातार CPR देते रहें. इसके लिए अपनी हथेलियों को मरीज की छाती के बीच में रखें और अपनी कोहनियों को सीधा रखते हुए अपने जोर से दबाएं. ध्यान रखें मरीज की छाती 2 इंच तक दबनी चाहिए. इसकी गति 100-120 बार प्रति मिनट होनी चाहिए.
About the Authorशारदा सिंहSenior Sub Editor
शारदा सिंह एक अनुभवी लाइफस्टाइल पत्रकार हैं, जिनके पास डिजिटल मीडिया और कंटेंट लेखन के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से…
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New Delhi,Delhi
First Published :
October 08, 2026, 07:59 IST



