Karauli Desi Kali: महंगे पेंट को टक्कर दे रही करौली की देसी कली, 250 रुपये में चमक उठेंगी घर की दीवारें

Last Updated:October 09, 2026, 18:20 IST
Karauli Desi Kali: दिवाली से पहले करौली में घरों की रंगाई-पुताई के लिए देसी कली की मांग बढ़ने लगी है. महंगे पेंट और डिस्टेंपर के बीच यह पारंपरिक विकल्प कम खर्च में दीवारों को आकर्षक सफेदी और चमक देता है. जहां डिस्टेंपर की एक बाल्टी पर करीब 1,000 रुपये तक खर्च होते हैं, वहीं कली से पुताई लगभग 250 रुपये में हो जाती है.
करौली. दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रंग-रोगन की रौनक बढ़ने लगी है, घरों को नया लुक देने के लिए लोग तरह-तरह के ब्रांडेड डिस्टेंपर और पेंट खरीद रहे हैं. लेकिन राजस्थान के करौली में आज भी एक पारंपरिक विकल्प लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. यह है देसी कली, जिसका इस्तेमाल वर्षों से घरों की दीवारों को चमकाने के लिए किया जाता रहा है. आधुनिक रंगों के दौर में भी कली की मांग बरकरार है. इसकी कम कीमत, आकर्षक चमक और पारंपरिक उपयोग इसे खास बनाते हैं.
कली की सबसे बड़ी खासियत इसकी कम कीमत है, जहां महंगे डिस्टेंपर और पेंट से घरों की रंगाई कराने में अच्छा-खासा खर्च आता है, वहीं कली कम बजट में दीवारों को नया रूप देने का विकल्प उपलब्ध कराती है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, इसे लगाने से दीवारों पर आकर्षक सफेदी और नीले रंग की रौनक दिखाई देती है. यही वजह है कि कई लोग हर साल दिवाली पर घरों की रंगाई के लिए कली का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं. करौली में कली को नीले रंग और फेविकोल के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, इसकी टिकाऊपन और चमक दीवारों की स्थिति, मिश्रण और लगाने के तरीके पर निर्भर करती है.
पुरानी हवेलियों और ग्रामीण घरों में आज भी इस्तेमालकली का इस्तेमाल केवल शहरों तक सीमित नहीं है. ग्रामीण इलाकों में भी लोग कच्चे मकानों, झोपड़ियों और दीवारों की पुताई के लिए इसका उपयोग करते हैं. खासकर पुराने घरों और हवेलियों में इसकी लोकप्रियता आज भी बनी हुई है. कम खर्च में घर की दीवारों को साफ-सुथरा और आकर्षक बनाने का यह पारंपरिक तरीका लोगों को पसंद आता है. स्थानीय स्तर पर कली के इस्तेमाल को मक्खी-मच्छरों की परेशानी कम होने से भी जोड़कर देखा जाता है. कलर व्यापारी गोवर्धन गुप्ता बताते हैं कली में कई ऐसे केमिकल होते हैं जिससे घर में मच्छर मक्खी और कीटनाशकों का प्रकोप कम हो जाता है. ग्रामीण लोग और पुराने घर वाले लोग इसीलिए इसे सबसे ज्यादा पसंद करते हैं.
दिवाली पर हर साल रहती है अच्छी मांगकरौली के रंग व्यापारी राजू बंसल बताते हैं कि आधुनिक पेंट और डिस्टेंपर के बढ़ते चलन के बावजूद कली की मांग आज भी बनी हुई है. आज भी बड़ी संख्या में लोग हर साल दिवाली पर कली खरीदना पसंद करते हैं. खासकर पुराने मकानों और हवेलियों में रहने वाले लोग इसे प्राथमिकता देते है. बंसल के मुताबिक, जहां डिस्टेंपर से रंगाई कराने में एक बाल्टी पर करीब 1,000 रुपये तक खर्च हो सकते हैं, वहीं कली से यह काम लगभग 250 रुपये में हो जाता है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Karauli,Rajasthan
First Published :
October 09, 2026, 18:20 IST



