‘दिवाली पर बच्चों के नए कपड़ों का सपना टूटा’, राजस्थान में सूखे से खरीफ फसल बर्बाद

जोधपुर. राजस्थान में इस बार मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. प्रदेश में इस साल मानसून की कम बारिश का सबसे ज्यादा असर जोधपुर संभाग के पाली, जालोर और जैसलमेर जिलों में देखने को मिल रहा है. इन जिलों में औसत से बेहद कम बारिश होने के कारण अकाल जैसे हालात पैदा हो गए हैं. खेतों में खड़ी फसलें सूख चुकी हैं और मंडियों में रौनक की जगह सन्नाटा पसरा हुआ है. जोधपुर संभाग के पश्चिमी जिलों पाली, जालोर और जैसलमेर में कम बारिश के चलते खरीफ की फसलें चौपट हो गई हैं. किसानों ने बैंक से कर्ज लेकर और महंगे दामों पर बीज व खाद खरीदकर बाजरा, मूंग, मोठ और ग्वार की बुवाई की थी. लेकिन समय पर बारिश नहीं होने से फसलें खेतों में ही सूख गईं. हालात यह हैं कि अब किसानों के सामने इन सूखी फसलों को खेत से हटाने का संकट खड़ा हो गया है.
किसान रामकिशन ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि इस बार अच्छी फसल होगी तो परिवार के सपने पूरे करेंगे. लेकिन बारिश नहीं होने से अकाल जैसे हालात बन गए. अब खेतों से खराब फसलें हटाने के लिए मजदूरों को अलग से पैसे देने पड़ेंगे. इसलिए उन्होंने खेतों में गायों को छोड़ दिया है, ताकि कम से कम खराब फसलें मवेशियों के चारे के काम आ सकें. उन्होंने सरकार से राहत देने की मांग की.
किसान किशनलाल की आपबीतीकिसान किशनलाल ने कहा कि उन्होंने बाजरा, मूंग और मोठ की बुवाई की थी, लेकिन पूरी फसल बर्बाद हो गई. वे बटाई पर खेत लेकर खेती करते हैं. जब उनके हाथ में ही कुछ नहीं बचा तो खेत के मालिकों को क्या देंगे. अब उन्हें सरकार से उम्मीद है कि गिरदावरी करवाकर मुआवजा दिया जाए, ताकि वे आने वाली रबी की फसल की तैयारी कर सकें.
किसान हरी भाई की व्यथाकिसान हरी भाई कहते हैं कि महंगे बीज, खाद और दिन-रात की कड़ी मेहनत के बाद भी जब कुदरत की मार पड़ती है तो किसान पूरी तरह टूट जाता है. वे पहले ही कर्ज लेकर खेती का काम चलाते हैं. उन्हें उम्मीद थी कि फसल अच्छी होगी तो दिवाली पर बच्चों के लिए नए कपड़े लाएंगे और त्योहार धूमधाम से मनाएंगे. लेकिन अब उनके सारे सपने टूट गए हैं. उन्होंने सरकार से तुरंत अकाल घोषित करने की मांग की.
एशिया की प्रमुख बासनी मंडी में सन्नाटा, व्यापारी भी खाली बैठे
सूखे और अकाल जैसे हालात का सीधा असर अब राजस्थान के व्यापार पर भी देखने को मिल रहा है. पश्चिमी राजस्थान की प्रमुख बासनी मंडी में पाली, सिरोही, जालोर और बाड़मेर सहित कई जिलों के हजारों किसान अपनी उपज लेकर पहुंचते थे. लेकिन अब मंडी में सन्नाटा पसरा हुआ है. मंडी के शेड खाली पड़े हैं, पल्लेदार और मजदूर काम की तलाश में बैठे हैं, जबकि व्यापारी दुकानों के बाहर खाली बैठे नजर आ रहे हैं.
20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं भाव
जोधपुर खाद्य पदार्थ व्यापार संघ, बासनी मंडी के अध्यक्ष प्रकाश मेहता ने कहा कि इस समय बाजरा, मूंग, मोठ और ग्वार जैसी फसलों की बंपर आवक होती थी, लेकिन बारिश नहीं होने से उत्पादन न के बराबर रह गया है. आवक कम होने से मंडी में सन्नाटा है. उत्पादन में भारी गिरावट के कारण आने वाले दिनों में इन फसलों के दामों में 20 से 30 प्रतिशत तक तेजी आ सकती है. उन्होंने कहा कि बारिश की कमी केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं और पूरे बाजार के लिए भी बड़ा झटका है.
सरकार से राहत की आसखेतों से लेकर मंडियों तक छाई इस वीरानी के बीच अब जोधपुर संभाग के किसान और व्यापारी राज्य सरकार की ओर देख रहे हैं. प्रभावित जिलों में तुरंत विशेष गिरदावरी करवाकर मुआवजा राशि जारी करने और अकाल घोषित करने की मांग जोर पकड़ रही है. अब किसानों को इंतजार है कि कुदरत की मार से हुए नुकसान के बाद सरकार उन्हें कब राहत देती है.



