चिकित्सा विभाग की अजब लापरवाही, जिंदा बेटे को रिकॉर्ड में बताया मृत और जन्म प्रमाण पत्र में बना दिया लड़की

Last Updated:October 08, 2026, 11:37 IST
Chittorgarh News: चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन में चिकित्सा विभाग की घोर लापरवाही सामने आई है. नई खातिया खेड़ी निवासी प्यारेलाल जटिया के बेटे भेरूलाल का जन्म 1 जून 2019 को कपासन के सरकारी अस्पताल में हुआ था. अस्पताल प्रशासन ने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में उसे लड़की दर्शा दिया और डिस्चार्ज सर्टिफिकेट में मृत घोषित कर दिया. बच्चा आज कक्षा 2 में पढ़ रहा है, लेकिन कागजों में गड़बड़ी के कारण उसका आधार कार्ड नहीं बन पा रहा है. अनपढ़ पिता इस गलती को सुधरवाने के लिए सालों से फतेहलाल कोठारी अस्पताल के चक्कर काट रहा है.
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Chittorgarh Medical Negligence: कपासन अस्पताल ने जिंदा बेटे को कागजों में बताया मृत, जन्म प्रमाण पत्र में बनाया लड़की
चित्तौड़गढ़. राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन क्षेत्र में चिकित्सा विभाग की घोर लापरवाही का एक ऐसा अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है. जिस मासूम बच्चे ने सात साल पहले इस दुनिया में जन्म लिया और जो आज गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर रहा है, वही बच्चा सरकारी रिकॉर्ड में कहीं लड़की बना दिया गया है तो कहीं उसे मृत घोषित कर रखा है. स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र में उसका लिंग पुलिंग की जगह स्त्रीलिंग दर्ज कर दिया, जबकि अस्पताल के डिस्चार्ज सर्टिफिकेट में उसी बच्चे को मृत पैदा हुआ बता दिया गया. अब इस गंभीर सरकारी चूक को सुधरवाने के लिए पीड़ित पिता पिछले कई सालों से अस्पताल और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है.
यह पूरा मामला कपासन क्षेत्र के नई खातिया खेड़ी गांव में रहने वाले एक गरीब परिवार से जुड़ा हुआ है. गांव के निवासी प्यारेलाल जटिया की पत्नी मांगी जटिया ने 1 जून 2019 को कपासन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक स्वस्थ पुत्र को जन्म दिया था. परिवार ने बड़ी खुशियों के साथ अपने बेटे का नाम भेरूलाल रखा. लेकिन अस्पताल के सरकारी रिकॉर्ड में कर्मचारियों द्वारा की गई एक बड़ी लापरवाही ने आने वाले सालों में इस परिवार की मुश्किलें बढ़ा दीं. जब अस्पताल से बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनकर आया, तो उसमें लिंग पुरुष के बजाय स्त्री दर्ज कर दिया गया. इतना ही नहीं, अस्पताल से मिले डिस्चार्ज सर्टिफिकेट में नवजात के जन्म को मृत जन्म के रूप में दर्ज कर दिया गया.
स्कूल दाखिले और आधार कार्ड बनवाने के दौरान खुला राजबच्चे के पिता प्यारेलाल जटिया पढ़े-लिखे नहीं हैं, जिसके चलते उन्हें उस वक्त सरकारी कागजों में हुई इस गंभीर गलती का पता नहीं चल सका. इस लापरवाही का खुलासा तब हुआ, जब बेटे भेरूलाल का स्कूल में दाखिला कराने और उसका आधार कार्ड बनवाने के लिए जन्म प्रमाण पत्र व अन्य दस्तावेजों की जरूरत पड़ी. पीड़ित पिता का कहना है कि कागजों में सुधार करवाने के लिए उन्होंने कपासन स्थित फतेहलाल कोठारी राजकीय सामुदायिक चिकित्सालय के अनगिनत चक्कर लगाए हैं. हर बार उन्हें उम्मीद होती थी कि अब गलती सुधार दी जाएगी, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई के बजाय उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिलते रहे.
कक्षा 2 में पढ़ रहा है भेरूलाल, भविष्य पर मंडराया संकटवर्तमान में मासूम भेरूलाल अपने गांव के ही राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय खातिया खेड़ी में कक्षा दो में पढ़ाई कर रहा है. एक तरफ बच्चा रोजाना स्कूल जाकर अपना भविष्य संवारने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ सरकारी दस्तावेज उसकी असली पहचान और अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं. जन्म प्रमाण पत्र में गलत लिंग और डिस्चार्ज टिकट में मृत जन्म लिखे होने के कारण बच्चे का आधार कार्ड नहीं बन पा रहा है. परिवार के सामने सबसे बड़ा संकट यह है कि आगे की कक्षाओं में पढ़ाई के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन कैसे होगा. अब इस मामले को लेकर खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रवीण यादव के सामने भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर चिकित्सा विभाग अपनी इस गंभीर भूल को कब सुधारेगा और पीड़ित परिवार को कब राहत मिलेगी.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Chittaurgarh,Chittaurgarh,Rajasthan
First Published :
October 08, 2026, 11:37 IST



