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वो नेत्रहीन संगीतकार, जिन्होंने रचीं ‘राम तेरी गंगा मैली’ जैसी सुपरहिट धुनें, कभी गाया करते थे मंदिरो में भजन

Last Updated:October 09, 2026, 04:25 IST

दिग्गज संगीतकार और गीतकार रविंद्र जैन की पुण्यतिथि पर उनके संगीत सफर को याद किया जाता है. जन्म से दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने सौदागर, अंखियों के झरोखों से और रामायण जैसी फिल्मों और धारावाहिकों मAmazon Prime DayTop Deals Insideवो नेत्रहीन संगीतकार, जिन्होंने रचीं 'राम तेरी गंगा मैली' जैसी सुपरहिट धुनेंZoom

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा में कुछ संगीतकार ऐसे रहे हैं, जिनके गीत लोगों की जिंदगी और यादों का हिस्सा बन गए. रविंद्र जैन भी ऐसे ही संगीतकार, गीतकार और गायक थे. उन्होंने भक्ति, प्रेम और रिश्तों से जुड़े कई गीत गाए, जो आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं. जन्म से दृष्टिहीन होने के बावजूद उन्होंने अपनी कमजोरी को कभी अपनी राह की रुकावट नहीं बनने दिया. 9 अक्टूबर 2015 को दुनिया को अलविदा कहने वाले रविंद्र जैन की पुण्यतिथि पर उनके संगीत सफर को याद किया जाता है.

रविंद्र जैन का जन्म 28 फरवरी 1944 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था. जन्म से ही उनकी आंखों की रोशनी नहीं थी. बचपन से ही वह मंदिरों में भजन और कविताएं गाया करते थे, जिसके चलते परिवार ने उन्हें संगीत की ओर बढ़ने में उनकी मदद की. धीरे-धीरे संगीत उनके जीवन का सबसे मजबूत सहारा बन गया. उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ली और आगे चलकर अपनी प्रतिभा के दम पर फिल्म इंडस्ट्री में पहचान बनाई.

1970 के दशक में हुई रविंद्र जैन की शुरुआतमुंबई पहुंचने से पहले रविंद्र जैन ने कोलकाता में भी संगीत सिखाया और रेडियो से जुड़े रहे. फिल्मी दुनिया में उनकी शुरुआत 1970 के दशक में हुई. उनकी पहली रिलीज फिल्म ‘कांच और हीरा’ है. इस फिल्म में उन्होंने रफी साहब से ‘नजर आती नहीं मंजिल’ गवाया, लेकिन फिल्म से उन्हें कुछ खास पहचान नहीं मिल सकी. 1973 में आई राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म ‘सौदागर’ ने उनकी किस्मत के दरवाजे खोल दिए. उन्होंने इस फिल्म में संगीत देने के साथ-साथ सभी गानों के बोल भी खुद लिखे थे. इस फिल्म में ‘तेरा मेरा साथ रहे’, ‘हर हसीन चीज का’, ‘क्यों लाए सैंया पान’ और ‘हुस्न है या कोई कयामत है’ जैसे गाने हैं.

रविंद्र जैन की फिल्में और धुनइसके बाद रविंद्र जैन ने ‘चोर मचाए शोर’, ‘गीत गाता चल’, ‘चितचोर’, ‘अंखियों के झरोखों से’ और ‘नदिया के पार’ जैसी फिल्मों में संगीत दिया. रविंद्र जैन का राजश्री प्रोडक्शंस के साथ भी लंबा जुड़ाव रहा. ‘सौदागर’ से लेकर ‘विवाह’ और ‘एक विवाह ऐसा भी’ तक उन्होंने कई फिल्मों में संगीत दिया. उनकी धुनों में सादगी और भारतीय संगीत की मिठास होती थी.

करियर की सबसे बड़ी उपलब्धिउनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में ‘राम तेरी गंगा मैली’ का संगीत भी शामिल है. इस फिल्म के लिए उन्हें 1986 में फिल्मफेयर का बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर अवॉर्ड मिला. उन्होंने फिल्मों के अलावा टीवी की दुनिया में भी काम किया. रामानंद सागर की ‘रामायण’ के संगीत से उनका नाम हमेशा के लिए जुड़ गया. इसके अलावा ‘श्री कृष्ण’ और ‘जय हनुमान’ जैसे धार्मिक धारावाहिकों के लिए भी उन्होंने संगीत तैयार किया.

नहीं रहे रविंद्र जैनरविंद्र जैन ने फिल्मी संगीत के साथ धार्मिक और निजी म्यूजिक एल्बमों पर भी काफी काम किया. 2015 में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था. उसी साल 9 अक्टूबर को मुंबई में उनका निधन हो गया.

About the AuthorVarshaSenior Sub Editor

वर्षा पिछले 9 सालों से डिजिटल मीडिया की दुनिया में सक्रिय हैं. वह वर्तमान में हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। बॉलीवुड की चमक-दमक से लेकर ओटीटी की नई दुनिया और टीवी इंडस्ट्री की हलचल तक, …

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October 09, 2026, 04:25 IST

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