इस पार्क में 13 दिन रखा गया था गांधीजी का अस्थि कलश, आज भी मौजूद है राजाओं के दौर की जलदार तोप

Last Updated:October 09, 2026, 09:58 IST
History of Dholpur Historical Park: राजस्थान के धौलपुर में स्थित ऐतिहासिक एकीकृत पार्क राजतंत्र से लोकतंत्र तक के सफर का गवाह है. राज निवास महल के सामने स्थित इस पार्क में आज भी रियासतकालीन जलदार तोप मौजूद है. पूर्व में यह जवाहर, गांधी और सुभाष पार्क के रूप में बंटा था, जिन्हें बाद में एक कर दिया गया. यहां महात्मा गांधी का अस्थि कलश रखा गया था, जिसके चलते इसे गांधी पार्क के नाम से भी जाना जाता है. आज यह पार्क लोगों की दिनचर्या और सामाजिक आयोजनों का हिस्सा है, लेकिन इतिहासकार इसके बेहतर रखरखाव व विकास की मांग कर रहे हैं.
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Dholpur: राजस्थान के धौलपुर शहर में स्थित एकीकृत पार्क केवल एक आम घूमने-फिरने की जगह नहीं है, बल्कि यह रियासतकाल के समृद्ध इतिहास और राजतंत्र से लोकतंत्र तक के बड़े बदलावों का एक जीवंत गवाह है. राज निवास महल के ठीक सामने स्थित इस ऐतिहासिक पार्क में आज भी रियासतकाल की अनूठी निशानियां मौजूद हैं. इनमें सबसे प्रमुख है रियासतकालीन जलदार तोप, जो पुराने समय के वैभव और राजशाही ठाठ-बाट की याद दिलाती है. इस पार्क का कोना-कोना धौलपुर के गौरवशाली अतीत की कहानियां बयां करता है.
पार्क में करीब 100 से अधिक विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे लगे हुए हैं, जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता में चार चांद लगाते हैं. सुबह और शाम के समय यहां धौलपुर शहर के लोग बड़ी संख्या में घूमने, टहलने और व्यायाम करने के लिए पहुंचते हैं. खास बात यह है कि ऐतिहासिक पहचान रखने वाले इस पार्क का उपयोग केवल सैर-सपाटे के लिए ही नहीं होता, बल्कि आज भी यहां गोद भराई जैसे पारंपरिक और सामाजिक कार्यक्रम बड़े उल्लास के साथ आयोजित किए जाते हैं.
राजतंत्र से लोकतंत्र तक का गवाहइतिहासकार अरविंद शर्मा इस पार्क के ऐतिहासिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हैं. वह बताते हैं कि धौलपुर के इस पार्क ने राजतंत्र की समाप्ति और लोकतंत्र की शुरुआत का वह अहम दौर बेहद करीब से देखा है. धौलपुर रियासत के तत्कालीन राजा-महाराजाओं ने यहां एक विशेष जलदार तोप बनवाई थी. यह तोप आज भी पार्क की शोभा बढ़ा रही है और इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. यह तोप पार्क के ऐतिहासिक महत्व और रियासतकालीन वैभव की एक मजबूत पहचान बनी हुई है.
तीन पार्कों का हुआ एकीकरणभारत में राजतंत्र खत्म होने के बाद जब लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की शुरुआत हुई, तो इस पार्क के स्वरूप में भी कई बदलाव आए. इतिहासकार अरविंद शर्मा के अनुसार, लोकतंत्र के शुरुआती दौर में यहां तीन अलग-अलग पार्क हुआ करते थे, जिन्हें जवाहर पार्क, गांधी पार्क और सुभाष पार्क के नाम से जाना जाता था. इन तीनों पार्कों की अपनी-अपनी अलग ऐतिहासिक स्मृतियां और महत्व थे. बाद में प्रशासन ने इन तीनों पार्कों को एकीकृत करके एक बड़ा और भव्य पार्क बना दिया, ताकि यह शहर के लोगों के लिए एक प्रमुख और आकर्षक सार्वजनिक स्थल बन सके.
महात्मा गांधी की स्मृतियां और वर्तमान स्थितिपार्क के अंदर मौजूद गांधी चबूतरे पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित है. इसके साथ ही यहां का ऐतिहासिक फव्वारा भी इस पूरे परिसर को बेहद खास और आकर्षक बनाता है. इतिहासकार अरविंद शर्मा बताते हैं कि महात्मा गांधी की मृत्यु के बाद उनकी स्मृति से जुड़ा एक अस्थि कलश भी यहां रखा गया था. उस समय इस पार्क में पूरे 13 दिनों तक शोक मनाया गया था और शहर के लोगों ने बापू को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की थी. गांधीजी की स्मृति को समर्पित होने के कारण ही इस स्थान को गांधी पार्क के नाम से स्थायी पहचान मिली. आज भी यहां विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं. हालांकि, इतिहासकारों का मानना है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को पर्यटन की दृष्टि से और बेहतर ढंग से संरक्षित व विकसित करने की आवश्यकता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Dhaulpur,Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
October 09, 2026, 09:58 IST



