bharatpur news I खेती में नया प्रयोग कर रहे भरतपुर के किसान, ताइवानी पपीते से मुनाफे की आस

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ताइवानी पपीते की खेती करने से पहले जान लें ये बातें, वरना हो सकता है नुकसान
Last Updated:October 09, 2026, 14:30 IST
Taiwanese Papaya: भरतपुर के वैर और भुसावर क्षेत्र में किसान पारंपरिक खेती के साथ ताइवानी पपीते की खेती को भी अपना रहे हैं. अधिक फल देने की संभावना और बाजार में अच्छी मांग के चलते यह किस्म किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है. उद्यान विभाग के अनुसार, सही देखभाल, उचित जल निकासी और समय पर रोग नियंत्रण से किसान इस फसल से बेहतर आमदनी की उम्मीद कर सकते हैं.
भरतपुर. जिले में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी की ओर भी तेजी से रुख कर रहे हैं. जिले के वैर और भुसावर क्षेत्र में पपीते की खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया बनती जा रही है, जिसमें ताइवानी पपीते की देशी पपीते की तुलना में अधिक पसंद है. ताइवानी किस्म के पौधों पर अधिक फल लगने और बाजार में अच्छी मांग मिलने के कारण किसान इस फसल में रुचि दिखा रहे हैं. बेहतर उत्पादन और उचित बाजार भाव मिलने की संभावना के चलते यह खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. वैर और भुसावर क्षेत्र अपनी बागवानी के लिए जाना जाता है, पपीते की खेती भी किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है. किसान ऐसी किस्मों को अपनाने पर जोर दे रहे हैं, जिनसे उन्हें बेहतर उत्पादन के साथ बाजार में अच्छी कीमत मिल सके.
उद्यान विभाग के अधिकारी जनक राज मीणा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि भरतपुर का वैर और भुसावर क्षेत्र बागवानी के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है. यहां किसान अब ताइवानी पपीते सहित पपीते की विभिन्न किस्मों की खेती कर रहे हैं. ताइवानी पपीते की खासियत यह है कि इसकी कुछ किस्मों में देशी पपीते की तुलना में अधिक फल प्राप्त हो सकते हैं. यही कारण है.कि किसान इस फसल को अपनाने में रुचि ले रहे हैं.पपीते की खेती में किसानों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है. पपीते के पौधे मौसम में होने वाले बदलावों के प्रति संवेदनशील होते हैं. खासकर सर्दी और बरसात के मौसम में फसल की उचित देखभाल करना बेहद जरूरी है अत्यधिक नमी जलभराव और प्रतिकूल तापमान के कारण पौधों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहती है.
ऐसे में किसानों को खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने पौधों की नियमित निगरानी करने और जरूरत के अनुसार कृषि विशेषज्ञों की सलाह से दवाओं का इस्तेमाल करने पर ध्यान देना चाहिए. पौधों की सही देखभाल संतुलित पोषण और समय पर रोग नियंत्रण से फसल को नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है. भरतपुर के वैर और भुसावर क्षेत्र में ताइवानी पपीते की खेती किसानों के लिए बागवानी के नए अवसर खोल रही है. सही किस्म का चयन वैज्ञानिक तरीके से खेती और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर किसान इस फसल से बेहतर आमदनी हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Bharatpur,Rajasthan
First Published :
October 09, 2026, 14:30 IST



